क्या जीजस प्रेम का मसीहा था ?

 

 

  क्या जीजस प्रेम का मसीहा था ?

 


लेखक
:

डॉ. कृष्ण वल्लभ पालीवाल

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ईसाई पादरी सैकड़ों वर्षों से यही कहते आ रहे है कि जीजस तो प्रेम और शांति का अग्र दूत था | हम तो उसी के संदेश को मानव मात्र में पारस्परिक प्रेम और शांति के लिए प्रचारित कर रहे है जो कि पवित्र बाइबिल में संग्रहीत है | यहाँ हम जीजस के उसी प्रेम और शांति के संदेश और व्यवहार की सच्चाई को परखने के लिए बाइबिल के कुछ संदर्भों को ही पाठकों के सामने प्रस्तुत कर रहे है ताकि वे स्वयं ही इस दावे के सच और झूठ का फैसला कर लें | सभी संदर्भ बाइबिल सोसाइटी ऑफ इंडिया, पाकिस्तान एंड सिलोन, इलाहाबाद, 1950 द्वारा प्रकाशित होली बाइबिल के हिन्दी अनुवाद धर्मशास्त्र अर्थात पुराना और नया धर्म नियम से लिए गए है |

  1. “यह न समझो, कि मैं पृथ्वी पर मिलाप कराने आया हूँ | मैं मिलाप कराने को नहीं, पर तलवार चलवाने आया हूँ | मैं तो आया हूँ कि मनुष्य को उसके पिता से, और बेटी को उसकी माँ से और बहू को उसकी सास से अलग कर दूँ | मनुष्य के बैरी उसके घर के ही लोग होंगे |” (मत्ती. 34-36, पृ. 9)
  2. “क्या तुम समझते हो कि मैं पृथ्वी पर मिलाप कराने आया हूँ? मैं तुमसे कहता हूँ नहीं, वरन अलग कराने आया हूँ | क्योंकि अबसे एक घर में पाँच जन आपस में विरोध रखेंगे, तीन दो से और दो तीन से | पिता पुत्र से और पुत्र पिता से विरोध रखेगा, माँ बेटी से और बेटी माँ से, सास बहू से और बहू सास से विरोध रखेगी |” (लूका 12:51-53, पृ. 63)
  3. यीशु के कहा “परंतु मेरे उन बैरियों को जो नहीं चाहते थे कि मैं उन पर राज्य करूँ, उनको यहाँ लाकर मेरे सामने घात करो” (लूका 19:27, पृ. 70)
  4. “यीशु ने उनसे कहा कि मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ जब तक मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ और उसका लहू न पीयो, तुम में जीवन नहीं” (यूहन्ना 6:53 पृ.85)
  5. “तू डायन को जीवित न रहने देना” (निर्गमन 22:18, पृ. 59)
  6. “जो मेरे साथ नहीं वो मेरे विरोध में है ……जो कोई पवित्र आत्मा के विरोध में जो कुछ कहेगा तो उसका अपराध न तो इस लोक में न ही पर लोक में क्षमा किया जाएगा” (मत्ती 12:30-32 पृ. 11)
  7. “क्योंकि जो हमारे विरोध में नहीं, वो हमारी ओर है” (मरकुस 9:40, पृ. 38)
  8. “जो विश्वास करे और वपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परंतु जो विश्वास न करेगा वो दोषी ठहराया जाएगा” (मरकुस 16:16 पृ. 46)
  9. हे स्रापित लोगो ! मेरे सामने से उस अनंत आग में चले जाओ, जो शैतान और उसके दूतों के लिए तैयार की गई है | (मत्ती. 25:41 पृ. 24)
  10. “यदि तेरा सगा भाई वा बेटा वा बेटी वा तेरी अर्द्धांगिनी वा प्राणप्रिय तेरा कोई मित्र निराले में तुझको यह कहकर फुसलाने लगे कि आओ हम दूसरे देवताओं की पूजा-उपासना करें, जिन्हें न तू न तेरे पुरखे जानते थे, चाहे वे तुम्हारे निकट रहने वाले आस-पास के लोगों के चाहे पृथ्वी के एक छोर से लेकर दूसरे छोर तक दूर-दूर के रहने वालों के देवता हों, तो तू उसकी न मानना और न तो उसकी बात सुनना; और न उसपे तरस खाना और न कोमलता दिखाना और न उसको छिपा रखना | उसको अवश्य घात करना, उसके घात करने में पहले तेरा हाथ उठे, पीछे सब लोगों के हाथ उठें |” (व्यवस्था विवरण 13:6-9, पृ. 166)
