Love Jihad

         

लव जिहाद

 एक दबा हुआ भयानक वास्तव

लेखिका

सौ. सुनीला सोवनी

मूल मराठी के अनुवादक

सौ. सुवर्णा कन्हाडकर

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                                                                                                   अर्पणपत्रिका

“मेरे इस अभ्यास-यात्रा में ऐसे अनेक कार्यकर्ता-बंधु-भगिनी मिलीं जिनको व्यक्तिगत स्तर पर कोई समस्या नहीं थी, फिर भी असंख्य कठिनाइयाँ जोखिम उठाते हुए इन्होने ‘लव जिहाद’ में फंसी हुई लड़कियों को छुड़ाकर उन्हें स्वाभिमान और सम्मान के साथ समाज में पुनः एक बार स्थापित करने का दायित्व स्वयंस्फूर्ति से निभाया है | इनमें से हर एक को मैं एक ही प्रश्न पूछा करती थी, “आप ये काम क्यों करते है?” और उनका उत्तर होता था, “समाजरक्षण के लिए, देशरक्षण के लिए और धर्मरक्षण के लिए …….. इस लेखन के पीछे उन्हीं कार्यकर्ताओं की प्रेरणा है |” उन्हीं को यह पुस्तक अर्पण है|”

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दो शब्द ……… 

सन 2009 में अनेक नियतकलिकाओं में मुख्य रूप से लव जिहाद के विषय में समाचार प्रसिद्ध हुआ | केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ के सामने लव जिहाद के संदर्भ में याचिका दायर की गई थी | केवल चार सालों में तीन से चार हजार की लव जिहाद की घटनाएँ घटित हुई थी, ऐसा याचिकाकर्ता ने दावा किया था | उस याचिका पर भाष्य करते समय केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति श्री शशीधरण नंबियार ने लव जिहाद के बारे में आई शिकायतों की पुलिस द्वारा पूरी तरह से पूछताछ हो एसे आदेश दिये थे | (इंडियन एक्सप्रेस / डीएनए. 18/02/2009) हिन्दू और ईसाई समाज की लड़कियों को प्रेम के जाल में फंसाकर उन्हें धोखा दिया जाता है और फिर उनका मतांतरण किया जाता है | इस अर्थ के समाचार प्रादेशिक और राष्ट्रीय नियतकलिकाओं में प्रसिद्ध रहे थे (देखें परिशिष्ट दो)| इलेक्ट्रोनिक मीडिया ने भी इस पर गौर किया | ये समाचार मन अस्वस्थ कर देते थे | इसके बाद के समय में यह विषय सिर्फ केरल कर्नाटक में ही नहीं फैल रहा था अपितु भारत सहित यूरोप, अमेरिका जैसे प्रगतिशील देशों में भी इस विषय का विस्तार बढ़ रहा है ऐसा विशेषकर सोशल नेटवर्क के द्वारा पता चलने लगा है |

मैंने लव जिहाद के बारे में अधिकाधिक आयामों के जरिये अध्ययन करने का निर्णय लिया और अभ्यास की भी विशिष्ट पद्धति अपनाई | सिर्फ वृत्तपत्र या इन्टरनेट की अपेक्षा लव जिहाद में प्रत्यक्ष शिकार बनी लड़कियां, उनके अभिभावक तथा इस विषय से संबन्धित कार्यकर्ताओं का साक्षात्कार लेना तथा उनके जीते-जागते अनुभववों का संकलन करने की बात मैंने सोची | इसलिए मैंने काफी यात्रा की | संकलन करते समय राज्य शहर और गाँवों की विविधता रखने का प्रयास किया | चयन करते समय भिन्न-भिन्न शैक्षिक, आर्थिक, सामाजिक स्तरों का प्रतिनिधित्व हो, ऐसी योजना बनाई गई | जिन अनेक स्तरों की युवतियों के साथ मैंने साक्षात्कार किया वे मुस्लिम युवकों से प्यार कर, वहाँ के अनुभव लेकर अपने घर लौटी थीं | हर एक का साक्षात्कार लेते समय उसकी पृष्ठभूमि, उसकी शिक्षा और उसके व्यक्तित्व को ध्यान में रखना पड़ता था इसी कारण से किसी विशेष ढांचे में साक्षात्कार लेना असंभव था | हर एक को अपने अनुभव बताने के लिए अलग प्रकार से प्रोत्साहन देना पड़ता था | जितनी भी युवतियों से मैं मिली वे सारी युवतियाँ चंचल थी | उनमें अच्छा खासा वाक्चातुर्य भी था, बोलते समय वे काफी सावधान रहती थीं | वे युवतियाँ 15 से 25 वर्ष के आयु वर्ग की थीं | इनमें से कुछ युवतियों का नया जीवन फिर ठीक से शुरू हो चुका था | कुछ का शुरू होने वाला है | लेकिन कुछ अभी पुलिस केस में फंसी हुई है | यह विषय काफी संवेदनशील होने के कारण इस पुस्तक में उनके नाम, गाँव और कभी-कभी घटना स्थल भी बदल कर लिखना मुझे आवश्यक लगा |

युवतियों के समान ही उनके अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ताओं से भी मैं मिली | इन सभी लोगों ने खुलकर मेरे साथ चर्चा की | इनमें से अगर किसी न भी बोलने से इंकार किया होता तो भारतीय समाज के सामने सतीत्व को कलंकित करने वाले इस दबे हुए सच को परखना और जानना मेरे लिए असंभव हो जाता | मेरे अध्ययन के लिए साक्षात्कार देकर मेरे मदद करने वाले और प्रश्न का सूक्ष्म अर्थ अपने सुलझे हुए आशय द्वारा सुलझाने वाले सभी लोगों की मैं मनःपूर्वक आभारी हूँ |

लव जिहाद काफी उलझा हुआ विषय है, कुछ डर भी पैदा करने वाला तथा अनेक स्थित्यंतरों द्वारा आगे बढ़ाने वाला है | इसी कारण साक्षात्कार के बाद भी मन में अनेक प्रश्न निर्मित होते थे | उनके उत्तर पाने के लिए अधिकाधिक संदर्भ नजर आयें इसलिए में कुछ विशेषज्ञो से मिली | मुस्लिम युवकों के साथ प्रेम प्रसंग करने वाली युवतियों की मानसिकता रखने के लिए मैंने क्षेत्र के जानकार डॉ. प्रज्ञा कीर्तने, डॉ. अंजली पेंडसे, डॉ. महेश साबड़े, डॉ. कांचन भाटिया आदि से चर्चा की | उनकी कुछ बातें इस प्रश्न के अंकलन हेतु काफी महत्वपूर्ण सिद्ध हुई, जो इस पुस्तक में अंतर्निहित हैं | मेरे लिए अपना कीमती समय निकाल कर मुझसे प्रदीर्घ चर्चा करने वाले सभी लोगों की मैं आभारी हूँ |

उज्जैन के तांत्रिक गुरुजी, तांत्रिक वैद्य इन्होने बुद्धि के आगे की दुनियाँ समझाने की कोशिश की, उनके भी साभार !

‘लव जिहाद’ में मुस्लिम युवकों के प्रेम में फंसी युवतियों को कहाँ-कहाँ धोखे दिये जाते है, कानून उसकी किस प्रकार मदद करता है, इस मामले में धर्म की क्या भूमिका होती है | यह समझने के लिए एड. प्रसन्न हुशिंग, एड.शालिनी बापट, एड. दातार ,एड. अपर्णा रामतीर्थकर, इन सभी अधिवक्ताओं के साथ की गई चर्चा मेरी मेरे जानकारी को बल देती गई | आप सभी ने आपके पास आई केसेज मुझे विस्तार से और इस विषय के लिए उपयुक्त संदर्भ भी मुझे दिये, मैं आपकी ऋणी हूँ |

साक्षात्कार और चर्चाओं द्वारा यह विषय अधिकाधिक समझने में मदद मिली, पर मेरे अध्ययन की पूर्णता के लिए इस्लाम में जिहाद की अवधारणा समझने की अतीव इच्छा हुई | उसी के अनुसार खासकर लव जिहाद की शिकार लड़कियों से की गई चर्चाओं द्वारा इस्लाम में स्त्री के स्थान के संदर्भ में जो जानकारी प्राप्त हो रही थी, इससे मुझे लगा कि इस्लाम में स्त्री के स्थान के विषय में भी अध्ययन करना आवश्यक है | आज तक अनेक भाषाओं में इस्लाम, जिहाद और इस्लाम में स्त्रीयों के स्थान के बारे में अनेक लेख प्रसिद्ध हुए हैं | फिर भी मूल ग्रंथ में क्या लिखा है इसका आधार लेते हुए मैंने अध्ययन किया | इस पुस्तक में लिखी हुई बातें मूल पुस्तक के वचनों के आधार पर रखीं गई हैं | कुरान के उद्धरण ‘दिव्य कुरान’ सय्यद अबुलआलामौदुदी के उर्दू अनुवाद के आधार पर, कुतुबुद्दीन हुसैन मनियार के टिप्पणी सहित मराठी अनुवाद, निदा-ए-कुरान पब्लिकेशन , मुंबई-9 जून 2009 में ज्यों की त्यों दी गई है | पैगंबर मुहम्मद के हदीस के संदर्भ ‘मिश्कात-उल-मसबीह’ नामक अरेबिक ग्रंथ के मौलाना फजलुल करीम के अँग्रेजी अनुवाद (इस्लामिक बुक सर्विस, नई दिल्ली ,2004 के भागों से ली गई है |

पुस्तक में जहां आवश्यक हो वहाँ संदर्भ दिये गए है | इसके अलावा ऐसी पद्धतियाँ जो अन्य समाज में प्रचलित नहीं हैं ऐसी पद्धतियों का भी स्पष्टीकरण दिया है (जैसे-महेर)| अँग्रेजी के प्रचलित शब्दों को ज्यो का त्यों रखा गया है | इस बात की ओर वाचक विशेष ध्यान दें |

सत्यान्वेषण की भूमिका से ही मैंने यह पुस्तक लिखा है | हिंदू-मुस्लिम में अंतर उत्पन्न करना या किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाना इस लेखन का कतई उद्देश्य नहीं है | इसका उद्देश्य है कि इस पुस्तक के द्वारा ‘लव जिहाद’ के बारे में समाज में प्रबोधन हो |आध्यात्मिक क्षेत्र के विशेषाधिकारी, समाजचिंतक, प्रावोधनकार, श्रद्धेय गोविंददेव गिरीजी जिन्होंने अपने बहुव्यस्त कार्यक्रम से समय निकालकर इस पुस्तक की प्रस्तावना लिखी, में उनकी शतशः आभारी हूँ | इसी प्रकार इस्लाम के गहन अभ्यासक डॉ. श्रीरंग गोडबोले, इनका उल्लेख अनिवार्य है | उन्होने सूक्ष्मता से लेखन को जाँचने का काम किया है |

इस कारण एक अर्थ से उन्होने इस पुस्तक के सहलेखक की ज़िम्मेदारी को संभाला है | मैं उनकी भी अत्यंत ऋणी हूँ | डीटीपी का काम अर्चना चांदोरकर, वसुधा म्हैसालकर, श्री गणेश पवार इनका बहुमूल्य सहकार्य मिला | उसी प्रकार उत्कर्ष मुखप्रष्ठ के लिए श्री गिरीश सहस्रबुद्धे का भी धन्यबाद !

भारतीय विचरसाधना, पुणे इस प्रकाशन संस्था ने इस पुस्तक के प्रकाशन की ज़िम्मेदारी उठाई है, इसलिए में इस संस्था के पदाधिकारियों की आभारी हूँ|

यह पुस्तक पढ़कर पाठक अंतर्मुख और अस्वस्थ होकर कार्य के लिए प्रोत्साहित होंगे ऐसी अपेक्षा है |

  • अनुवादक की टिप्पणी : इस हिन्दी अनुवाद में कुरान के उद्धरण हजरत मौलाना अशरफ अली थानवी रह. (अनुवादक) कुरान मजीद (मय तर्जुमा व अरबी मतन), इस्लामिक बुक सर्विस, नई दिल्ली 2005 से दिये गए है |

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                                                                                               प्रस्तावना

                                                                                     जागृत होंगे समाजपुरूष

 आध्यात्मिक विचारों का खजाना, विश्व बंधुत्व की भावना का औदार्य और निसर्गदत्त समृद्ध जीवन इन सभी कारणों से सम्पूर्ण विश्व के लिए आदर का केंद्र बिन्दु बना हमारा भारत देश पिछले हजारों-बरसों वर्षों से परकीय आक्रमण का लक्ष्य और भक्ष्य बना है |

लुटारू यवनों की लूट और यवनी सत्ता के विध्वंसक जुल्म और जबर्दस्ती के कारण यहाँ की पवित्र सांस्कृतिक जीवन की काफी बाते उद्ध्वस्त हो गई | व्यापार के कारण से घुसकर स्वार्थी अंग्रेजों ने चालाकी से सम्पूर्ण भारत की सत्ता हासिल की, बहुत लूट तो मचाई परंतु शिक्षा पद्धति अपने हाथ में लेकर उन्होने हम में मानसिक गुलामी भर दी तथा सेवा-भाव का बहाना बनाकर बहुत से बहुजन समाज को भ्रष्ट कर दिया | हमारे सौभाग्य से शिवाजी महाराज से नेताजी सुभास चन्द्र बॉस जैसे जूझारू वीर रत्नो की आभा के कारण ‘सिंधु हिमालय’ इस संकाय का मुक़ाबला करते रहे और हमारा प्रिय भारत फिर स्वतंत्र हो गया |

हमारे देश को मिली स्वतन्त्रता भारतमाँता के दोनों अंगो को बांटबरे के रूप में असह्य वेदना देकर ही नहीं मिला अपितु भारतरत्न डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर का दोनों समाज की दोनों देशों में अदला-बदल करने की सूचना से इंकार करने के कारण अपने साथ अब अल्पसंख्यकों के सामने सर झुकने के शर्मनाक यथार्थ को अपने साथ लाया | इसका परिणाम यह हुआ कि सीमा पर बार-बार पाकिस्तान के आक्रमण का प्रयत्न और देश में हिन्दू समाज की अलग-अलग प्रकार से छेड़-छाड़ और तोड़-मरोड़, ये बाते नित्य की हो गईं हैं | इन सबसे भीषण ऊपरी सतह पर सात्विक दिखने वाला पर सम्पूर्ण समाज को दीमक की तरह अंदर से खोखला करने वाला, जो प्रतिकार के लिए आसान नही है | ऐसे भीषण संकट ‘लव जिहाद’ के रूप में समाज के सामने खड़ा है और अगर तत्काल उपाय न किए गए तो यह भयानक रूप धरण कर सकता है |

काफिरों का कत्ल, मंदिरों का विध्वंस और संपत्ति की लूट इसके साथ ही महिलाओं का बलात्कार भी इस्लामी आक्रमण का अत्यंत निंदनीय लेकिन इतिहाससिद्ध पहलू है | लेकिन इस लूटमार में जुल्म-जबर्दस्ती क्रोर्य का भाग था | इस आधुनिक तंत्र में संवेदनशील किशोरवयीन और तरुनसुलभ सपनों की दुनियाँ की कोमल भावनाओं का दुरूपयोग कर अपने जल में फँसाकर दीवाना बनाकर सभ्य परिवार की युवतियों को इस प्रेमपाश में जकड़ना, उनके द्वारा दहशतवादी बनाने के लिए अधिक से अधिक प्रजोत्पादन करना और उस असहाय्य अबला पर हर दिशा से दबाव डालना और उसका जीना पोंछे के समान करना यही भीषण सामाजिक शोकांतिका है | दम साधे किसी भेड़िया का किसी बछड़े को लेकर भागना और सज्जनों के आँखों के सामने उसके टुकड़े टुकड़े कर उसकी जान ले लेना और हतबल सज्जनों का इस कृत्य को सिर्फ निश्वास छोड़ते हुए देखना, कुछ एसी ही यह स्थिति है |

