क्या आप जानते है ?

ओउम्

क्या आप जानते हैं ?

१. ‘वेद’ दुनिया की सबसे पुरानी पुस्तक है | जबसे मानवता है तब से वेद उसी रूप में उपलब्ध है |

२. ‘वैदिक (हिन्दू) धर्म’ से पुराना और दूसरा धर्म नहीं है |

३. ‘वैदिक संस्कृत’ (वेद की भाषा) से पुरानी कोई दूसरी भाषा नहीं मिलती यहाँ तक की सब भाषाएँ – अंग्रेजी, अरबी, फारसी आदि सभी संस्कृत से ही निकली हैं (माँ को संस्कृत में मातर कहते हैं, फारसी में मादर, अंग्रेजी में मदर) |

४.    ‘वेद’ को छोड़कर कोई भी ऐसी पुस्तक नहीं बनी जिसमें एक भी अक्षर या मात्रा का हेर-फेर आज तक न हुआ हो | बाकी सब पवित्र किताबें उनके लाने वालों के मरने के कई वर्ष बाद लिखी गईं जिससे उनमें छेड़-छाड की पूरी गुंजाईश है पर ‘वेद’ शुरू से ही ‘पाठ-विधि’ नाम की विद्या के कारण से आज भी वैसे ही हैं |

५.‘वेद’ ही दुनिया की ऐसी किताब है जिसमें किसी मनुष्य की कहानी अथवा नाम नहीं मिलता हो | दुनिया में हिन्दू धर्म ही अकेला धर्म है जिसके मानने वाले को किसी, अवतार, इंसान, रसूल में यकीन नहीं करना पड़ता है केवल एक ईश्वर में ही विश्वास करना पर्याप्त है |

६.‘वेद’ ही दुनियाँ की एक अकेली पुस्तक है जो ‘हे मनुष्यो’ कह कर पूरी इंसानियत को उपदेश करती है | विश्व की अन्य सभी पुस्तकें या तो “हे ईसाईयो” या ‘हे ईमान वालो (मुसलमानो)’ कह कर केवल अपनों को उपदेश करती हैं और अन्य सब को छोड़ देती हैं | बल्कि बाकी सब को जहन्नुमी करार देती हैं |

७.वैदिक (हिन्दू) धर्म में कोई जात-पात, ऊँच-नीच , छूत-अछूत नहीं | जब ईश्वर ने सबको एक जैसे आंख, नाक, कान, दिमाग दिया है तो दो मनुष्य ऊंचे-नीचे कैसे हुए ? जब सबसे पवित्र ईश्वर को किसी को बनाते हुए छूट नहीं लगी तो हमें साथ रहने में छूट कैसे लगेगी ? जो हिन्दू धर्म में भेद-भाव मानते हैं वे बुरी तरह भटके हुए हैं |

८.कोई भारतीय ईसाई पोप नहीं बन सकता और कोई भारतीय मुसलमान इस्लाम का खलीफा नहीं बन सकता | क्योंकि हुकूमत करने का अधिकार केवल अरबों के पास है, गैर-अरबी मुसलमान केवल अरबों के हुक्म का पालन करने और गुलामी के लिए है | लेकिन ‘वेद’ के अनुसार बुद्धि, शक्ति, अच्छाई में जो सबसे बढ़कर हो वही राजा होना चाहिए |

९.‘वेद’ दुनिया की अकेली पुस्तक है जिसमें गैर-औरत को माँ का दर्जा प्राप्त हैं |

१०. ‘वेद’ विश्व की इकलौती पुस्तक है जो हमसे हिन्दू, ईसाई अथवा मुसलमान बनाने के लिए नहीं लेकिन मनुष्य (समझदार इंसान) बनने के लिए कहती है |

११. वैदिक (हिन्दू) धर्म अकेला ऐसा धर्म है जो इंसान को अपनी मर्जी से पूजा/इबादत करने की छूट देता है |

१२.वैदिक (हिन्दू) धर्म कोई जबर्दस्ती नहीं है | ‘वेद’ की बात को भी जबर्दस्ती, बिना सोचे समझे मानना वेद के विरुद्ध है | वे विश्व की वो पुस्तक है जो कहती है जितना समझ आता जाय उतना मान लो और जो समझ न आये उसे मत मानो |

१३.‘वेद’ हर कोई पढ़ सकता है | हर कोई उसे पढ़कर ब्राह्मण बन सकता है | चाहे वह किसी मजहब या जाति से आया हो |

१४.वैदिक (हिन्दू) धर्म के हवन, संध्या, गायत्री, ओउम् का जप इत्यादि सब मजहब/धर्म के लोग कर सकते हैं, इससे मन ही साफ नही होता बल्कि, उम्र भी बढ़ती है |

१५. विश्व का प्रत्येक इंसान जब चाहे ‘वैदिक (हिन्दू) धर्म’ अपना सकता है |

१६.वैदिक (हिन्दू) धर्म अकेला ऐसा धर्म है जिसके मुताबिक ईश्वर/अल्लाह हम सब इंसानों (हिन्दू-मुसलमानों) के पिता के जैसा है वह सबको एक जैसा प्यार करता है | सबके लिए सुख चाहता है |

१७. वैदिक (हिन्दू) धर्म के अनुसार ईश्वर केवल एक जन्म की गलतियों के लिए हमेशा के लिए अपने बच्चों को जहन्नुम में नही जलाता | वह फिर से सबको अवसर देता है की वे अगली बार अच्छे काम करके सुख पायें |

१८.‘वेद’ के अनुसार सब मजहब/धर्मों के सब अच्छे लोग सुख पाएंगे और सब मजहब धर्मों के बुरे लोग दुःख पाएंगे |

१९.‘वेद’ मनुष्यों को एक दूसरे से इस तरह प्यार करने को कहता है जैसे गाय अपने बछड़े से करती है | कोई जाति धर्म की दीवार इस प्यार के आड़े नहीं आ सकती | जानिए और भी बहुत कुछ जैसे कि ब्रह्मा, विष्णु, शिव इत्यादि अलग-अलग ईश्वर नहीं लेकिन एक ही इश्वर के अलग-अलग नाम हैं | ईश्वर ने हमें क्यों पैदा किया है, वह ईश्वर है कैसा ? इन सब प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए पढ़ें ‘स्वामी दयानंद’ की बेजोड़ पुस्तक ‘सत्यार्थ प्रकाश’ जिसने रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान, सर सैयद अहमद खान, अनवर सेख, गुलाम जेलनी बर्क, मौलाना सनाउल्ला, मौलाना अब्दुल हक़ जैसे बड़े लोगों की जिन्दगी पलट के रख दी |

 
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