  11. “और मूसा ने सहस्र, पति, शतपति आदि सेनापतियों से जो युद्ध करके लौटे थे क्रोधित होकर कहा – क्या तुमने सभी स्त्रीयों को जीवित छोड़ दिया?……..” तो बाल-बच्चों में से हर एक लड़के को और जितनी स्त्रीयों ने पुरूष का मुंह देखा हो, उन सभी को घात करो | परंतु जितनी लड़कियों ने पुरूष का मुंह न देखा हो, उन सभी को तुम अपने लिए जीवित रखो | (गिनती 31:14-18 पृ. 147)
  12. “भला होता की जो तुम्हें डांवांडोल करते है वो काट दिये जाते ” (गलतियों 5:12, पृ 169)
  13. “जो कोई यहोवा को छोड़ किसी और देवता के लिए बलि करे उसका सत्यानाश किया जाय” (निर्गमन 22:20, पृ. 69)
  14. “यहोवा का धन्यबाद करो, क्योंकि वह भला है…………………..उसने मिस्रीयों के पहिलौठों को मारा” (भजन संहिता 36:1, 10, पृ. 553)
  15. “यहोवा जल उठने वाला और पलटा लेने वाला ईश्वर है ; यहोवा पलटा लेने वाला और जलजलाहट करने वाला है यहोवा अपने द्रोहीयों से बदला लेता है और अपने शत्रुओं के पाप नहीं भूलता” (नूहम 1:2, पृ. 799)
  16. “और यहोवा ने तुझे यात्रा करने की आज्ञा दी और कहा ; जाकर उन पापी अमालेकियों का सत्यानाश कर और जब तक वे मिट न जाएँ तब तक उनसे लड़ता रह |”(1 शमूएल 15:18, पृ. 249)
  17. “इसलिए अब तू जाकर अमालेकियों को मार और जो कुछ उनका है उसे बिना कोमलता किए सत्यानाश कर; क्या पुरूष, क्या स्त्री, क्या बच्चा, क्या दूध पिउवा, क्या गाय-बैल, क्या भेद-बकरी, क्या ऊंट, क्या गधा, सब को मार डाल” (1 शमूएल 15:3, पृ. 249)
  18. “और जब तेरा परमेश्वर यहोवा उसे (विरोधी को) तेरे हाथ में सौप दे तब उसमें के सब पुरूषों को तलवार से मार डालना | परंतु स्त्रीयों, बाल-बच्चों और पशु आदि जितनी लूट उस नगर में हो उसे अपने लिए रख लेना और तेरे शत्रुओं की लूट जो तेरा परमेश्वर तुझे दे, उसे काम में लाना” (व्यवस्था विवरण 20:13, पृ. 171)
  19. “तब शमूएल ने कहा अमालेकियों के राजा अगाग को मेरे सामने ले आओ …….तब शमूएल ने अगाग को गिलगाल में यहोवा के सामने टुकड़े-टुकड़े किया “(1 शमूएल 15:32-33, पृ. 250)
  20. “और हमारे परमेश्वर यहोवा ने उसको हमारे द्वारा हरा दिया और उसको हमने पुत्रों और सारी सेना समेत मार डाला | उसी समय हमने उसके सारे नगर के लिए और एक-एक बसे हुए नगर का स्त्रीयों तथा बल-बच्चों सहित ऐसा सत्यानाश किया कि कोई न छूटा” (व्यवस्था विवरण 2:33-35 पृ. 155)
  21. “और जैसा हमने हेशबोन के राजा सीहोन के नगरों में किया था, वैसा ही हमने इन नगरों में किया अर्थात सब बसे हुए नगरों को स्त्रीयों और बाल-बच्चों समेत सत्यानाश कर डाला” (व्यवस्था विवरण 3:6, पृ. 155)
  22. और ऐसा हुआ कि आधी रात को यहोवा ने मिस्र देश में सिंहासन पर विराजने वाले फिरौन से लेकर गड्ढे में पड़े हुए बंधुए तक सबके पहिलौठों को वरन पशुओं के पहिलौठों को मार डाला | (निर्गमन 12:29, पृ. 59)
  23. “अलिय्याह” ने उनसे कहा, बाल के (450 विरोधी) नबियों को पकड़ लो उनमें से एक भी छूटने न पाये, तब उन्होने उनको पकड़ लिया और अलिय्याह ने उन्हें नीचे कीशोण के नाले में ले जाकर मार डाला | (1 राजा 18:40, पृ. 315)