केरल उच्च न्यायालय ने सत्य कहा है कि यह केवल युवक-युवतियों का प्रेम प्रकरण नहीं है | यह एक विदारक सत्य है कि यह हिन्दू समाज पर ही नहीं अपितु भारत राष्ट्र पर छिपा और भीषण आक्रमण है | अल्पसख्यकों की संख्या बढ़ाकर योजनाबद्ध तरीके से सारा देश निगलने का यह समाजकंटकों द्वारा रचित षड्यंत्र है | लेबनोन में भी यही घटा था | यहाँ बहुसंख्यक ईसाई थे | मुस्लिमों ने संख्या बढ़ाने का ‘एक उद्देशी’ कार्यक्रम सातत्य से शुरू रखा और अंत में वे बहुसंख्यक बन गए और लेबनोन मुस्लिम राज्य बन गया | मतांतरण का अर्थ रष्ट्रांतरण है यह वीर सावरकर ने बताया | विदारक सिद्धान्त लेबनोन के बारे में दाहक सत्य बना | रष्ट्रांतरण यही हमारे भारत में घटना चाहिए? उदारमतवादी, लोकतन्त्र, अभिव्यक्यी का स्वातंत्र्य इन बातों का इस्लामी राष्ट्र में कोई स्थान नहीं है | क्या यह बात हमारे सुशिक्षित नागरिकों को समझ नहीं आती ? इस दृष्टि से इस नए आह्वान की ओर अत्यंतता जागृतता और गंभीरता से देखना जरूरी है | मेरे देश में और मेरे समाज में ऐसा नही होना चाहिए, मैं ऐसा होने नही दूंगा | ऐसा निर्धार करने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं का इस दिशा में सक्रिय होना आवश्यक है | अभिभावकों की दक्षता, परिवार में सबकी अपनत्व से पूछताछ, बालमन पर स्वधर्म के संस्कार, बचपन से थोड़ी सी पर नियमत उपासना और भुक्तभोगी भगनियों का हमारे समाज में पुनः स्वागत, पुनर्वसन इसके लिए वातावरण की निर्मिती करने की नितांत आवश्यकता है | सब धर्माचार्य और समाज प्रावोधकों के द्वारा समाज को बार-बार मार्गदर्शन मिलना जरूरी है | सब जगह के विविध महिला गुटों और युवक युवतियो को अपने परिसर में सावधानता रखकर समय-समय पर योग्य उपाय योजना करना चाहिए | यही उनका आद्य कर्तव्य है |

इस पुस्तक की लेखिका अदरणीय सुश्री सुनीलताई सोवनी इन्होंने इस विषय का अध्ययन कर समाज के सामने रखने का अभिनंदनीय कार्य किया है | खासकर इसलिए उन्होने बहुत दूर तक यात्राएं की और जानलेवा अत्याचारों से बचीं युवतियों का वास्तव बहुत लक्षभेधि है | इस जागरूक, संयोचित लेखन के लिए उनके साभार |

समाज के हर घर में ध्यान से पढ़ा जाए एसा यह पुस्तक है ……… इति –

धर्मश्री, पुणे                                                                                                                                     श्री ज्ञानेश्वर पदाश्रित

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी                                                                                                                       (स्वामी गोविंददेवगिरि)

दि. 9-8-2012

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                                                                                             अनुक्रमणिका  

 

  1.         शोधयात्रा का निमित्त
  2.         अभागियों से साक्षात्कार
  3.         लव जिहादियों की पद्धति
  4.         अभिभावकों व कार्यकर्ताओं के साथ संवाद
  5.         ‘मानस’ तज्ञों का विचार  
  6.         कानूनी पहल
  7.         जिहाद नहीं तो और क्या ?

उपोद्घात

परिशिष्ट 1 – इस्लाम में स्त्री का स्थान

परिशिष्ट 2 – ‘केरक कौमुदी’ फरवरी 2009 में छपा समाचार

ग्रंथसूची

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1.     शोधयात्रा का निमित्त

 ‘आय एम प्रेग्नेंट’ ज्योति बार-बार यही मैसेज कर रही थी | उसके इसी संदेशों के कारण वकालत की परम्पराओं वाले उच्च्विद्याविभूषित और सम्पन्न परिवार की हवाइयाँ उड गईं | स्वाभाविक ही था ……लड़की है कहाँ? शादी भी की है या नहीं ? रिशतेदारों को क्या बताएं? आस पड़ोस वाले क्या कहेंगे? पुलिस में खबर करें या नसीब पर छोड़ दें? और सबसे महत्वपूर्ण बात–परिवार की मान-मर्यादा कैसे संभालें | असगावकर परिवार अनगिनत प्रश्नों से जूझ रहा था | छोटी बहन ने जब अन्य प्रांतीय समाज के युवक से शादी की तब अभी तक शादी से मना करने वाली ज्योति ने हिम्मत दिखाई | घरवालों को आशंका ही थी, अचानक ज्योति भी सलीम से शादी करने की जिद पर अड़ गई |

छोटी की शादी का घरवालों ने विरोध ही किया था | परंतु बच्चों की जिद के आगे झुकते हुए घरवालों ने उनकी शादी करवा दी, ज्योति यह सब देख रही थी | छोटी की तरह आखिरकार मेरे जिद के आगे झुकते हुए मेरे शादी कारवा देंगे, ऐसा ज्योति का विश्वास था | इसी कारण ज्योति अचानक जिद पर अड़ गई थी |

बड़ी और छोटी की कहानी एक दूसरे से काफी अलग थी | छोटी के मामले में भिन्न जाति के अलावा दोनों ओर से कोई भी एसा मुद्दा नहीं था जिसके आधार पर इस शादी से इंकार किया जा सके |

बड़ी के मामले में सबकुछ समझ से परे था | लड़का न ही जाति का था न धर्म का | ज्योति का परिवार उच्चशिक्षित और लड़के के परिवार का कोई आता पता नहीं था | दूर राजस्थान में कही अपने परिवार के होने की बात वह करता था | लड़की सुंदर और लड़का जैसे-तैसा, लड़की लाड़ प्यार से पली बढ़ी थी, उसके मोबाइल पेट्रोल का खर्चा उठाना भी सलीम की कमाई के हिसाब से भारी पड़ता | जब ज्योति MBA कर रही थी तब सलीम गरेज में काम करता था | वही उनकी पहिचान हुई और प्यार हुआ | हर मामले में एक दूसरे से भिन्न प्रकृति के थे ये दोनों, फिर भी उन्हें जोड़ने वाला धागा कोन सा हो सकता था ? लाड़ली ने उसमे ऐसा क्या देखा होगा की उसने न ही अपने भविष्य के वारे में सोचा और न ही अपने माता-पिता की इज्जत के बारे में सोचा, सलीम के घरवालों के बारे में छानबीन करने की जरूरत उसने महसूस नहीं की, बिना सोचे समझे, परिवार का विरोध कम होने की राह, बिना देखे पता नही क्यों ज्योति को अचानक घर छोड़ना पड़ा …? बिना शादी के उसके साथ रहना पड़ा …?

बच्ची एसएमएस कर अपनी हालत को बता रही है पर वह कहाँ है इसका अता पता  नहीं दे रही | मोबाइल कोई रिस्पोंस नहीं दे रहा था | उनके दोस्तों के जरिये भी उनकी मालूमात नहीं हो रही | आगे क्या होगा ये सोच सोच कर पूरा घर पागल हो गया था |

मेरे सहेली के रिशतेदारों के मामले में घटित इस घटना को सुनकर में भी चकरा गई थी | पहला प्रश्न जो मुझे साता रहा था कि, ज्योति में इतनी हिम्मत कहाँ से आई ? घरवालों का प्यार भी उसे रोक नहीं पाया? इस बच्ची का आगे क्या होगा? बच्ची के घरवालों को यह बात पता होगी? वह स्वेच्छा से गई होगी या उसे भगाया होगा? ‘भगाया होगा’ इन शब्दों ने मुझे चोंका दिया, ये शब्द पीछा नही छोड़ रहे थे |

शायद कुछ समय बाद में यह सारा घटनाक्रम भूल भी जाती परंतु संयोग से मैंने तीन शादियों के निमंत्रण पत्र देखे | तीनों शादियो के निमंत्रक मुस्लिम थे | कार्यस्थल था पुणे का इमामवाड़ा और तीनों लड़कियां हिन्दू थीं | उन निमंत्रणों में एक 17 मार्च 2008 , दूसरा 15 दिसंबर 2011, तीसरा 10 जनवरी 2012 को था | मस्तिष्क में विचारों का आवर्तन शुरू हुआ साथ ही आँखों ने सजगता से देखना शुरू किया, पैरों ने भी थोड़ी गति ले ली और फिर शुरू हो गया एक प्रवास ……| हो गई एक यात्रा …….

उज्जैन, इंदौर, देवास, सूरत, दिल्ली, जम्मू, औरंगाबाद, नागपुर, गुहाटी ………

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2.     अभागियों से साक्षात्कार       

मेरी यात्रा प्रारम्भ हो गई | मुस्लिम युवकों के प्रेम जाल में फंसी युवतियों से में संवाद कर रही थी | इस संबंध में अन्य आयामों के जरिये भी जानकारी प्राप्त कर रही थी, उसी समय 1 जून 2012 के इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर ने मेरा ध्यान आकृष्ट किया “असम की महिला विधायक का फेसबुक पर अपने प्रेमी के साथ बांग्लादेश पलायन तथा वहाँ जाकर धर्म परिवर्तन की बात प्रकाश में आई |” रूमीनाथ ने फेसबुक के जरिये अपने संबंध स्थापित किए, बारखोला विधानसभा मतदार संघ की प्रतिनिधि रूमीनाथ को दो साल की एक बच्ची भी है | पर रूमीनाथ ने जैकि झाकिर के साथ अपने संबंध बनाए और वह बांग्लादेश भाग गई | पहले-पहले रूमीनाथ की ओर से इस समाचार का इंकार किया गया पर एक महीने में उसने अपने निकाह का वीडियो प्रसरमाध्यमों के साथ भेज दिया | इस निकाह की विशेष बात कि इस निकाह की तैयारियों में असम के मंत्री शामिल सिद्दीकी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी | रूमी के पहले पति राकेश सिंह ने सिद्दीकी के विरोध में अपनी पत्नी के अपहरण की शिकायत असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई से की | बाद में पुलिस में भी यह शिकायत दर्ज की गई | लेकिन रूमी झाकिर को ही अपना कानूनी पति बताती है | वह जल्द ही तलाक की अर्जी दाखिल करने वाली है दूसरी शादी से पहले उसने इस्लाम को अपनाया इसी कारण हिन्दू विवाह कानून उसपे लागू नहीं होता है | यह बात भी उसने स्पष्ट की | अपनी लड़की को पाने के लिए भी वह अर्जी देने वाली है, यह भी उसने स्पष्ट किया |

असम राज्य की विधायक जिसने राज्य संविधान की शपथ ली थी, जो नागरिकों की भलाई के लिए विधानसभा पहुंची थी, एसी प्रतिनिधि अपने मंत्री की सहायता से न सिर्फ अपना धर्म बदलती है अपितु अपना देश भी बदलती है | यह सब आश्चर्य कारक है जिसे सुनकर खून खौल जाता है तथा मनुष्य बौखला जाता है | इस महिला में आए इस परिवर्तन के रहस्य का संबंध मैंने जिन युवतियों के साक्षात्कार लिए थे उससे जुड़ा हुआ था | इस घटना के ब्योरे की अपेक्षा यह घटना जिस प्रकार घटित हुई है इसमें मुझे काफी समानता आई | मुस्लिम युवकों की इस कार्यपद्धति से जब यह विवाहित विधायक स्त्री अपने आप को बचा नहीं पाई तब सामान्य युवतियों की बात करना तो कठिन है |

  • अभागियों से संवाद

 

रेखा निम्न माध्यम वर्ग की युवती, जो अपने माँ-बाप और भाई के साथ एक बड़े शहर में रहती है | बरहवीं कक्षा में ही वह मुस्लिम युवक से प्यार करने लगी |

प्रश्न  – आपका बेटा बड़ा प्यारा है इसका नाम क्या है?

उत्तर – विजय पर यह मेरा पहला बेटा नहीं है

प्रश्न  – पहला बेटा कहाँ है ?

उत्तर – उसे गोद दे दिया

प्रश्न  – क्यों ?

उत्तर – अगर उसे गोद नहीं देती तो ये मुझसे विवाह नहीं करते |

प्रश्न  – आपका दूसरा विवाह है ?     

उत्तर – और क्या? पहला विवाह, विवाह ही नहीं था, में सल्लू के साथ भाग गई थी | हम साथ रहते थे | में माँ बनने वाली थी, सल्लू बहुत खुश हुआ, खुशी तो मुझे भी हुई पर मुझे चिंता सताने लगी क्योकि मैंने उसके घरवालों को देखा तक नहीं था | औरों की तरह हमारा विवाह भी नहीं हुआ था | वैसे तो में वहाँ काफी खुश थी | मेरी पसंदीदा चीजें मुझे मिलते थीं | महंगे महंगे कपड़े दिये जाते थे, सेंट, लिपिस्टिक जो मांगू वह मिल जाता था | सल्लू मुझे बड़े लाढ प्यार से रखता था | पर जब हम माँ-बाप बन रहे हैं तो हमें शादी कर लेनी चाहिए एसी मेरे जिद वह टालने लगा | अपने घर भी वह ले जाने के लिए वह तैयार नही था |

प्रश्न  – क्या आप सल्लू के साथ अपनी मर्जी से गई थीं ? तब आपकी आयु क्या थी ?

उत्तर – उस समय में 17 साल की थी | बरहवीं कक्षा में पढ़ती थी | मुझे सल्लू अच्छा लगने लगा | बरहवीं में मैं जहां ट्यूशन लेने जाती थी उसी इमारत के पास हमारी पहली मुलाक़ात हुई | सल्लू ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं था | फिर भी ट्यूशन की इमारत के पास नेट कैफे में काम करता था | उसने मुझे एक बैग भेंट दी | हमारी दोस्ती बढ़ने लगी, जैसे हमारी दोस्ती बढ़ने लगी वैसे-वैसे वो मुझे अनेक भेंटवस्तुएँ देता रहा | घरवालों की आँख बचाकर या सहेलियों ने गिफ्ट दिया है | एसा झूठ बताकर मैं उन चीजों का इस्तेमाल किया करती थी | बहुत बार हम घूमने जाते थे | इसी दौरान उसने मुझे एक मोबाइल भेंट में दिया | मैं खुशी-खुशी घर आई, और सहेली ने दिया है ऐसा बहाना बनाया पर किसी ने मेरा विश्वास नही किया | मेरे भाई ने मुझ पर नजर रखना प्रारम्भ किया | एक दिन मेरा भांडा फूट गया | मेरे घरवालों को सल्लू बिलकुल पसंद नहीं था | जहां उन्हें हमारी दोस्ती तक पसंद नहीं थी | वहाँ मेरे शादी कैसे कबूल होती | मेरा मोबाइल छीनने की कोशिश की गई | मेरे बाहर जाने पर पाबंदी लगा दी गई | इसी दौरान सल्लू बार-बार भाग जाने की बात करने लगा | उसका एक मुस्लिम दोस्त और मेरी सहेली में संबंध निर्माण हो गए | उसी कि मदद से मैं सल्लू से संपर्क बनाए हुए थी | उस कल में मैं सल्लू से बहुत प्रभावित थी | उसके साथ कभी मेरी मुलाक़ात खत्म ना हो एसा मुझे लगता था और अब तो घर से बाहर जाना भी मुश्किल था इसलिए हमने भाग जाने का निर्णय लिया |

प्रश्न – तुम्हारा यह निर्णय सिर्फ तुम दोनों तक था या किसी और को भी पता था ? या किसी ने तुम्हारी मदद की?

उत्तर- सल्लू के कुछ दोस्त शुरू से हमारे साथ थे | हमें एकांत मिले इसकी उन्होने कई बार सहायता की, मेरे घर से भागने की योजना भी उन्होने ही तैयार की | मुझे एक पत्र मिला और उस दिन शाम को मैंने घर छोड़ दिया | दूर एक लॉज में रहने चले गए |

प्रश्न – आपको भागते समय क्या उसने आपसे विवाह का वादा किया था | बिना विवाह किए तुम उसके साथ कैसे रहने लगी ?

उत्तर – वो हमेशा कहता था पहले हम भाग जाते हैं फिर विवाह कर लेंगे | वो मुझे बिना विवाह के रखेगा मैंने सोचा भी नहीं था | आज तक उसने मुझे बहुत प्यार दिया था इसलिए वह जो भी कहता था वो सारी बातें मैं मान लेती थी | अगर मैं घर से भाग गई तभी चैन से जी पाऊँगी एसा मैं मनाने लगी | यह मेरा विश्वास था |

प्रश्न – घर में तुम सुखी नहीं थीं ?

उत्तर- सल्लू जिस प्रकार प्यार करता था वैसे घर में कोई इस तरह प्यार नहीं करता था | मेरे माँ-बाप हमेशा अपनी दुनिया में मस्त रहते थे और भाई ये मत कर, वह मत कर, यहाँ मत जा, वहाँ मत जा, एसा कहकर बस दादागिरि करता रहता था | सल्लू मुझे बहुत सी भेंट वस्तुएँ देता था जो घरवालों से मिलना असंभव था |

प्रश्न – तुम उसके साथ रहने लगी, पर बिना विवाह के अपने-आप को कैसे सौंप दिया ?

उत्तर- मुझे लगता है यह सब अपने आप हो गया | वैसे तो बिना विवाह एसा कुछ करने के विरोध में थी | पर यह सब कब हुआ ये मुझे आज भी याद नही आ रहा है |

प्रश्न – जब तुम्हें पता चला की तुम गर्भवती हो तब भी तुम्हें घरवालों को बताने का दिल नही हुआ ?

उत्तर- मैं माँ बनाने वाली हूँ यह जानकर मुझे खुशी भी हुई और चिंता भी होने लगी | माँ को फोन करने का बड़ा मन होता था पर उसने मेरा मोबाइल पहले ही ले लिया था |

प्रश्न – तुमने बाहर जाकर फोन क्यों नही किया ?

उत्तर- जब से हम एक साथ रहने लगे तब से सल्लू ने मेरा अकेले घूमना फिरना बंद कर दिया था | उसने मुझे धमकाया कि मैं अगर जाऊ तो सिर्फ उसी के साथ | शुरुआत में मैंने इस ओर ज्यादा ध्यान नहीं दिया |

प्रश्न – फिर घर संपर्क कैसे किया ?

उत्तर- मैंने घर संपर्क बहुत देर बाद किया | परंतु इस दौरान कुछ अलग तरह की घटनाएँ होने लगी | जब मैं विवाह के लिए जिद करने लगी और उसके घर जाने की जिद करने लगी तब उसके दो चार दोस्त और उसकी मौसी, हम जहां रहते थे वहाँ मुझसे मिलने आए | दोस्तों को मैं पहचानती थी | मौसी से मेरी कोई जान पहचान नहीं थी उसने बुरखा पहना था | उसने मुझे बुरखा पहनने के लिए हिजाब बांधना सिखाया | उसने ज़ोर देकर कहा कि अब मुझे इस्लामी रिवाजों का पालन करना ही होगा | उसी ने मुझे नमाज पढ़ना और कुरान पढ़ना सिखाया | उसने मुझे धमकाया कि जब तक मैं इस्लामी रिवाजों का पालन नहीं करती जब तक हमारा विवाह नहीं हो सकता |

प्रश्न – इन बातों के लिए तुम तैयार कैसे हो गई ?                                                                                                                          

उत्तर- और मैं क्या कर सकती थी ? सल्लू ने मुझे खुश रखा था | मेरे पेट में उसका बच्चा पल रहा था | मैं अपने माँ-बाप के पास वापिस नहीं जा सकूँगी यह तो स्पष्ट था | और अगर उनके पास चली भी जाती तो यह सवाल था कि क्या वो मुझे अपनाते ? आखिरकार मैंने इस्लामी रिवाजों का पालन करना शुरू कर दिया |

प्रश्न – तुमने धर्म परिवर्तन किया था?

उत्तर- वह मुझे कभी समझ नहीं आया | पर मुस्लिम औरतें जो कहती थी वो सब अब मैं करती थी | उसके बाद मैं बार-बार उसके माँ-बाप के पास जाने और विवाह करने की जिद करने लगी | अब मुझे 6-7 महीने हो चुके थे | अब मुझे अपने भविष्य की चिंता सताने लगी थी |

प्रश्न – रिश्तेदार या दोस्त किसी ने भी तुम्हें ढूंढने की कोशिश नही की ?

उत्तर- शायद की थी | पर हम मिल नहीं रहे थे | सल्लू को भी इस बात का अंदाजा था , एक दिन वह गुस्से में मेरे पास आया मुझे ज़ोर सी थप्पर लगाई और मुझे सामान बांधने के लिए कहा | उसी रात हम उसके दो रिशतेदारों के साथ एक गाँव के लिए निकले, सल्लू ने कहा कि वे दोनों युवक उसके ममेरे भाई हैं | लगभग 2-3 घंटों के बाद हम उस गाँव में पहुंचे पर वह गाँव कौन सा था वह मुझे पता नहीं चला |

प्रश्न – आगे क्या हुआ ?

उत्तर- काफी रात में हम एक मुस्लिम घर में पहुंचे | सल्लू बताता था कि उसके माँ-बाप किसी दूसरे गाँव में रहते हैं | और यह घर उसके चाचा का है | इतनी रात गए भी मैं उस घर में प्रवेश करने में डर रही थी | कुछ अलग सा महसूस हो रहा था | उस घर में बहुत लोग रहते थे | सल्लू का व्यवहार भी बदला हुआ था | रात भर मैं करवट बदल रही थी | सुबह-सुबह मेरी आँख लग गई | सुबह जब मेरी नींद खुली तो मैंने देखा कि कुछ स्त्री-पुरूष मुझे दरवाजे की ओट से घूर रहे थे | एक भयानक अवस्था में मैं अपने दिन बिता रही थी, कुछ भी कर घर लौट जाऊँ ऐसा मुझे लगाने लगा |

साधारणतः तीसरे दिन मुझे अहसास हुआ कि सल्लू का पहला विवाह हो चुका था और उसे दो लड़कियां भी थीं, ऐसा मुझे पता चला | मुझ जैसी लड़कियों को अपने जाल में फंसाना यही सल्लू का काम था, यह मुझे उसकी बीबी से पता चला | मैंने सल्लू से अकेले में मिलने का प्रयत्न किया पर यह संभव नहीं था | जब मेरा विचार वापस लौट जाने का हो रहा था तब मेरी परिस्थिति अनुकूल नहीं थी | कुछ दिनो बाद मैंने उस घर की युवती से अपनी दोस्ती बढाई | मैं यकीन के साथ तो नहीं कह सकती पर वह भी शायद मेरी तरह हिन्दू थी | उसकी मदद से मैंने अपने भाई से मोबाइल पे संपर्क किया और मैं कहाँ हूँ इसका पता अंदाजे से दिया |

प्रश्न – फिर क्या तुम्हारे भाई ने तुम्हें छुदवाया ? क्या तुमने सल्लू के विरोध में केस दायर किया ?      

उत्तर- मेरे भाई ने मेरा भरोसा किया यही यही मेरे लिए खुशी की बात है | उसने घरवालों को ज्यादा न बताते हुए पुलिस को खबर की तथा मुझे उस नरक से छुड़वाया |

प्रश्न – पुलिस केस का आगे क्या हुआ ?

उत्तर- पुलिस ने मेरी जुबानी ली, पर मैं उसके साथ अपनी मर्जी से गई थी ना, सल्लू को कुछ दिनों तक जेल में रहना पड़ा | केस का क्या हुआ ये तो मैं नहीं बता सकती पर मैं छूट गई | जब मैं मेरे घर आई तब मेरे दिन पूरे हो गए थे | मेरी सम्मति से मेरे बच्चे को गोद दे दिया गया |

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 पुणे के एक महिला वकील एक आधुनिक युवती को लेकर मुझसे मिलने आई, वे फोन करके आई थी, इसी कारण ये लव जिहाद का केस है मुझे पहले ही पता था | उस लड़की का वर्तमान में नाम रूबिया है और पहले का रेवती | उससे की गई बातचीत …..

प्रश्न – आप कहाँ तक पढ़ी है? जब आप इस प्रेम में फंसीं तब आपकी उम्र क्या थी ? आप दोनों कहाँ मिले थे ?    

उत्तर- मैं पुणे के कोथरूड् प्रभाग की रहने वाली हूँ | मैंने BE और M. Tech किया है | तभी से मैं एक मल्टीनॅशनल कंपनी मैं काम करती हूँ | जिस कंपनी में मैं काम करती थी वही मेरी मुलाक़ात जावेद से हुई | उस समय मेरी उम्र कोई 24-25 वर्ष थी |

प्रश्न – जहां आप काम करती थी वहाँ तो बहुत सारे युवक-युवतियाँ काम करते है फिर आपको ये ही क्यों अच्छा लगने लगा ?

उत्तर- सब लोगों में कौन, कब-कैसे क्लिक हो जाय कहा नहीं जा सकता | केफेटेरिया में घूमते-घूमते हमारी जान पहिचान बढ़ने लगी | मेरा जॉब प्रोफ़ाइल कुछ एसा है कभी-कभी मुझे देर तक रुकना पड़ता है | जावेद मुझसे सीनियर था | बहुत ही स्मार्ट, होशियार, मेरा कम पूरा होने के लिए मुझे मदद भी करता था | इसी से हमारी दोस्ती बढ़ने लगी | कंपनी की ओर से कोब इत्यादि की सुविधा उपलब्ध थी | फिर भी मुझे उसके साथ घर आना अच्छा लगने लगा | शनिवार-रविवार और छुट्टियों के दिनों में भी हम काम का बहाना बनाकर मिलने लगे | मुझे लगा था कि हमें प्यार हो गया है, हमने एक दूसरे से पूछा और विवाह का फैसला ले लिया |

प्रश्न – घरवालों की क्या प्रतिकृया थी ?

उत्तर- वैसे देखा जाय तो दोनों घरों के लोग पढे लिखे हैं | मेरे घरवाले ज्यादा पढे-लिखे हैं | दोनों घरों में सुधारों का वातावरण है एसा हमारा मानना था | इसी कारण इन्हें हमारा विवाह मान्य होगा एसा मेरा मानना था | परंतु दोनों घरों से हमारे विवाह को लेकर कडा विरोध हुआ | मेरे घरवालों की भूमिका थी कि मैं किसी से भी विवाह कर सकती हूँ मुस्लिम को छोडकर | लेकिन जावेद के घर से इतना विरोध नहीं था | मतांतरण कर अगर मैं विवाह करती तो वो मुझे नाखुशी से अपनाने के लिए तैयार थे|

प्रश्न – फिर अपने मतांतरण किया ?

उत्तर- बिलकुल नहीं | मैंने इस्लाम में स्त्रीयों की स्थिति पर कुछ पुस्तकें पढ़ी थीं | नोट विदाउट माय डॉटर, आवरण जैसी पुस्तकें मैंने अपने घरवालों के कहने पर पढ़ीं, उस पर काफी सोच विचार किया | ( ये दोनों पुस्तकें अन्य धर्मीय नायकाओं ने मुस्लिम युवकों से निकाह के बाद उनकी स्वतन्त्रता किस प्रकार छीन ली गई थी, इसका वर्णन करने वाली है | विदाउट माय डॉटर- बेट्टी महमूदी, मेहता पब्लिशिंग, पुने, आवरण- भैरप्पा, मेहता पब्लिशिंग, पुणे)

प्रश्न – फिर भी आपने धर्म बदला ? 

उत्तर- मेरी परिस्थिति आवरण की नायिका के समान थी | मैं इस्लाम और उसमें प्रचलित प्रथाओं के बारे में जावेद से बहुत सारे सवाल पूछा करती थी | हम घंटों इसके बारे में चर्चा करते थे | आश्चर्य की बात थी कि वो मेरी हर बात से सहमत होता था | हमारी इन चर्चाओं के दौरान जावेद उसके दीन में प्रचलित अनेक गलत परम्पराओं का कडा विरोध किया करता था | चार शादियों की अनुमति, जुबानी तलाक, बुरखा जैसी परम्पराएँ उसे भी मंजूर नहीं थीं |

प्रश्न – क्या आप उसके विचारों से प्रभावित हो गईं?   

उत्तर- हाँ, अवश्य | मुझे यह आधुनिक विचारों का मुस्लिम युवक लगता था | उसकी बुद्धिमानी, मेरे साथ उसका वर्ताव धर्म के बारे में उसके विचार इन सब बातों के कारण मैं उसका विश्वास करने लगी थी | घरवालों का विरोध करते हुए अगर मैंने विवाह किया तो कष्टप्रद अवश्य न होगा, एसा मेरा विस्वास था |

प्रश्न – घरवालों से वो आपको ज्यादा अपना लगा इसलिए अपने घरवालों का विरोध होते हुए भी विवाह कर लिया ?

उत्तर- मेरे घरवालों के विरोध का कारण मुझे पता चल गया था | आज अच्छा वार्ताव करने वाला जावेद आगे चलकर मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत मेरी सौतन भी ला सकता था, मुझसे जबर्दस्ती इस्लाम की परम्पराओं का स्वागत करवाता, यही डर उन्हें सता रहा था | पर उस समय मेरे मन में कोई संदेह नहीं था | फिर अपना धर्म परिवर्तन कर विवाह करने का खतरा लेना मुझे मंजूर नहीं था | इसी कारण मैंने जावेद से जिद्द की कि हम स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह करेंगे | दुनियाँ में प्रेम ही सबसे श्रेष्ठ भावना है, यह मेरा विचार उसे भी मंजूर था | शुरूआत में उसे इस तरह का विवाह मंजूर नहीं था | मुझे धर्म परिवर्तन करना चाहिए एसा उसका मानना था | वह कहता था तुम मेरा भरोसा रखो तुम्हें तकलीफ नहीं होगी | लेकिन मैंने मेरी जिद कायम रखी और मेरे प्यार के खातिर उसके घरवालों की मनाही के बावजूद हमने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह कर लिया |

प्रश्न – इस निर्णय का तो आपके घरवालों ने विरोध किया था फिर आपकी मदद किसने की ?   

उत्तर- जावेद के कुछ दोस्तों ने और चुनिन्दा रिशतेदारों ने हमारी मदद की | वैसे तो हम किराए का मकान ले सकते थे लेकिन उसके चाचा ने खुद ही उनका फ्लैट हमें दिया, अपनी कार हमें दे दी | वैसे ही दूसरी कंपनियों में काम करने वाले जावेद के मुस्लिम दोस्तों और मेरी सहेलियों ने हमें सहारा दिया | पैसों का तो कोई सवाल ही नहीं था | पर हमारा विवाह जनरल कैटेगरी का नहीं था इसलिए सबकी मदद हमारे लिए काफी मायने रखती थी |

प्रश्न – घर से आप कैसे भागीं ?

उत्तर- विवाह करने जा रही हूँ, ऐसा कैसे बताऊँ? इसके विपरीत जावेद और मैंने कॉमन दोस्त के कहने के अनुसार मेरा जावेद के साथ संपर्क बंद है ऐसा मैंने दिखावा किया, जब मेरी हरकतों की तरफ घरवालों ने ध्यान देना बंद किया | तब मैंने भागने का प्लान बनाया | जब मैंने घर छोड़ा तब हमारा विवाह नहीं हुआ था | पर और कोई पर्याय न होने के कारण विवाह से पहले ही मैं उस फ्लैट में रहने लगी | ऐसा करना अयोग्य लग रहा था लेकिन घर छोड़ने से पहले योग्य पद्धति से कानून का आधार हमने लिया, इसी कारण रजिस्टर मैरिज़ आदि आसानी से पार हो गया |

प्रश्न – अपने तो आपका नाम रूबिया बताया है? यह कैसे हुआ धर्म परिवर्तन के लिए आप कैसे तैयार हो गईं ?