 

बाइबिल के उपरोक्त उद्धहरणों से सुस्पष्ट है कि यीशु का शांति व प्रेम का संदेश अपने अनुयायियों तक ही है | अन्यों को शत्रु मानने व नाश करने का संदेश है | इसलिए बाइबिल यीशु के विरोधियों को नाश करने के उदाहरणों से भारी पड़ी है |

   इसलिए थामस जैफरसन कहता है कि, “बाइबिल का परमात्मा क्रूर, बदला लेने वाला, अन्यायी और स्वेच्छाचारी है | उसका चरित्र बड़ा भयंकर है | यहूदी पुरोहित खून के प्यासे है |” (टी. जे. रेंडोल्फ़ द्वारा संपादित “जैफरन की स्मृतियाँ एवं पत्र व्यवहार” खंड 4, पृ. 326-327) |

डीन फरार कहता है कि “बाइबिल बर्बर लोगों के लिए, बर्बर युग में लिखी गई, एक बर्बर पुस्तक है” (बाइबिल इन था बैलेंस अर्थात बाइबिल की असलियत – चार्ल्स स्मिथ) |

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ईसाइयत के शांति व प्रेम के भारत में उदाहरण :-

ईसाइयत की मतांधता, बर्बरता और अमानुषिक अत्याचारों को यूरोप ही नहीं, भारत के इतिहास में भी देखा जा सकता है | ‘गोवा इङ्क्वीजीशन’ के नाम से विख्यात, ईसाई प्रशासकों के अत्याचारों को पढ़कर रोंगटे खड़े हो जाते है, जिन्होने हिंदुओं पर ही नहीं, मुसलमानों व यहूदियों पर भी अत्याचार किए, जहां उन्होने हिंदुओं के निरापराध स्त्री, पुरूष व बच्चों का कत्ल किया, वहाँ अनेकों मंदिर भी तोड़े तथा विवाह उत्सवों और दैनिक जिंदगी पर अनेक प्रतिबंध लगाए | 1498 में पुर्तगाली वास्कोडिगमा के आगमन के बाद पुर्तगालियों ने गोवा में अपना राज्य स्थापित किया और हिंदुओं के धर्मांतरण के लिए उन पर अनेकों अत्याचार किए | यहाँ उन्होने दो प्रकार की नीतियां अपनाई | ईसाइयत का विरोध करने वाले हिंदुओं पर अन्याय और अत्याचार एवं नव-ईसाइयों को प्रलोभन एवं सुविधाएं | इसके लिए पुर्तगाली प्रशासकों ने 1559 से 1737 ईसवी तक अनेकों हिन्दू विरोधी कानून बनाए (देखिये एंटी हिन्दू लॉज इन गोवा, गोवा इङ्क्वीजीशन, ए. के. प्रयोलकर, पृ. 114-149)