उत्तर- विवाह के कुछ समय बाद मुझे पता चला कि जब तक मैं धर्म परिवर्तन नहीं करूंगी जब तक इस्लाम में हमारे विवाह को ग्राह्य नहीं माना जाएगा | मुस्लिम मेरे बारे में क्या सोचते हैं इसमें मुझे कोई दिलचस्पी नहीं थी, मुझे चिंता थी कि जावेद क्या सोचता है इस बारे में | ऐसा कभी नहीं हुआ कि मुझे और जावेद को उसके घरवालों ने पूर्ण रूप से अपनाया हो | अब उसके रिश्तेदार मुझपर धर्म परिवर्तन को लेकर दबाब डालने लगे |

प्रश्न – अपने इस मामले में अपने घरवालों से बातचीत क्यो नहीं की? क्या आपको पुलिस की मदद लेने की नहीं सूझी ?

उत्तर- मैयके वालों ने मेरे लिए घर के दरवाजे बंद ही कर दिये थे और पुलिस के पास जाने का धैर्य मुझमें नहीं था | समय के साथ ज़ोर कम पड जाए एसा मैंने सोचा |

प्रश्न – जैसे-जैसे हमारा विवाह पुराना होने लगा वैसे-वैसे उसकी धर्म परिवर्तन की जिद शुरू हो गई | इसी काल में हम बच्चे कि दृष्टि से सोचने लगे थे | लेकिन जावेद ने यह स्पष्ट कर दिया कि मैं धर्म परिवर्तन करूँ तभी उसे पिता बनाना स्वीकार है | मेरे सामने बड़ा पेंच था | भले ही स्पेशल मैरेज एक्ट के अंतर्गत हमारा विवाह हुआ था पर मेरी सहेलियों के लिए मैं मुस्लिम ही बन चुकी थी और धर्म परिवर्तन के बिना मेरा पति मुझे माँ बनाने नहीं दे रहा था | मुस्लिम समाज भी हमारे विवाह को मान्यता नहीं दे रहा था | मुझे लग रहा था कि मानों मेरा जीवन मँझधार में फंस गया है |

प्रश्न – जावेद हिन्दू बने ऐसी कोशिश अपने क्यों नहीं की ? या अपने कभी ऐसे सोचा नहीं ?  

उत्तर- हिन्दू समाज की तरह मुस्लिम समाज उदारमतवादी नहीं है, यह मैंने अनुभव से जाना | जावेद को अपना वंश मुस्लिम ही चाहिए था | किसी भी हालत में जावेद हिन्दू नहीं बन सकता था | मैंने एक बार यह बात उठाई थी | लेकिन मैं जल्द ही समझ गई कि वह आसानी से मुझे छोडकर उसके समाज के किसी भी लड़की के साथ धूम-धाम से विवाह कर सकता है | इसी कारण जावेद का हिन्दू होना असंभव था |

प्रश्न – इसका अर्थ है कि आप पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जा रहा था, मायके वालों की नहीं लेकिन पहिचान वालों की, वकील की मदद लेने का विचार आपके मन में नहीं आया ?

उत्तर- ऐसा करने की मेरी बड़ी इच्छा थी पर धैर्य नहीं हुआ | वकील की मदद लेने का अर्थ तलाक का पर्याय चुनने जैसा था | यह काम बहुत कठिन होगा यह तो साफ था ही | भले ही मैंने इस परिस्थिति से छुटकारा प्राप्त किया लेकिन मेरे भविष्य का प्रश्न अभी बिकट ही होता जा रहा था | हाँ- ना करते करते जावेद के पास तो सुरक्षित रह पाऊँगी ऐसा सोचकर मैंने धर्म परिवर्तन का निर्णय लिया |

प्रश्न – आपके इस निर्णय के बाद जावेद और उसके घरवालों की क्या प्रतिकृया थी ?

उत्तर- सभी खुश थे | उनकी दृष्टि से यह प्रयोग था जो सफल हो गया | मैंने नमाज पढ़ना सीखा और हिजाब बांधना सीख गई |

प्रश्न – ‘एक प्रयोग’ ऐसा क्यों कहा आपने ?

उत्तर- प्रयोग ही तो था ……जब मैं अपने प्यार के बारे में शुरुआत से सोचती हूँ तब मुझे अहसास होता है कि हमारा प्यार स्वाभाविक नहीं था अपितु योजनाबद्ध प्रयत्नो का परिणाम था | मैंने धर्म परिवर्तन तो किया पर आज तक माँ नहीं बन पाई हूँ मुझे घरवालों की कानाफूसी सुनाई देने लगी है कि अच्छा हुआ इसने अपना धर्म बदल लिया, अगर जावेद को इससे औलाद नहीं हुई तो ……..

प्रश्न – अब तुम वकील के साथ आई हो……..   

उत्तर- देर से सूझा हुआ …….

प्रश्न – जबरदस्ती धर्म परिवर्तन का केस आप आज भी दाखिल कर सकती हैं ……..

उत्तर- नहीं, मैं अब चलती हूँ | मेरी इच्छा है कि मेरा नाम किसी को भी पता ना चले और मैं यहाँ आई थी कृपया इसके बारे में भी किसी को कुछ न कहें |

एसे अन्य डरावने, दिमाग चकराने वाले, नींद उड़ाने वाले साक्षात्कार में ले रही थी | हर साक्षात्कार मेरे सामने इस सत्य की भयावहता ला रहा था | हर साक्षात्कार वैशिष्ट्यपूर्ण था और उसमें से अनेक स्वतंत्र और अलग-अलग प्रकार के तथ्य सामने आ रहे थे | ऐसे ही कुछ प्रतिनिधिक साक्षात्कारों का सारांश यहाँ दिया जा रहा है | हर एक विशेषताओं की लगभग 5-7 उदाहरण मुझे मिले |

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1.

“दीदी न जाने उस समय मुझ पर कौन सा भूत सवार था | मैं उसके साथ बांग्लादेश तक गई | उसके परिवार के साथ हम डेढ़ साल तक रहे | मेरा मतांतरण किया गया था | रोज मैं नमाज पढ़ना सीख गई थी | उसके साथ भागने के वक्त से ही मैं बुर्का पहनने लगी थी | मेरा शौहर तो अच्छा था, लेकिन उसके दोस्त परिवार वाले अच्छे नहीं थे | मुझे बुरी नजर से देखते थे | मेरे शौहर की दूसरे विवाह की बात चल रही थी….. ” पुरानी दिल्ली में रहने वाली श्वेता अपबीती बता रही थी | श्वेता जब 15-16 साल की थी तब उसके बड़े भाई का विवाह हो गया, भौजाई को श्वेता बिलकुल पसंद नहीं थी | दोनों बार-बार झगड़े होते थे | शिक्षा न लेने वाली श्वेता के विवाह की बात भी चलने लगी | इसी दौरान पप्पू श्वेता की जिंदगी में आया | श्वेता का मन उस पर आ गया | मन की बातें बताने की जगह उसे मिल गई | दोनों में दोस्ती बढ़ने लगी जिस पप्पू के साथ श्वेता की दोस्ती हुई यही उसका उठाना-बैठना स्थानीय मुस्लिम संगठनों में था | इन लोगों ने श्वेता पप्पू की दोस्ती को प्रोत्साहन दिया वे उन्हें आर्थिक मदद भी करते थे | पप्पू की दूसरी माँ मूलतः बंगलादेशी मुस्लिम थी | पप्पू ने हिन्दू लड़की के साथ दोस्ती बढाई ऐसा समझते ही उसने उन दोनों को भागने की सलाह दी | उन्हें बांग्लादेश पहुंचाने की सारी व्यवस्था मैं करूंगी और वहाँ जाकर पप्पू की अच्छी नौकरी मिलेगी ऐसे आश्वासनों का मोहजाल उसने पप्पू और श्वेता के चारों ओर बुनना शुरू किया | घर के हालातों से परेशान श्वेता पप्पू के साथ भागने के लिए हँसते-हँसते तैयार हो गई | विवाह किए बिना श्वेता पप्पू के साथ जाने के लिए तैयार न थी | पप्पू उसकी यह बात मान गया चूंकि श्वेता के घरवाले तैयार नहीं होंगे | श्वेता उम्र में छोटी होने के कारण उसके रिश्तेदार भी राजी ना होंगे ऐसा डर दिखाकर पप्पू को श्वेता को बिना विवाह भागने के लिए मना लिया | कोलकाता के पास एक मंदिर में उसने श्वेता की मांग भरी तीन दिन और तीन रात बिना किसी रुकावट के वे बांग्लादेश पहुँच गए | वहाँ पप्पू दूसरी माँ के रिश्तेदार स्वागत के लिए तैयार थे | इस्लाम के रीति-रिवाज को बिना बोले श्वेता ने अपनाना शुरू कर दिया इसी बीच उसके पैर भारी हो गये | कुछ महीने खुशी से बीतने के बाद पप्पू के रिश्तेदार का बदला वरताव श्वेता की नजर में आने लगा | उनकी नजर सिर्फ बुरी थी एसा नहीं बल्कि उनका व्यवहार भी बहुत बुरा था | पप्पू को अभी कोई अच्छा काम नहीं मिला था, उसकी वहाँ बात जम नहीं रही थी | उन दोनों ने वहाँ से वापस आने की बात सोची | ये बात उसके माँ के रिशतेदारों को पता नहीं थी, वे दोनों वहाँ से निकाल भागे और भारत में आ गए | घर आने पर पप्पू को पता चला कि उसके विरुद्ध पुलिस केस दर्ज किया गया है और महीनों से पुलिस उसे ढूंढ रही है | श्वेता के पास भी और कोई रास्ता नहीं था इसलिए उसने अपने मैयके वालों से संपर्क किया | पुलिस पीछे पड़ने के बाद कुछ भी हो सकता है एसा सोचकर पप्पू भी उसे संभालने से कतराने लगा | लुक-छिपकर कितने दिनों तक रहा जा सकता है और कहाँ ? यह प्रश्न उसे सताने लगा और वह अकेले ही भाग गया | आगे चलकर उसके विरोध में केस सुरू हो गया | उसने अल्पवयीन लड़की को भगाया उस पर अत्याचार सिद्ध हो गए थे | बात यही पर खत्म नहीं हुई कानून को दोनों का विवाह मंजूर नहीं था | इसी तरह श्वेता दूसरा विवाह कर सकती थी | उसकी लड़की के साथ उसको को अपनाने के लिए दिल्ली का युवक तैयार हो गया लेकिन मुस्लिम संघटनाएँ एक बार हाथ आई लड़की को आसानी से नहीं छोडते | इस भयानक सत्य का दाहक अनुभव श्वेता के घरवालों ने किया विवाहित श्वेता के साथ स्थानीय मुस्लिम संघटनाओं के माध्यम से पप्पू ने फिर संपर्क स्थापित किया | श्वेता को फिर पप्पू के साथ फिर आकर्षण का निर्माण होने लगा | एक बार बच्चों को लेकर श्वेता अपने बच्चों को लेकर अपने मैयके आई और कुछ बिना सोचे समझे पप्पू के साथ भाग गई | यहाँ श्वेता का नसीब बहुत अच्छा था | वे दोनों बहुत दूर तक नहीं जा पाये थे | श्वेता के रिशतेदारों ने उसको पकड़ लिया | कानूनी कार्यवाही करके श्वेता को तलाक दिलवाया | पप्पू का धर्म परिवर्तन कराके उनका विवाह करा दिया आज दोनों हिन्दू है और आगे भी रहेंगे |

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2.

मुस्लिम युवकों के जाल में फँसने वाली लड़कियों का आगे क्या हाल होता है ?इसका उत्तर सामाजिक कार्यकर्ती संगीता जी से मिलने के बाद मिला | जम्मू-कश्मीर के डोड्डा जिले में रहने वाली रानी यह एस. वाय. में पढ़ने वाली लड़की | रास्ता बनाने वाले अब्दुल्ला से प्यार करने लगी | यह मुकादम पाकिस्तान सीमा के पास के गाँव का रहने वाला था | दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं | राणे के घरवालों ने जब यह मुलाक़ात रोकने की कोशिश की तब मुकादम अब्दुल्ला काफी आक्रमक हो गया | अपने साथी युवकों के साथ और सीधे उसका हाथ पकड़ कर वो उसको ले गया | रानी ने प्रतिकार तो किया ही नहीं बल्कि वह उसके साथ जाने को तैयार देखकर घरवाले हतबल हो गए | यह बात काफी संवेदनशील होने के कारण उसके घरवालों ने पुलिस में जाना ठीक नहीं समझा | रानी के कुछ रिशतेदारों के कारण संगीता तक यह खबर पहुँच गई | संगीता ने हिम्मत दिखाई तब उसके घरवाले पुलिस में जाने को तैयार हुए | चूंकि लड़की सज्ञान थी | अतः इसका ज्यादा फायदा नहीं होने वाला, ये बात तो स्पष्ट थी ही | बीच में काफी महीने बीत गए और रानी एक दिन अपने घर आ गई | जब वह घर आई तब वह 4 महीनों की गर्भवती थी उसने इस्लाम को कुबूल किया था | पर उसका निकाह नहीं हुआ था | अब इसका क्या किया जाय ? यह प्रश्न घरवालों के सामने था | पुलिस केस करने के लिए संगीता ने उनकी मदद की थी अतः यह बात संगीता जी तक पहुँच ही गई | संगीता जी ने रानी से बातचीत करना शुरू किया, उस समय रानी बता रही थी कि उसे गर्भपात कराना है, वह बता रही थी कि अब्दुल्ला के साथ भाग कर वह पछता रही है | रानी की बातों में कुछ तालमेल नहीं था | एसा संगीता जी को लग रहा था | जब रानी स्नान के लिए गई तब संगीता जी ने उसकी माँ की सम्मति से उसके बैग की जांच की | तब बैग में एक खंजर, दिशा दर्शक यंत्र, अरबी भाषा में लिखी संकेत लिपि, एसी चीजें मिली | खंजर पर जहर लगाया हुआ साफ दिख रहा था |

रानी का मोबाइल भी मिल गया, जिस पर संकेत भाषा फीड की थी | सिर्फ एक हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकरती का नाम अँग्रेजी में लिखा गया था | बैग की जांच पूरी होते समय ही रानी स्नान करके लौट आई | अपनी पोल खुल गई यह रानी भाँप गई | चार महीनों की गर्भवती रानी घर से भाग गई | संगीता जी को इस बात का अंदाजा था ही | उन्होने आस पड़ोस के लोगों की मदद से उसे पकड़ने की कोशिश जारी रखी | इसी बीच रानी ने इस्लामी आतंकवादी संगठन से संपर्क किया और वे उसकी मदद को आ पहुंचे | लेकिन खुलकर उसकी मदद करने के लिए संभव नहीं था | अतः उन्होने विशेष प्रकार की गाडियाँ भेजकर उसे दिशा दिखने का प्रयास किया परंतु इस खेल में जीत संगीता जी और रानी के रिशतेदारों की हुई | रानी मिल तो गई पर उसका क्या किया जाय, यह प्रश्न खड़ा हो गया | पुलिस के पास जाय तो लड्की भी हाथ से जाने का डर था | उसे अच्छा जीवन जीने का मौका देना चाहिए एसा आग्रह शुरू हो गया | परिस्थिति के दबाव के कारण रानी भी डर गई थी | दया की याचना करने लगी थी | एक अर्थ से वह शरण आ गई थी | इसी कारणवश उसे उस इलाके से दूर दिल्ली में रखा गया था | जिस घर में रानी को रखा गया था, वह स्त्री भी जम्मू की रहने वाली थी | “लव्ह जिहाद” में 20 साल पहले वह भी फँस चुकी थी | पश्चाताप से वह भी काफी दग्ध थी | उसने नए सिरे से अपने जीवन की शुरुआत की थी, दो बच्चों में वह अपने आप को भी भूल चुकी थी | यह स्त्री अपने पहले प्यार में एसा ही धोखा खा चुकी थी और उसके नए सुखी सांसारिक जीवन का रानी पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा यह सोचकर रानी को वहाँ रखा गया था | साधारणतः रानी वहाँ तीन महीनों तक रही | उसका वार्ताव भी अच्छा था | पुराने प्यार के बारे में वह कुछ बोलती भी नहीं थी | अपने आने वाले कल के सपने वह लोगों के साथ सजाया करती थी | लेकिन अचानक वह एक दिन घर से गायब हो गई | रानी का गायब होना न सिर्फ रानी के रिशतेदारों बल्कि संगीता जी के लिए भी चौका देने वाला था | जिस घर में रानी को रखा गया था उसकी मदद से ही रानी ने आतंकवादियों से संपर्क स्थापित किया | बीस साल पहले जिसका पुनर्वसन किया गया था उसके मन में पुराने प्यार की भवना पुनः जागृत हो गई और उसकी मदद पाकर रानी पुनः गायब हो गई | जब रानी वहाँ रहती थी तब शुरुआती काल में अब्दुल्ला के साथ उसके जीवन कितना सुखमय था, इसका वह वर्णन किया करती थी | उसके आनंद देने वाले सहवास के कारण और उसके दोस्तों के बार-बार कहने पर वह अब्दुल्ला से मिलने आतंकवादियों के शिविर पर जाया करती थी | यह बात भी उसने खुद बताई | पर यह भी छुपाई की वह खुद भी प्रशिक्षित थी | उसकी छूटी हुई चीजों को देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता था | घर से भाग कर रानी सीधे उस आतंकवादी संगठन के पास गई होगी, यह अंदाजा लगाना कोई मुश्किल काम नहीं था | घटना के बाद रानी ने घरवालों से कभी संपर्क करने की कोशिश नहीं की | वर्तमान में रानी कहाँ है यह किसी को मालूम नहीं |

रानी ने आतंकवादी कार्यवाहियों का प्रशिक्षण लिया हुआ था और उसी संगठन के तहत वह यहाँ किसी योजना से आई थी | परन्तु योजना सफल नहीं हो पाई, इसलिए वह वापिस चली गई | इस उदाहरण से यह भी स्पष्ट होता है शायद रानी को मार डाला गया होगा |

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3.

उज्जैन की सविता यार्दे से संयोगवश मुलाक़ात हो गई | अपनी बहन के साथ सविता मंदिर आई थी | साधारण बातचीत के साथ हमारी बातचीत शुरू हुई | अपना भविष्य सुधारने के लिए सविता रोज मंदिर आती थी | उसका इतिहास बहुत भीषण था | जब वह पंद्रह-सोलह साल की थी तब उसकी गली में रहने वाले एक मुस्लिम लड़के ने उससे विवाह के बारे में पूछा | अधूरी शिक्षा, कमाने का कोई जरिया नहीं, नासमझ उम्र, प्रेम है या नहीं ये भी मालूम नहीं, एसे मोड पर सविता ने उस लड़के को इंकार दे दिया | आगे जाकर ये बंदा इसके पीछे ही पड गया | जब सविता कमाने लगी तब कविता ने उसके साथ विवाह का निर्णय ले लिया | इस अंतर विवाह का सविता के घर वालों ने जमकर विरोध किया, परंतु इस विरोध की परवाह किए बगैर सविता ने सारे बंधनों को तोड़ते हुए उस लड़के से विवाह कर लिया | पहले तीन चार महीने तो सुख-शांति से बीते और फिर वह मुस्लिम युवक अपना असली रूप दिखने लगा | दिन में अनेकों बार भी वह सविता पर जबर्दस्ती करने लगा | पैसों के मामले में भी उसकी मांग अवास्तविक बढ़ने लगी | इस दौरान सविता के पैर भारी हो गए | पर उसके आदमी को इस पर कोई सहनुभूति नहीं थी | अपने पति की यह भयानक मनोवृत्ति सविता के लिए असहनीय होता जा रहा था | पर सारे रिश्ते टूट चुके थे, पेट में उसका बच्चा पल रहा था, इस परिस्थिति में उस शैतान की भूख शांत करते रहना ही सविता के सामने एक पर्याय था | सविता के माँ बनने के बाद भी उस आदमी के वरताव में कोई परिवर्तन नहीं आया उल्टा वह उसे मरने-पीटने लगा | इस दौरान सविता को यह भी पता चला कि उसके पति का कही और भी नाजायज संबंध है, लेकिन मुस्लिम आधार होने के कारण सविता कुछ भी नहीं कर सकती थी | लगभग 4-5 वर्ष तक सिर्फ अन्याय सहन करने के बाद सविता ने उस वंदे से तलाक ले लिया | इस प्रक्रिया के दौरान भी उसे काफी कुछ भुगतना पड़ा, परंतु आज वह आजाद है | सविता बताने लगी, यह साहस मैंने कभी नहीं किया होता अगर अपनी  सहेली को अपनी आँखों के सामने अत्महत्या करते हुए न देखा होता, इस घटना के बाद ही मैंने यह निर्णय लिया |

सविता की सहेली की कहानी इससे भी भयानक है | उसकी सहेली भी एसे ही किसी दूसरे युवक से प्यार कर बैठी | बिना विवाह के ही वो एक होटल में रहने लगे | उनकी मौज-मस्ती शुरू हो गई | उसके पिताजी को जब यह पता चला तब उन्होने अपनी बेटी को काफी डांटा फटकारा और उस युवक से समझौता किया | कितने ही लाखों रुपये के बदले में उसने लड़की का पीछा छोड़ा | पिताजी ने आगे जाकर अच्छा सा वर ढूंढ कर उसका विवाह कर दिया | कुछ दिन शांति से बीत गए, लेकिन कुछ ही दिनों में उस युवक ने ब्लेकमेलिंग करना शुरू कर दिया | जब वह उस लड़की के साथ सरीर सुख ले रहा था तब उस अवस्था में उसने उस लड़की की कुछ तस्वीरें खीची और चित्रिकरण भी किया था | इसी के आधार पर उस लड़के ने अपनी मांग सामने राखी और वह मांग भयानक थी की जब भी वह लड़की अपने मैयके आएगी तब उसे पहली और आखिरी रात उस लड़के के साथ बितानी होगी | पिताजी और वह लड़की हतबल थे, यह गंदी मांग इंकार करने की हिम्मत उनमें न थी | इस मांग से इंकार करना अर्थात लड़की के ग्रहस्थ जीवन को तोड़ना था, इसी कारण उसकी मांग पूरी करने का पर्याय ही उन बाप बेटी के पास बचा था | लड़के का यह पशवी वार्ताव बहुत दिनों तक चलता रहा पर लड़की अपने पति के द्वारा हो रही प्रतारणा सहन नहीं कर पायी और उसने अत्महत्या कर ली | इस प्रकार एसी लड़कियों की अधोगति विवाह के बाद भी नहीं रुकती और कभी-कभी तो ये दर्द उन्हें आत्मघात के कगार पर ले जाता है | सविता यार्दे की बातों ने मुझे इस भयानक तथ्य से बार-बार परिचित कराया |

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4.

शेवन्ता विवाह के समय 20 वर्ष की थी और उसका पति 40-42 वर्ष का था | बंजारा समाज की शेवन्ता दिखने में सुंदर थी | वह खेती का काम करने जाती थी, वहाँ उसकी पहिचान युसुफ से हुई और वह उसका भाई बन गया | शेवन्ता और उसके पति की उम्र का अंतर उन दोनों को पास लाने में सहायक हुआ | शेवन्ता और युसुफ का भाई बहन का रिश्ता केवल 8-10 महीनों तक ही रहा और अब प्रेमियों की भांति वह एक दूसरे से मिलते हुए नजर आने लगे | शेवन्ता के ससुराल वालों को यह सहन हो पाना असंभव था | युसुफ के साथ हर प्रकार का संबंध रखकर मौज मस्ती करने वाली शेवन्ता को सबक सीखने की उसके ससुराल वालों ने ठान ली | चार पाँच लोगों ने शेवन्ता को पीटा और उस पर बलात्कार किया | आगे यह बात न्यायालय में पहुंची | जब श्वेता अस्पताल में थी तब युसुफ ने उसके खर्चों के लिए ढाई लाख रुपये दिये उसके बदले में बलात्कारियों के नाम बताते हुए युसुफ के बताते हुए चार-पाँच नाम भी शेवन्ता ने अपनी जबानी में पुलिस को बता दिये | वैसे देखा जाय तो इन चार लोगों को शेवन्ता पहिचानती भी नहीं थी पर युसुफ के प्यार के कारण और उसके दिये पैसो की खातिर शेवन्ता ने इन निरपराध लोगों के नाम लिखकर दे दिये | इसके परिणाम स्वरूप इस भयंकर आरोप के चलते इन चार लोगों को भी शेवन्ता के ससुराल वालों के साथ जेल

की हवा खानी पड़ी और बदनामी का दर्द झेलना पड़ा |

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5.

देवास में रहने वाली ज्योत्सना सिर्फ 21 वर्ष की है | सिर्फ दो महीने पहले वह किसी मुस्लिम युवक के साथ भाग गई | पास ही रहने वाले एक दोस्त के पहिचान का था,  वह मुस्लिम युवक ज्योत्सना को भगाने में उस लड़के की माँ, मामा एसे अनेक लोगों के हाथ था | इस लड़की को राजस्थान में बेचना भी तय हो गया था | इस दौरान अनेक लोगों ने उसके साथ शरीर सुख लिया | जैसे इस कांड की खबर मिली कुछ सुभचिंतक उसे वापिस ले आए | उस मुस्लिम युवक के साथ उसके साथियों की गिरफ्तारिया हुई | उन पर अपराध दाखिल किया गया | जिस दिन मैं इस लड़की से मिली उसके दूसरे दिन वह लड़का और उसके साथी जमानत पर छूटने वाले थे | क्या छूटकर वह लड़का पुनः ज्योत्सना के पास आयेगा, क्या और गुल खिलाएगा यह सोचकर सब हैरान थे, लेकिन वह लड़की और उसकी माँ इस कदर खुशी थीं मानो कोई जश्न चल रहा हो | उन पर इस दर का कोई नमो-निशान नहीं था | जब मैं उस घर से निकली तब देखा की वह व्यक्ति की मध्यस्थी के कारण यह हुआ था वह एक दुकान के पास बैठकर गंदी हरकतें कर रहा था | बाद में क्या हुआ ? अपनी बिक्री होने वाली थी यह पता होने के बाबजूद उस लड़की को अपने प्रेमी की मुक्तता क्यों चाहिए थी, उसके प्रति आकर्षण मुझे अस्वाभाविक लगा | पर यही सत्य है जो काफी चौका देने वाला है |

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6.

सूरत की भी कहानी कुछ एसी ही थी | यहाँ की रेशमा सुशिक्षित और खाते-पीते घर की लड़की थी | वह कम्प्यूटर क्लास के लिए जाती थी | वहाँ की शिक्षिका ने ही मध्यस्थ की भूमिका निभाई, उसने रेशमा को एक मुस्लिम युवक के साथ दोस्ती के लिए उकसाया और जब रेशमा उसके प्रेम जाल में फंस गई तब ही वह अलग हो गई | दोनों ही सज्ञान है और पिछले तींन महीनों से कहाँ है किसी को कुछ पता नहीं | उस मुस्लिम युवक के अभिभावक से संपर्क हो पाया था पर उन लोगों के अनुसार वे कहाँ है ये उन्हें भी पता नहीं | जब हम उनके घर गए तो हमें चिंता की कोई परछाई तक दिखाई नहीं दी | अभिभावकों की ओर से सारा मामला शांत था | पूछताछ करने पर पता चला कि उन्होने पुलिस में रपट तक नहीं लिखवाई थी |

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7.

एक माध्यमवर्गीय, सुशिक्षित, सुंदर, चार्टर्ड अकाउंटेंड दंपति से मिलने का अवसर मिला | लड़की मूलतः हिमाचल प्रदेश की रहने वाली थी | दोनों पढ़ रहे थे तभी से उनके प्रेम संबंध है | दोनों के परिवार वालों को उनकी शादी मंजूर नहीं थी | लड़के वाले अपेक्षाकृत जरा जल्दी पिघल गए | शादी के लिए कोई नहीं आया पर निकाह के बाद नई बहू का स्वागत कुछ ज्यादा ही जोरदार तरीके से किया गया इस दंपति के साथ बातचीत करते समय शौहर ने एक बात ज़ोर देकर कही कि धर्म यह बेडरूम की क्रियाओं के इतनी ही व्यक्तिगत बात है | लेकिन आपने अपनी पत्नी का मतांतरण क्यों किया? अपने विवाह रजिस्टर क्यों नहीं किया? आप अपने प्यार की खातिर हिन्दू क्यों नहीं बने? निकाह ही क्यों किया | इनमें से किसी का भी उत्तर उसके पास नहीं था | जब हमने पत्नी से बात की तो उसने बताया कि हमने जरूरत के लिए इस्लाम को अपनाया लेकिन श्पेशल मैरिज  एक्ट के अंतर्गत (जिसके अनुसार दोनों पति पत्नी को अपना अपना धर्म कायम रखकर विवाह करने का अधिकार प्राप्त होता है) विवाह क्यों नहीं किया? पर उसने उत्तर देने में टालमटोल की | विवाह को दस वर्ष बीत चुके है | बच्चों का धर्म हिन्दू होगा या इस्लाम इस प्रश्न का उत्तर बच्चे न होने के कारण उन्होने देने से मना कर दिया |

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8.

इन सब से भयानक अनुभव गोहाटी में सामने आया | वहाँ पर मिली प्रमिला अपने पति की सातवीं पत्नी थी | जब प्रमिला शाहिद से प्यार करने लगी तब उसे ये बात पता नहीं थी | प्रमिला के प्यार का सिलसिला एक नेट कैफे से शुरू हुआ | दोनों में अनैतिक संबंध भी निर्माण हो गए थे | प्रमिला के घर से विरोध था इसलिए वह बालिग होने पर भाग जाने का निर्णय लिया | फिर उन्होने विवाह(निकाह) कर लिया | निकाह के बाद कुछ महीने वे एक फ्लैट में रहे | काफी दिन बीत गए पर प्रमिला की पहिचान शाहिद के रिशतेदारों से न हुई | प्रमिला हमेशा ही पीछे लगती थी | एक दिन वह उसे अपने घर ले गया जो दूसरे जिले में था | प्रमिला का अच्छा स्वागत हुआ पर उसी समय उसे बड़ा समाचार मिला | प्रमिला बता रही थी “मैं शाहिद के घर पहुंची तब मेरा स्वागत करने के लिए शाहिद की पहली तीन पत्नीयाँ मौजूद थीं | मैं बहुत गुस्सा हुई और शाहिद से इस बारे में पूछा | उसने मेरे भावनाओं का बिलकुल भी लिहाज नहीं किया और मुझे कहा कि मुझे भी उनके साथ ही रहना पड़ेगा | इतना ही नहीं उसका और तीन औरतों से निकाह हुआ था और उसने उन्हें तलाक दे दिया था एसा शाहिद मुझे इतराकर बता रहा था |” प्रमिला के साथ घटित घटना उसके स्वयं के लिए काफी अपमानजनक तथा गुस्सा दिलाने वाली भले ही हो परन्तु इस्लाम के कानून के अनुसार है | शाहिद ने पहले चार विवाह हिन्दू लड़कियों से किए थे, जब शाहिद अपना पाँचवाँ प्रेम संबंध स्थापित कर रहा  था तब उसने अपनी दूसरे क्रमांक की पत्नी को तलाक दे दिया था | अन्य विवाह करते समय उसने इसी पद्धति का अनुसरण किया | प्रमिला के अनुसाए शाहिद के सातों हिन्दू युवतियों से ही निकाह हुए थे | लेकिन इन सभी लड़कियों में प्रमिला ही एसी थी जिसने शाहिद पर धोखाधड़ी का केस दाखिल किया जिसमें उसने यह कहा कि शाहिद ने उसके पहले निकाहों की बात उससे छिपाई थी | यह केस प्रमिला जीत गई | लेकिन इससे धोखाधड़ी का यह मामला खत्म नहीं हुआ | शाहिद ने प्रमिला के रिश्ते कि एक लड़की पर अपने प्रेम के डोरे-डाले और वह कामयाब भी हो गया |

और एसे कितने उदाहरण दूँ? जिन लड़कियों से मैं मिली उन सभी लड़कियों की स्वतंत्र कहानी है | भयानक है, विमनस्क बनाने वाली है, उलझाने वाली है, गुस्सा दिलाने वाली है | हर उदाहरण में कहानी-उपन्यास व सिनेमा में मिलने वाला हर मसाला मौजूद है | पर मैं किसी एक के पास नहीं रुकी | मैंने इन सभी की हकीकतों में कुछ समान सूत्र ढूँढने की कोशिश की | क्या इन सभी घटनाओं में कोई समान सूत्र मिलता है? यह सभी प्रेम कथाएँ सीधे मार्ग से आगे बढ़ती है की नहीं ? जिस प्रकार हर प्रेम कहानी की शुरुआत, मध्य और अंत होता है उसे देख कर लगता है कि यह कहानी प्यार के परवाज़ पर चढ़ने से पहले ही इनके जीवन में राख क्यों हो जाती है यह एक अनुसंधान का विषय है ………..