इन हिन्दू विरोधी नियमों में मुख्य थे:- ब्राह्मणों को देश निकाला, उनकी संपत्ति हड़पना, मंदिर नष्ट करना तथा नए मंदिर न बनाने देना एवं पुरानो की भी मरम्मत न करने देना | हिन्दू रीति-रिवाजों पर प्रतिबंध लगाना जैसे- हिन्दू रीति-रिवाजों से विवाह व नामकरण संस्कार न करने देना, यज्ञोपवीत न पहनने न देना, चोटी न रखने देना और घर के आँगन में तुलसी का पौधा न लगाने देना आदि अथवा ऐसे करने पर भारी जुर्माना | अध्यापक और पुजारियों का विनाश तथा ईसाइयत के प्रचार-प्रसार में अवरोध करने वालों को देश निकाला, उनको उनकी संपत्ति से वेदखल करना, ऐसे लोगों को उनकी जीविका से वंचित करना तथा गांवों में लोगों को उनके पैत्रक अधिकारों से वंचित करना | हिंदुओं के अपाहिज बच्चों को छीन कर उन्हें ईसाइयत में दीक्षित करना, हिन्दू स्त्री-पुरूषों को बलपूर्वक ईसाइयत के उपदेशों को सुनने को विवश करना आदि | इसके विपरीत ईसाइयत को बढ़ावा देने वाले के लिए ऐसे कानून बनाए गए जिससे प्रशासन में ईसाइयों का एकाधिकार एवं प्रमुख पदों पर ईसाइयतों को प्रमुखता, धर्मांतरण के पश्चात पैतृक हिन्दू संपत्ति में नव इसाइयों के अधिकारों में परिवर्तन, ग्रामीण जीवन में हिन्दू-ईसाइयों में भेदभाव व पक्षपात व इसाइयों को विशेषाधिकार आदि | इनके अलावा गोवा इङ्क्वीजीशन ने भी विशेष भूमिका निभाई | परिणामस्वरूप 1567 में ही 280 हिन्दू मंदिर नष्ट कर दिये गए | इसलिए वहाँ पर हिन्दू मंदिर नगण्य है | पुर्तगाली ईसाई शासनकाल में ब्राह्मणों और स्वर्णकारों पर महान अत्याचार किए गए जिनकी गाथाएँ रोंगटे खड़े कर देती है | यहाँ आर्कबिशप एवोरा का 1897 में लिस्बन की केथेड़ेरल चर्च में दिये गए वक्तव्य को एक उदाहरण के रूप में देना पर्याप्त होगा |

“वैसे तो इङ्क्वीजीशन सभी जगहों पर एक बदनाम न्यायाधिकरण था | लेकिन इतनी बदनामी इतनी गहराई तक न पहुंची, न कहीं इतनी घृणास्पद थी, न कहीं इतनी जघन्य और न कहीं इतनी निर्लज्ज स्वार्थो से पूर्ण थी जैसा कि गोवा का न्यायाधिकरण या ट्रिब्यूनल जिसे संयोगवश ‘होली (पवित्र)’ ऑफिस कहा जाता है | यहाँ पर ये इङ्क्वीजीटर यानी ईसाई धर्म के न्यायाधिकरण के अधिकारीगण इस हद तक चले गए कि जिन हिन्दू स्त्रीयों ने उनके साथ बलात्कार का विरोध किया उन्हें जेलों में डालकर अपनी कमवासना की पूर्ति के बाद उन्हें हेरेटिक्स यानी ईसाई अविश्वासी कहकर जिंदा जलाने का आदेश दे दिया” (दी गोवा इङ्क्वीजीशन, ए. के. प्रियोलकर, पृ. 175) |

“The Inquisition was an infamous tribunal at all places. But the infamy never reached greater depths nor was more vile, more black and more completely determined by mundane interests that at the tribunal of Goa, by irony called Holy Office. Here the Inquisitors went to the imprisoning in the jails women who resisted their advances, and after having satisfied their bestial instincts there, ordering that they be burnt as heretics”

(Archbishop of Evora at the Cathederal Church of Lisbon in 1897).