हर एक प्रेमकथा हमें एक भयानक अंत की ओर ले जाती है, यह समझने में ज्यादा समय नहीं लगता था | इन साक्षात्कार में से सिर्फ कुछ प्रतिनिधिक उदाहरण द्वारा एक बात स्पष्ट होती है कि इन युवतियों का प्रवास तीन स्तरों से गुजरता है | इसी प्रकार इन प्रेम कथाओं में भी विशिष्ट रणनीति सामने आती है | जिस अनुभव से मैंने अपनी खोजबीन का आरंभ किया, वह ज्योति अपने गर्भवती होने की बात तो घरवालों को बता रही थी पर वह कहाँ है यह पता नहीं चलने दे रही थी | न ही किसी का फोन उठा रही थी | दूसरा उदाहरण रूबिया या रेवती जिसने भावनात्मक दबाव में आकर धर्मपरिवर्तन का मार्ग चुना | श्वेता का उदाहरण यह स्पष्ट करता है कि मुस्लिम संगठनों का जाल सिर्फ देश में ही नहीं विदेशों में भी फैला है इसी प्रकार यह भी स्पष्ट होता है कि ये संगठन हाथ आई लड़की को कभी छोड़ते नहीं है | संगीता की कहानी तो किसी फिल्म कि कहानी को भी पीछे छोड़ सकती है | लड़कियों को आतंकवादी कार्यवाहियों का प्रशिक्षण दिया जाता है | उनका इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों में किया जाता है | इसका पता भी हमें संगीता कि कहानी से मिलता है और ज्योत्सना की कहानी से पता चलता है कि इनके द्वारा लड़कियों कि बिक्री की जाती थी | उज्जैन की सविता के अनुसार पाँच छह-वर्षों तक चलने वाला प्यार विवाह के तीन चार महीने भी नहीं टिकता | बहुत भयानक अत्याचारों को सहन करना पड़ता है एसा हर अनुभव अधोरेखित कर रहा था | सविता ने बताई हुई दूसरी कथा यह सूचित करती है इस प्रकार मुस्लिम युवकों के प्रेम जाल में फंसी लड़की कभी-कभी अत्महत्या करने पर विवश हो जाती है | शेवन्ता का उदाहरण हमें बताता है कि इन लड़कियों का इस्तेमाल बदला लेने के लिए भी किया जाता है | गुवाहाटी की प्रमिला का कानून भले ही मुस्लिम कानून के दायरे में आता है पर प्रमिला को यह बहुत बड़ा धोखा दिया गया था और सोचने वाली बात यह थी कि शाहिद का हर निकाह हिन्दू लड़की के साथ कैसे हुआ ?

इन अनुभवों में से एक भी सीधा-सादा नहीं है, बिलकुल नहीं, फिर है क्या ?

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लव्ह जिहादियों की पद्धति          

मुस्लिम युवकों के चंगुल में फंसी ये लडकीयां जब कभी पुलिस के कारण कभी रिशतेदारों के कारण या कभी शुभचिंतकों के कारण अपने-अपने घर वापिस आईं | नई ग्रहस्थी में रम गईं | एसी युवतियों के साथ बातचीत कर उनका साक्षात्कार लेने का प्रयास करते हुए मैं अनेक जगहों पर गई | जब इन युवतियों के साक्षात्कार का सारांश तैयार किया गया तब इस बात का एहसास हुआ कि हर एक लड़की की कथा एक विशिष्ट पड़ाव तथा गति के साथ आगे बढ़ती है | इस प्यार का प्रारम्भ और मध्य तय होता है लेकिन अंत बहुत हद तक उन लड़कियों के भाग्य पर निर्भर करता है |

  • पहला पड़ाव
  1. साक्षात्कार में जो बातें सामने आईं उनमें सबसे महत्वपूर्ण थी कि इन लड़कियों के घर में किसी न किसी चीज़ का अभाव था |जैसे कभी भीषण दारिद्र्य, कभी माँ या पिता का स्वभावगत चंचल होना या उनकी अस्थिरता, लड़की के व्यक्तित्व की उपेक्षा हो एसा मानना, झगड़े, मांगों को पूरा करने की परिस्थिति न होना या मांग न मानना, स्वतन्त्रता का अभाव, शिक्षा का अभाव या प्रभाव न होना, घरवालों की अपेकषा बहरवालों पर ज्यड़ा विश्वास होना, तड़क भड़क का आकर्षण, योवन का अर्थ सिर्फ मौज मस्ती है | एसा मनाने वाले दोस्त 13 से 21-22 की नासमझ उम्र, इनमें से कुछ या सभी कारणों से घर के व्यक्ति की अपेक्षा बाहर के व्यक्ति ज्यादा अपने लगे |
  2. आपस के आकर्षण का कोई भी कारण यहाँ कारगर सिद्ध हुआ है | अगर गजरे वाला है तो रोज एक गजरा देकर, मजदूर है तो शायद पानी मांगकर, कोई हीरो है तो रोज मोटर साइकिल पर घूमाने ले जाकर इन लड़कों द्वारा प्रेम संबंध स्थापित किया जाता है | एमबीबीएस पढ़ी हुई एक 25 वर्षीय युवती ने कहा कि ’ वह मुझे अमीर खान जैसा लगा इसलिए बिना कुछ सोचे समझे मैं उसके साथ मोटर साइकिल पर बैठकर सूरत से निकली और मुंबई के रास्ते गोवा पहुँच गई | ‘एक छटी सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली लड़की गजरा बेचने वाले लड़के से प्यार करने लगी क्योंकि घरवालों से उस पर ज्यादा विस्वास रखती थी, इतना भरोसा कि उसके दोस्त के घर में अपना सर्वस्व देने को तैयार हो गई | तीसरी लड़की ने पहले उसे राखी बांधी और फिर पंद्रह दिनों के अंदर होटल में जाकर उसके साथ श्रंगार रचाया | घर में गाड़ी घोडा सबकुछ होते हुए भी लड़की को होंडासिटी ने आकर्षित किया और वह उस लड़के के साथ एसे बंगले में रहने चली गई जहां नौकर चाकर थे पर कोई रिश्तेदार नहीं था | एक को कपड़ों का सलेक्शन पसंद आया |
  3. अनेक जगह लड़कों के द्वारा इस प्रेम की शुरुआत ग्रुप में हुई | ग्रुप में कोई उसका भाई, पक्का दोस्त या सहेली बन जाता है | कही-कहीं प्रथम पहिचान करने का काम उन दोनों के आम दोस्तों ने किसी किसी दुकानदार आदि ने किया | जब उस लड़की को उस लड़के के प्रति भरोसा उत्पन्न हुआ और उसके विशिष्ट संबंध आकार लेने लगे तब इन्ही लोगों ने दोनों को प्रोत्साहन भी दिया |
  4. खास प्रसंगों में भेंटवस्तु देने के लिए प्रोत्साहित करना, दोनों के लिए होटल सिनेमा आदि की व्यवस्था करना यहाँ तक कि दोनों के भागने की योजना बनाना, भागने के लिए उन्हें कहाँ मिलना है, कहाँ साथ रहना है हर पड़ाव के लिए इन लोगों को दोस्तों की और मध्यस्थ लोगों की मदद होती रहती है |
  5. लड़की आकर्षित हो रही है यह समझ आते ही उस पर भेंट वस्तुओं की बारिश होने लगती है लड़की जिस आर्थिक सामाजिक स्तर की होती है उसके अनुसार उपहारों का स्तर बदलता रहता है | गरीब लड़कियों के लिए नेलपेंट, लिपिस्टिक, कोम्पेक्ट से उपहारों का आरंभ होता है और अमीर लड़के के लिए इंपोर्टेड परफ्यूम पहले मुलाक़ात में दिया जाता है | लड़की अमीर हो या गरीब जब वह उपहारों को ले जाती है तब उसे एक चीज उपहार के तौर पर मिलती ही है और वह है मोबाइल सैट, संपर्क करने का प्रभावी और व्यक्तिगत साधन |
  6. लड़का समान्यतः कम पढ़ा लिखा होता है | शायद ही किसी की अच्छी नौकरी  या धंधा होता है | जिन लड़कों से ये लड़कियां प्यार करने लगीं वे सभी गरेज में काम करते थे या मोबाइल रिपेयरिंग का धंधा होता था या मंदिर के आस-पास चलने वाले धंधे जैसे टाइट बांधना, टीका लगाना, ज्योतिष या उससे संबन्धित व्यवसाय, साधारण विक्रेता होते थे |
  7. जिन युवकों के प्यार में लड़कियां फँसती है वे उन्हें कभी अपना असली नाम नहीं बताते | ये लडकीयां बस उनके बंटी, पप्पू, टीपू, बौबी, राजू, वीरू बबलू यही नाम जानती है |
  8. विस्वास सम्पादन करने की कालविधि साधारणतः 4 महीनों से सालभर तक की होती है | अगर इस दौरान हिन्दू लड़की को लड़के के मुस्लिम होने का पता चलता है और लड़की अपने भविष्य को लेकर अगर संदेह लेने लगती है तब लड़का स्वयं ही इस्लाम की परम्पराएँ कितनी गलत है | इसका बाखान शुरू कर देता है | इस प्रकार यह युवक जानबूझ कर एसा मोहजल बुनता है जिसमें लड़की को यह जताया जाता है कि भले ही और घरों में मुस्लिम औरतों पर अत्याचार किया जाता हो पर वह धर्मांध नहीं है, अत्यंत आधुनिक और सद्विचारों का है, और उस लड़की को वे हमेशा विश्वास दिलाने में सफल होते है | अनेक प्रकरणों में तो लड़कियों के मन में इन युवकों ने पहले से इतना विश्वास निर्माण कर रखा होता है कि इन लड़कों के बारे में सूक्ष्मता से जानकारी प्राप्त करने की आवश्यकता भी उन्हें महसूस नहीं होती |
  • दूसरा पड़ाव
  1. विश्वास सम्पादन करने के पश्चात युवक की ओर से भाग जाने का आग्रह किया जाता है | उसके दोस्तों के द्वारा या मध्यस्थियों द्वारा इसी के लिए उकसाया जाता है | इसी दौरान लड़की के द्वारा विवाह के बारे में पूछा जाता है | लेकिन  मैंने आज तक जितने प्रकरण देखें हैं, उनमें युवक ने विवाह को टालने की कोशिश ही की है | ‘विश्वास ही सहजीवन का आधार होता है’ इस उक्ति का आधार लेते हुए इन लड़कियों को भागने के लिए उकसाया जाता है | वह युवती जिस समूह से, उसके अनुसार भाषा बदल गई है, पर शादी कभी भी- कहीं भी काजी की मदद से कारवाई जा सकती है एसा बताया गया था |

सूरत की प्रेमा बताती है, मुझे भाई नहीं था, मैं किसी को राखी बांध नहीं सकती थी | बौबी मेरे क्लास में था | हममें दोस्ती तो थी ही, एक बार उसी ने मुझे अपने हाथ राखी बांधने के लिया कहा | दूसरे साल भी मैंने उसके हाथ पर राखी बाँधी | पर बाद में हम दोनों को एहसास हुआ कि हमारी भवनाएँ कुछ अलग है| हम दोनों पूर्ण रूप से एक दूसरे के करीब आ गए थे |” प्रेमा की कहानी यहाँ पर नहीं रुकी | कुछ दिनों तक उनकी मौज-मस्ती होटल पर शुरू रही | बाद में बौबी नाम धारण किए हुए अकबर ने उसे विवाह के बारे में कहा, पर दोनों के धर्म अलग-अलग होने के कारण उन्हें भागकर काजी की मदद से विवाह करना होगा, एसा भी अकबर ने कहा | अकबर की बातों में आकर प्रेमा उसके साथ भाग गई | अकबर उसे अपने दोस्त के घर ले गया | वह जगह बहुत सुंदर थी, खाने पीने की कोई कमी नहीं थी, घूमने के लिए गाड़ी थी | लेकिन काजी के पास जाकर विवाह करने की बात कुछ जम नहीं रही थी | इसी दौरान प्रेमा माँ बनाने वाली थी |

  1. प्यार का यह दूसरा पड़ाव सबसे भयानक है | इसमें से एक भी लड़की नहीं बच पाई है | युवती ने उस युवक को अपने माना होता है उसकी ओर जीवन साथी के रूप में देखा होता है | कुछ हद तक घरवालों को भी बताया गया होता है | लेकिन उसके साथ भागने की बात को छिपाया गया होता है | मुस्लिम युवक के दोस्त, उनके रिशतेदारों के भरोसे वह यह कदम उठती है |
  2. इस मस्ती के आलम में जब लड़की लड़कों के पूर्ण नियंत्रण में आ जाती है, तो पहले वह उसके साथ शारीरिक संबंध स्थापित करता है | दिनों में अनेकों बार यह क्रिया घटती है | इस क्रिया के लिए लड़के को उसके रिशतेदारों दोस्तों का पूर्ण सहयोग मिलता है | कभी भाड़े पर कमरा लेकर कभी स्वकीयों की खाली घरों को इन जोड़ों के द्वारा उपयोग किया जाता है | कभी-कभी ये प्रेमी युगल किसी विशिष्ट लौज या आलीशान होटल में अनेक दिनों तक रहे हैं | और कुछ ने अपना गाँव बार-बार बदला है |
  3. शारीरिक संबंध स्थापित करते समय मुस्लिम युवक अपने दोस्तों के साथ मिलकर षड्यंत्र रचे हुए दिखाई देते है | वह षड्यंत्र है काम क्रीड़ा का विचित्रीकरण करना, उनके फोटो कोपीज़ निकालना और इससे लड़की के बर्तमान को कचरा करना और भविष्य में भी लड़की उनके अधीन हो इसका बंदोबस्त करना | मुस्लिम युवकों के इस षड्यंत्र के बारे में हर लड़की ने बताया है | आगे जाकर उस लड़की ने थोड़ा भी विरोध किया, भागने की कोशिश की या शादी की जिद पकड़ कर बैठ गई तो उसे शांत करने के लिए तो इन फिल्म्स और वीडियो का इस्तेमाल किया गया | अगर अभिभावक और पुलिस वहाँ आ धमकें तब लड़की को इन्ही के द्वारा धमकाया गया | निकाह दूर कि बात रह जाती है वह लड़की अपनी जान बचाने के लिए वह युवक जो बताता है वह करने के लिए और उसी प्रकार जीने के लिए बाध्य हो जाती है |
  4. साथ रहने के साथ निकाह की चर्चा अवश्य शुरू हो जाती है, पर वह किया नहीं जाता | लेकिन उस लड़की से यह अपेक्षा अवश्य की जाती है कि वह इस्लामी रीति रिवाजों का पालन जरूर करे | इसमें नमाज पढ़ना, हिजाब बांधना, रोजा रखना इत्यादि बातों का समावेश होता है | मतांतरण की कानूनी तौर पर कागज पर लिखा पढ़ी हो यह जरूरी नहीं है लेकिन रीति रिवाजों का पालन सम्पूर्ण रूप से हो यह अवश्य देखा जाता है | पूरे भरोसे के साथ घर छोड़ने वाली लड़कियां इस्लामी रिवाज का पालन शुरू कर देती है |
  5. गर्भधारण के बाद के कुछ दिन लड़की के लिए स्वर्गीय आनंद के होते है लेकिन धीरे-धीरे उनको इस बात का अहसास होता है कि लड़के की उसमें कोई दिलचस्पी नहीं है | हमेशा उसके साथ रहने वाला साथी अनेक दिनों तक महीनों तक उसे अपना मुँह तक नहीं दिखाता | अनेकों बार एसा होता है कि लड़का उस लड़की को अपने किसी रिश्तेदार के पास छोडकर जाता है और लड़की बस उसकी राह देखती रहती है |
    • तीसरा पड़ाव  

इन युवतियों के साक्षात्कार से यह बात स्पष्ट है कि अगर वे वापस नहीं आती तो उसका अंजाम क्या होता है | इसके अलावा इन लड़कियों के वापस आने के कारणों द्वारा इनकी भीषणता का अहसास होता है | जो लडकियाँ वापिस लायी जा सकी या जिन्हें लाने में यश मिला है और इस यश के पीछे निम्नलिखित कारण है –

  1. लड़की जब गर्भवती हो जाती है तब वह घबरा जाती है और अपने अभिभावकों से संपर्क की कोशिश करती है | लड़की का पता लगते ही संबन्धित लोगों से अथवा पुलिस के द्वारा सार्वजनिक कार्यकर्ताओं की मदद से उसे वापिस लाया जाता है |
  2. खासकर लड़की अगर नाबालिग है तो कुछ केस में जागृत अभिभावकों ने पुलिस में केस भी दाखिल किया तथा पुलिस ने अपना कर्तव्य निभाते हुए उस लड़की को ढूंढ कर वापिस लाया है |
  3. जब यह लडकी गर्भवती हो जाती है तब उन लड़कों के दोस्तों के जरिये या रिशतेदारों की बातों से उसे अन्य हिन्दू लड़कियों के बारे में पता चलता है जो उसकी तरह थी | उसे पता चलता है कि इन लड़कियों को या तो बेचा जाता है या उन्हें गाँव छोड़ा जता है, निकाह के बाद दूसरी या तीसरी पत्नी का स्थान मिलता है | बच्चे पैदा करने वाली माशीन की तरह उसे इस्तेमाल किया जाता है उसे इस बात का भी अहसास होता है कि उसका प्रेमी कुछ अन्य लड़कियों के साथ भी अंबन्ध रखता है तब उनके मन में डर पैदा होना शुरू हो जाता है और वह उस युवक से अपने आप को छुड़ने का प्रयत्न करती है अगर एसा करने में वह कामयाब हो जाती है तभी वह वापिस आ सकती है जिन लड़कियों को मैंने साक्षात्कार लिए वे भले ही एक आयु वर्ग की थीं परंतु उनके गाँव अलग राज्य अलग सामाजिक आर्थिक शैक्षिक स्तर अलग थे और परवारिक प्रष्ठ भूमि भी अलग थी | इन साक्षात्कारों से प्राप्त जानकारी को अगर ध्यानपूर्वक देखा जाय तो तो सबमें हमें एक समानता नजर आएगी | लड़कियां जिन कारणों से आकर्षित हुईं वे सामान्य लोगों की समझ से परे है | यह लड़कियां भिन्न-भिन्न स्तरों से आती है परंतु लड़के समान्यतः मामूली सा धंधा करने वाले होते है | अगर लड़की अमीर घर की होती है तब वह लड़का आकर्षक पहनावे में होता है और अपने आप को बहुत बड़े बिजनेसमेन के रूप में दर्शाता है | लड़के का झूठे नाम बताना उपहारों की बारिश करते समय मोबाइल देना, रिशतेदारों के विषय में खुलकर न बताना उसके आस-पास के लोगों का प्यार को बढ़ावा देना और उन्हें सहकार्य देना लड़की को घर से भागने के लिए प्रोत्साहित करन सबसे जरूरी बात बिना शादी के रहने के लिए उकसाना, शारीरिक सम्बन्धों का विचित्रीकरण गर्भवती रहने तक सुख में रखना, विवाह करने में टालमटोल करना पर लड़की द्वारा मुस्लिम रीति रिवाजों का पालन करने का आग्रह करना लड़के के रिशतेदारों की अचानक मिलने वाली मदद ये कुछ भी सीधे रास्ते से जाने वाली प्रेम कथा में नहीं होता है | कुछ अपवादों को छोडकर समान्यतः यह देखा गया है कि कोई भी युवक अपने प्यार के खातिर न कभी हिन्दू धर्म का आचरण करता दिखाई देता है और न ही कभी हिन्दू धर्म को अपनाने की इच्छा व्यक्त करता है किसी लड़के ने विवाह होने तक संयम नहीं रखा न ही किसी लड़के ने किसी लड़के के साथ लंबा रिश्ता बनाने के बात सोची |

जिन शहरों-गाँवों में मैं गई वहाँ के वातावरण का प्रभाव इन युवकों के कार्य पद्धति पर था | जैसी उज्जैन में ज्योतिर्लिंग महाकाल और अन्य मंदिरों का प्रवाह है | इसी कारण ये मुस्लिम युवक-युवतियों पर जाल बिछने हेतु हिन्दू मंदिरों के परिसर में कम करते दिखते है | हार या फूल बेचने वाले, ताईत बेचने वाले या ज्योतिषी के दोस्त के रूप में आकर उन्होंने दोस्ती की | शिक्षा का केंद्र माने जाने वाले पुणे, औरंगाबाद या दिल्ली जैसे शहरों में कालेज कैंपस, कंटीन्स, नेट कैफे, आइसक्रीम परलर्स आदि जगहों पर कभी विद्यार्थी के रूप में या बिजनेस में होने का नाटक किया है | पढ़ी-लिखी लड़की को फ़ेस बुक के द्वारा दोस्ती बढ़ाना, मोटरसाइकल, गाडियाँ ऊंचे होटल आदि मार्गों का इस्तेमाल किया जाता है | मूलतः संवेदनशील भाग जैसे जम्मू कश्मीर में लड़की अगर सीधी तरह से न माने तो उसे भागकर ले जाया जाता है | सूरत जैसे अमीर शहरों में अपने आप को काफी देशों से व्यापार करने वाला हूँ, कहकर धोखा दिया जाता है|

भले ही ये सारी घटनाएँ अलग अलग दिखाई पड़ती है पर ये सारी घटनाएँ एक बड़े षड्यंत्र की कड़ियाँ हैं | एसा मनाने के पूरी संभावना है निर्धारित पड़ावों को पार करती हुई ये सारी प्रेम कथाएँ और इनके पीछे छिपी प्रेरणाओं का अभ्यास करना आवश्यक लगाने लगा है और बातें मुख्य रूप से सामने आई, वे थीं –

  1. कथा में सुसूत्रता
  2. मुस्लिम युवकों का विशिष्टपूर्ण वर्तन
  3. हर साक्षात्कार में एक बात समान रूप से सामने आई और वह थी उन युवकों के प्रति अभी भी इन युवतियों के मन में छिपा आकर्षण |

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4.     अभिभावकों और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद  

 मुस्लिम युवकों के जाल में फँसकर बचीं हुई लड़कियों के साक्षात्कार लेते-लेते इस विषय की गहराई, इसका गांभीर्य और इसका स्वरूप धीरे-धीरे सामने आ रहा था | परंतु इस विषय का पूर्ण रूप से आकलन होना आवश्यक था | इसलिए उन युवतियों के साथ उनके अभिभावक तथा वे सामाजिक कार्यकर्ता जिन्होंने इन्हें मदद की साक्षात्कार लेना आवश्यक था |

पीड़ित लड़कियों का साक्षात्कार लेना तुलना में अधिक सरल था क्योंकि वे अपनी कहने बताने के लिए उत्सुक थीं | लेकिन माँ-बाप की बात अलग थी जिन लड़कियों के साथ धोखा हुआ था | उसके अभिभावक उस विषय के बारे में बात करने तक के लिए तैयार नहीं थे, एसा बहुत बार देखा गया | दूसरी ओर एसे अभिभावकों और कार्यकर्ताओं की कमी नहीं थी जो अपनी बेटी पर बीती दूसरे की बेटियों के साथ न हो इसलिए प्रयत्नशील थे | कुछ सामाजिक कार्यकर्ता तो हिन्दू लड़कियों के रक्षण के लिए स्वयं प्रेरणा से आगे आ रहे थे |

युवतियों के साक्षात्कार से जो भयानक वास्तव सुनने को मिला कुछ एसी ही जानकारी देने वाले साक्षात्कार अभिभावकों ने दिये, उदाहरण के लिए दो यहाँ दिये जा रहे है – प्रश्न – लड़की की उम्र क्या थी ?

उत्तर- 18 की हुई थी |

प्रश्न – आपकी लड़की कब से गायब है ? आज तक पुलिस कम्पलेंड क्यों नहीं की ?

उत्तर- पिछले दस दिनों से हमारी लड़की गायब है | में रिक्शा चलता हूँ और उसकी माँ प्राथमिक पाठशाला में सेविका की नौकरी करती है | हमें एक लड़का और लड़की है | हमारी लड़की बहुत होशियार और सुंदर है | दसवीं और बरहवी कक्षा में उसे बहुत अच्छे अंक मिले इसलिए हमने मर्यादाओं की अपेक्षा करके अच्छे कालिज में प्रवेश दिलवाया | पढ़ाई में तो वह होशयार थी ही इसके साथ साथ वह अन्य कला गुणों में भी निपुण थी, वह एक अच्छे खिलाड़ी के रूप में प्रसिद्ध हो गई | कालिज के दूसरे साल में वह विद्यार्थी प्रतिनिधि के रूप में नियुक्त हुई | हमें उसका अभिमान था |

प्रश्न – क्या इसी काल में उसकी अनेकों से दोस्ती हुई थी ? क्या उस समय कुछ आपत्तिजनक घट रहा था ?

उत्तर- हम ज्यादा पढे लिखे नहीं है | इसपर हमारी लड़की पढ़ाई-लिखाई में होशियार, सब उसकी तारीफ किया करते थे | इसी कारण उन आपत्तिजनक बातों की ओर हमारा ध्यान नहीं गया | जब से वह कालेज जाने लगी उसके दोस्तों की संख्या बढ़ती गई | होटल में जाना, कीमती कपड़े पहनना, ये सारी बातें शुरू हो गईं | पर जब वह विद्यार्थी प्रतिनिधि के रूप में चुनी गई तब हमें एहसास हुआ कि उसका व्यवहार बदल सा गया है | प्रतियोगिताएं हो या विद्यार्थीयों की समस्या का निवारण करना एसे विविध कारणों से वह देरी से घर लौटने लगी | इसी दौरान इन दोस्तों में कुछ मुस्लिम होने की बात और उनमें से एक के वह काफी करीब आने की बात कानों में आई |

प्रश्न – क्या आपने नहीं पूछा ?

उत्तर- उसकी माँ मुझसे ज्यादा गुस्सा हुई | उसने लड़की को डांटा, धमकाया, कालेज जाना बंद कारवा देंगे एसा भी बताया | मैंने भी लड़की को परिस्थिति का एहसास दिलाने की कोशिश की |

प्रश्न – इन सब बातों का क्या परिणाम हुआ?

उत्तर- पहले तो वह ऐठकर जबाब देती थी | अगर हमारी दोस्ती का विरोध किया तो अत्महत्या कर लूँगी, उसने हमें एसे धमकाया था | पर धीरे-धीरे वाह शांत हो गई | घर के कामों में रूचि लेने लगी | पर ये सब हमें धोखा देने के लिए था | जब हम दोनों किसी रिश्तेदार की शादी में बाहर गए तब हमारी लड़की ने मौके का फायदा उठाया और वह गायब हो गई |

प्रश्न – क्या आपको इस बात का विश्वास है कि वह उसी मुस्लिम लड़के साथ भागी होगी ?

उत्तर- हाँ, जब हम गाँव से लौटे और हमने पाया कि हमारे लड़की लापता है तब हमने उसके दोस्तों से पूछताछ की, तब हमें पता चला कि उसी मुस्लिम लड़के के साथ भाग गई है |

प्रश्न – लड़कियों के कहने पर अपने भरोसा किया ? क्या अपने इस बात की छानबीन की कि क्या वह भाग गई है या उसे भगाया गया है ?

उत्तर- हमें इस बात का अंदाजा था पर हम चुप रहे | हल ही में शादी से लौटे थे | रिश्तेदार क्या कहेंगे इस डर से शांत थे | अब पुलिस में हम जाने वाले है |

मैं इन अभिभावकों से उनके घर में ही मिलने गई | एक खानदानी परिवार माँ, पिता, दादी सबने एकदम बोलना शुरू किया | पिताजी ने कुछ महत्वपूर्ण बातें इस दौरान बताईं | इस घर की लडकी जब मुस्लिम लड़के के साथ भाग गई तो तो उन्होने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई | उस समय लड़की नाबालिग थी, उसे तुरंत ढूंढ कर अभिभावकों के सुपुर्द कर दिया गया | लड़के को सजा हो एसा बंदोवस्त किया गया | पर घर का वातावरण बिगड़ता ही चला गया | उसे समय लिया हुआ यह साक्षात्कार –

प्रश्न – आप की लड़की जब भाग गई थी तब वाह नाबालिग थी, अब वाह वापिस आ गई है उस लड़के को भी सजा हो गई है फिर भी आप कह रहे है कि हालत बिगड़े हुए है यह कैसे ?

उत्तर- और लव्ह जिहाद के केस में जो होता है वही हमारी लड़की साथ हुआ | कालिज में पढ़ते समय वह एक स्कूटर मकेनिक से प्रेम कर बैठी और बिना सोचे समझे उसके साथ भाग गई | जब हमें कुछ अंदाजा आ रहा था तब मैंने खुद उन लोगों को समझाने की कोशिश की | लड़का भी लड़की का पीछा छोडने के लिए राजी हो गया | लड़का अपने माता-पिता की कोई जानकारी नहीं दे रहा था | उन दोनों की छोटी उम्र इन सब तथ्यों को लेकर मैंने उन्हें इस हद तक समझने कि कोशिश की | तब उन्होने हमारे सामने एसी तस्वीर खड़ी कर दी कि जैसे वो एक दूसरे से अलग हो गए | वास्तव में हालत हमारे काबू से बाहर जा चुके थे | लड़की के गायब होने पर मैंने शिकायत दर्ज की, वह घर वापस तो आ गई पर धीरे-धीरे हमें पता चला कि वह नशीले पदार्थों की आदी हो चुकी है और उसका कौमार्य भी लूट लिया गया था |

प्रश्न – फिर आपने कौन सी कार्यवाही की ? क्या पुनः पुलिस में गए ?

उत्तर- हम एक बड़े से चक्रब्यूह में फस गए हैं | जब हमारी लड़की पहली बार भागी तब वह नाबालिग थी | इसी कारण उस लडके के विरोध में कार्यवाही करना हमारे लिए संभव हो पाया था | अब वह बालिग बन चुकी है | उसे उसी लड़के के साथ विवाह करने की इच्छा है और इसी को लेकर बहुत बार घर से भाग चुकी है | जितनी बार वह घर से भागी है उतनी बार हम उसे वापिस लाये है | अब आपको क्या बताएं ? लड़की बालिग होने के कारण अब कानून भी हमारी कोई मदद नहीं कर सकता | जब वह नॉर्मल होती है तो हमारी बात मान लेती है और उसे वह मुस्लिम युवक बिलकुल अच्छा नहीं लगता एसा भी बताती है | पर जब नशे की जरूरत होती है तब हिंस बन जाती है। उसे संभालना कठिन हो जाता है | अभी उसे मानसोपचार विशेषज्ञों से समुपदेशन शुरू हुआ है |

प्रश्न – किसी मुस्लिम संगठन पर आपको संदेह है ? आपकी लड़की के और दोस्त किस प्रकार के है ?