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हंटर कहता है कि एक सुंदर मस्जिद को चर्च में बदल दिया  और अन्य आठ मंदिर पूजा घर (चर्च) बना दिये” (इम्पी. गज. IV, पृ. 101)

यह है जीजस के मानव मात्र के प्रति प्रेम का नमूना | इसी तरह आर्थर फ़्रेडरिक इडेने अपनी पुस्तक “अनजिप्पड़ दी पोपसवेयर” (1987) के अंतिम अध्याय में रोम के पोपों द्वारा 590 ईसवी से लेकर 1986 इसवी तक किए गए हिंसा और असहिष्णुता के उदाहरणों का विवरण दिया गया है जो ईसाइयत की दानवता का जीता जागता प्रमाण है इस विषय में जैक. टी. चिक का यह कथन विचारनीय हैं कि “रोम यानी ईसाइयत जब अल्पमत में होती है तो मेमने की तरह विनम्र बराबर होने पर लोमड़ी की तरह चालाक और बहुमत में होने पर चीते की तरह आक्रामक होती है तथा नाश करने का प्रयास करती है” |

भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्रो में स्थिति इसी आक्रामकता का परिणाम है कि आए दिन सामान्य नागरिक ही नहीं सेना के जवान व अधिकारी भी मारे जा रहे हैं |

सच्चाई यह है कि जीजस क्राइस्ट न कभी प्रेम और शांति का मसीहा था और न उसके अनुयायी ही कभी रहे | उन्होने सदैव छल, कपट, लोभ, लालच, चमत्कार हिंसा कूटनीति और शासन एवं धनबल पर हिंदुओं का धर्मांतरण किया है | काश ! हिन्दू इस कटु सत्य को गोवा इङ्क्वीजीशन के बाद समझ लेते तो संभल जाते और यदि अब भी समझ जाएँ और राजनाइटिक दृष्टि से एकजुट हो जाएँ तो राष्ट्र रक्षा और हिन्दू के अस्तित्व के लिए हितकर होगा |

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1. मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि वे लोग, जो यह विश्वास करते हैं कि हम सब पापी हैं यदि हम ईसाई मत में विश्वास नहीं रखते हैं, तो ऐसे लोग अधिकांशतः पापी रहे हैं |

—- बर्ट्रेण्ड रसैल

2. तुम्हारे ईसाइमत का आधार अन्याय है | पापी के लिए पवित्र, निष्कलंक एवं निष्पाप ईश्वर के पुत्र का बलिदान किया गया |

—- लॉर्ड बायरन

3. कोई भी निरर्थक शब्द लिख सकता है, लेकिन कोई भी इस पर विश्वास नहीं कर सकता, जो कि निरर्थक है |……….. कोई विश्वास नहीं कर सकता कि ईश्वर, एक ही समय में, एक और तीन, दोनों है |

—- लियो टॉलस्टाय

4. वह दिन आयेगा कि जब जीजस की पौराणिक कथाओं की उत्पत्ति ईश्वर का पिता के रूप में एक कुमारी के गर्भ में आना, एक ऐसी गप्प समझी जाएगी जैसा कि जुपिटर देवता के मस्तिष्क में बुद्धी की देवी – मिनर्वा का आना |

—- टॉमस जैफरसन

5. आज रोमन कैथोलिक चर्च दुनिया में सबसे बड़ी बुराई है |

–— एच. जी. वैल्स

6. मैं ईसाइयत को सबसे बड़ा अभिशाप, विशाल एवं गहन विकृति और प्रतिशोध की अति महती प्रवृत्ति मानता हूँ | जिसके लिए कोई भी साधन कितना ही जहरीला, कितना ही गुप्त और कितना ही निम्न श्रेणी का क्यों न हो, बड़ा नहीं है |

–— नीत्जशे

7. ईसाइयत का यह तृत्ववादीय गणित एक अकल्पनीय अनर्गल गप्प है कि तीनों एक है और एक तीनों हैं |

—- टॉमस जैफरसन

8. बाइबिल, बर्बर लोगों के लिए, बर्बर युग में लिखी गई, एक बर्बर किताब है |

—-डीन फरार

9. वास्तव में बाइबिल लोगों को सताने वाली, गुलाम बनाने वाली और भ्रष्टकारक है |

—- कर्नल राबर्ट जी. इंगरसौल

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