उत्तर- एसे संगठन के बारे में तो नहीं पता | और दोस्तों के बारे में सारे ही एसे है जैसे सारी पीढ़ी है | उनका वर्ताव व रहन-सहन सब वैसा ही है | लेकिन उस मुस्लिम लड़के के साथ भागने से पहले हमारी लड़की नशा नहीं करती थी मैं ये विसवास के साथ कह सकता हूँ | हमारी लड़की पर काबू पाने के लिए उसे नशीले पदार्थों का आदी बनाया गया |

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अभिभावकों के साक्षात्कार के जरिये जो महत्वपूर्ण बात सामने आयीं उनका सारांश इस प्रकार है-

  1. अपनी लड़कियों के प्रेम सम्बन्धों की जानकारी अभिभावकों को थी पर वह इस हद तक गए होंगे इस बारे में वे अंजान थे |
  2. लड़कियां घर में वे सारी भेंटवस्तुएँ लाती थीं यह बात अनेक अभिभावकों को आपत्तिजनक जरूर लगी, पर अनेकों को इसमें कोई विशेष बात नहीं लगी, किसी ने इस बात की ओर जान बूझकर ध्यान नहीं दिया | कुछ ने सोचा की एसी नासमझ से उम्र में लड़कियों पर अविश्वास कैसे दिखाएँ | अतः उन्होने कभी भी उपहार के बारे में या उनके दोस्तों के बारे में ज्यादा पूछताछ नहीं की |
  3. लड़की के इस वार्ताव के लिए अपने आप को दोषी मनाने वाले अभिभावक भी थे  परन्तु अनेकों ने इसे ये लड़की का नसीब है एसे ही माना था |
  4. पुलिस में शिकायत करने की अपेक्षा लोगों ने अन्य पर्याय अपनाए जैसे स्वयं फोन करना, रिश्तेदार, दोस्त, कालिज, क्लासेज इत्यादि जगहों पर पूछताछ करना | ये सब करने के बाद ही वे पुलिस के पास शिकायत लिखवाने जाते थे |
  5. पुलिस रिश्तेदार, सामाजिक, कार्यकर्ताओं की मदद से भले ही लड़की वापिस आ गई हो या लड़के को छोड़ने को राजी हो गई हो फिर भी यह परिवार किसी अनामिक ड़र का सामना करते दिखाई देते है |
  6. लड़की को जिस कल्पनातीत, भयानक अवस्थाओं से गुजरना पड़ा उसका साधारण वर्णन अभिभावकों ने अवश्य किया पर अभिभावकों की बीती बातें भुला देने की मानसिकता अधिक दिखाई पड़ी |

अभिभावकों की इन प्रतिक्रियाओं के पीछे छिपा कारण समझना भी जरूरी है “जो भुगते वही जाने” इस कथन के समान उन अभिभावकों की मानसिकता, थी अभिभावक और लड़कीयों के साक्षात्कार से जो घटनाक्रम सामने आए उसमें विशेष अंतर नहीं था फिर उस घटना क्रम के वर्णन में तथा चिंता के स्तर में विशेष अंतर नहीं था | लड़की कहाँ है यह जानने के बाद भी पुलिस को बताया जाय या नहीं ? अपनी बेटी के अश्लील फोटो देखकर उस युवक के विरोध में द्रढ़तापूर्वक निर्णय लेना होगा कि नहीं ? अगर लड़की नाबालिग है तो उस युवक के विरोध में केस जीतने की संभावना बढ़ जाती है | अगर लड़की 18 साल या उससे अधिक है तो क्या किया जाय ? घर वापिस लौटी लड़की अनेक बार गर्भवती होती है तब खनदान की इज्जत का ख्याल करते हुए कौन से कदम उठाए जाएँ | एक ही समय में पुलिस, वकील अड़ोस-पड़ोस, रिश्तेदार और मुस्लिम समाज इन सबका सामना अभिभावक को करना पड़ता है | केस जीतने पर भी लड़की के पुनर्वसन का प्रश्न उनके सामने होता है सारांश में, अभिभावकों की दशा अत्यंत दयनीय होती है | सामान्य अभिभावकों की अपेक्षा जो अभिभावक आगे आकर अपबीती बता रहे थे ताकि उनकी लड़की की तरह अन्य लड़कियों का नुकसान हो और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत करने पर कुछ अन्य बातें सामने आई | इन बातों की सच्चाई ढूंढ पाना भले ही असंभव है पर ये बातें मुस्लिम युवकों के व्यूह रचना की ओर संकेत करती है | जैसे-

  1. मुस्लिम युवक को एक से ज्यादा चार औरतें रखने का अधिकार है | पुरूष-स्त्री का अनुपात एक भी रखा जाय तो मुस्लिम लड़कियां जैसे-तैसे पूरी पड़ेंगी | और अगर ज्यादा शादियाँ करनी हों और अपनी संख्या बढानी हो तो अन्य धर्म की लड़कियों से संबंध रखने होंगे, ऐसे मस्जिद से बताया जाता है |
  2. “पहले लश्कर ए तैयबा” से युवकों को लव्ह जिहादी बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता था पर अब ये ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन पर सौपी गई है |
  3. “लव्ह जिहाद के काम के लिए खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में पैसा आता है | लड़की को पटाने के लिए पैसे लुटाए जाते है और अगर उसमें कामयाबी मिले तो उन युवकों को बक्षिशी दी जाती है | जैसे सिख लड़की के लिए साढ़े सात लाख, लड़की ब्राह्मण हो तो साढ़े चार लाख, अन्य जाति की लड़कियों के लिए ढाई लाख दिये जाते हैं | ”
  4. “मुस्लिम युवकों में हिन्दू युवकों की अपेक्षा लैंगिक भावनाओं का उद्दीपन अधिक होता है | कल्हई की पतेली में खाना पकाना, यूनानी औषधियों का सेवन आदि बातें भी वहाँ की जाती है | ”
  5. “जब ये लड़कियां नहीं मिलती और पता चलता है कि वे राजस्थान या हैदराबाद गई है तब यह बात तो तय होती है कि उनको अखती देशों में जाकर बेचा गया है या देह बिक्री के काम में लगा दिया गया है | ऐसी जगहों पर गई हुई युवतियाँ फिर कभी भी दिखती नहीं हैं |”
  6. “अरबी देशों में यहाँ की लड़कियों की बड़ी मांग होती है क्योंकि यहाँ की लड़कियां यूरोपियन और अमेरिकन की भांति ठंडी नहीं होती और न ही अफ्रीकन की तरह आक्रामक होती है अपितु वे बुद्धिमान और समतोल रखने वाली होती हैं |”
  7. “मुस्लिम युवक लड़ाकू जाति की लड़कियों के पास जाने की हिम्मत नहीं करते |”
    • वशीकरण तंत्र

उपरोक्त कथन की अपेक्षा जो विषय यहाँ अपनी तीव्रता अधिक दिखाता है, वह है वशीकरण तंत्र (काला जादू)| लगभग सभी अभिभावकों ने और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बताया कि लड़कियों को प्यार के जाल में फसाने के लिए और उन्हें भागने में काला जादू और वशीकरन तंत्र का उपयोग सौ प्रतिशत किया जाता है | इसी काले जादू से अच्छ- अच्छी लड़कियां अपने-अपने होशो हवास खो देती है और उन्हें पता भी नहीं चलता कि उनके साथ क्या हुआ है |

जितने भी साक्षात्कार इस दौरान लिए गए उनसे एक बात स्पष्ट हो जाती है कि भले ही लड़कियों को मुस्लिम जाल में फँसाने पर भय उत्पन्न करने वाले अंधकारमय भविष्य का एहसास होता है फिर भी उनके मन में मुस्लिम युवकों के प्रति आकर्षण कायम रहता है | सबने एक ही बात बताई कि जब लड़की को वापिस लाया जाता है तब वह आक्रामक होती है और अपने माता-पिता को पहिचानने से इंकार करती है |

“तू किसके साथ गई थी? वहाँ क्या हुआ था ?” ये बताने के लिए उत्सुक नहीं होती हर कीमत पर उसे लड़के के पास लौटना होता है | ऐसा क्यों होता है ? एसा प्रश्न सबके मन में उठता है | एसे समय में जो जानकारी प्राप्त होती है उसके आधार पर यह देखा गया है कि लड़कियों के शरीर पर कही न कहीं ताबीज बंधा होता है | कभी गले में कभी अंगूठी में, कभी तो पायल में भी अनकलनीय मंत्र या बभूत मिलती है | उस वस्तु को तोड़ने पर या जलाने पर लड़की की आक्रामकता थोड़ी कम हो जाती है और वह कुछ हद तक अपने अभिभावकों को पहिचानने लगती है | और अन्य उपायों के बाद वह उस पर बीती सारी बातें बताने योग्य हो जाती है | लेकिन तब तक छोटी सी नाबालिग लड़की भी पुलिस के झटको से नहीं डरती |

जब मैं इन युवतियों से बातचीत कर रही थी तब भी उन्होने यही बात कही कि हमें उनके साथ नहीं जाना था फिर भी न जाने कैसे चली गई और न ही उसके साथ कोई संबंध रखने थे पर ये सब कैसे हुआ , यह समझ नहीं आया | अनेक युवतियों ने यह भी दावा किया गया कि उन्हें खाने या पीने की चीजों में कुछ मिलाकर दिया गया था | एक युवती ने जानकारी देते हुए कहा था कि जब मुस्लिम युवकों को दूसरों को वश में करने के लिए उपयोग में लाया जाने वाला जल दिया जाता है वह पानी रोज़मर्रा के पानी में मिलाकर दिया जाय तो वह व्यक्ति खुद के नियंत्रण में नहीं रहता और जो दूसरा बताता है वाही सुनता है | एक लड़की ने बताया कि उस पर धूलजटी का प्रयोग किया गया था| यह ऐसी जड़ी बूटी है जिसे लांघने से वह व्यक्ति पूर्ण रूप से दूसरे व्यक्ति के कब्जे में चला जाता है |

काले जादू के बारे में अभिभावक, सार्वजनिक कार्यकर्ता, इतना ही नहीं वकील, पुलिस वालों ने अपने अनुभव बताते हुए कहा –

  1. “जब हम रीना को वापिस लाये जब वह काफी हिंसक बन चुकी थी | उसे ठंडे पानी से स्नान कराया, शरीर पर बाँधे गए ताबीज, चेन आदि सबकुछ तोड़कर जला डाले तब जाकर वह थोड़ी शांत हुई, अपने माँ बाप को पहिचानने लगी है |”
  2. “यह सब काले जादू के कारण ही हुआ है | हमारी वंदना ऐसी लड़की नहीं है | पुलिस ने धमकाया | भाइयों ने पागलों की तरह पीटा लेकिन वह फिर से भागने के लिए तैयार है |”
  3. लड़कियों को अपने कब्जे में करने के लिए उन पर जादू टोना तो किया जाता ही है साथ ही नशीले पदार्थों की आदत डाली जाती है | संध्या बहुत बार शांत होकर हमारी बात सुनती थी लेकिन कभी-कभी उस पर पागलपन सवार हो जाता था और इसी अवस्था में वह अपने घर से नौ बार और हमारे घर से तीन बार भाग चुकी है | हम उसे कहाँ-कहाँ से ढूंढ कर लाये हैं | यह तो बताया भी नहीं जा सकता | यह विश्वास तो हो गया कि वह नशा तो करती है |

सोलापुर की एक महिला वकील ने इस प्रकार के अनेक केसों को सुलझाया है | उन्होंने कहा कि “ये लडकीयां काफी अतर्क्य बातें करती है” ये अपनी भाषा तक भूल जाती हैं | खास मुस्लिम लहजे में ये बातें करती है | किसी लड्डू में सौ सुइयां चुभोना या अपने घर का सोना और गहने बेच कर इन्होने क्या किया ये बताने की स्थिति में न होना, एसी अनेक बातें लव्ह जिहाद में अटकी लड़कियां करते हैं | इन सब बातों के लिए वशीकरण का उपयोग किया जाता है, यह मैं पूर्ण विश्वास के साथ कह सकता हूँ |

‘मुस्लिम समाज में बहुतों को काली जादू आती है | इसका उपयोग वे लोग आपस में भी करते है | काली जादू और वशीकरन की शिक्षा इन युवकों को भी दी जाती है और इसी तंत्र के सहारे युवतियों को फांसा जाता है |’

उपरोक्त सभी बातें दिमाग चकराने वाली है यही बातें सभी ओर से सुनने को मिलते है | हर एक के बोलने में काले जादू का उल्लेख अनिवार्यता से आता है | कुछ अभिभावकों को इसका अनुभव आया और उन्होंने कुछ उपाय कर के देखे और इन्ही उपायों के बदोलत उन्हें अपनी लड़की वापिस मिली है, ऐसा उनका दावा है | बहुत लोगों ने इसकी पद्धतियाँ तथा विधियाँ भी बताईं –

    1. “नारियल में पाँच महाभूतों के तत्व डालना अर्थात मिट्टी, जल आदि | यह नारियल युवती पर 21 बार और बाद में हनुमान जी की मूर्ति पर 21 बार घूमाकर वारना चाहिये तथा फिर इसकी अग्नि में आहूति देनी चाहिए उस अग्नि कुंड की राख उस लड़की को लगानी चाहिए | बाद में लड़की को ठंडे पानी से नहलाना चाहिए | एसा करने से कितनी भी भयानक बाधा क्यों न हो उतर जाती है, वह नष्ट हो जाती है और लड़की अपने माता-पिता को पहिचानने लगती है |”
    2. “जब लड़की वापिस आ जाय तब उसके शरीर पर बंधे ताबीज, धागे, गंडे आदि तोड़कर आग में जला देने चाहिये | मुट्ठी भर नमक पानी में डालकर उस पानी से उसे स्नान कराया जाना चाहिए | उस समय तक जो कपड़े वह पहनती थी वह दिखने भी नहीं चाहिए | ऐसा करने से हमें हमारी बेटी वापिस मिल गई और हमें ऐसा परिणाम मिला है जो मारपीट कर भी प्राप्त नहीं किया जा सकता |”
    3. “दुर्गा शप्तशदी का एक मंत्र और ‘त्र्यंबकम यजमाहे’ ये महा मृत्युंजय जप के अनुष्ठान के बाद बाधित युवती मुक्त हो जाती है और इसी के द्वारा उसका मुस्लिम युवक के प्रति आकर्षण कम हो जाता है |”
    4. “यह बात समझते ही कि लड़की किसी मुस्लिम लड़के के संपर्क में आई है उसे दाहिने हाथ से बाएँ कान पकड़ कर और बाएँ हहथ से दाहिना कान पकड़ कर 25 उठक-बैठक लगवानी चाहिए | साथ ही कुंजलिका स्त्रोत, भैरव स्त्रोत या हनुमान चालीसा का रोज पाठ करवाने से लड़की को किसी बात की बाधा नहीं होती |”
  • उपरोक्त विधानों की सत्यता

इन विधानों को अशिद्ध करना लगभग असंभव है, बुद्धि से ऊपर की बात है | परंतु जितनी भी लड़कियां मुझे इस संदर्भ में मिली, उन पर काबू पाने के लिए इस जादू टोने का उपयोग किया गया होगा एसा विश्वास लगता है | बहुत कम लोगों ने इस आकर्षण के पीछे छिपी बात को अलग नजरिए से देखने की कोशिश की है | लौटी हुई लड़कियों के पास से ताबीज मिलता है यह बात तो है पर यह जरूरी नहीं कि उसके पीछे कोई ऐसा कारण हो | सांस्कृतिक प्रदूषण के कारण लैंगिक संतुलन भी बिगड़ रहा है | जितना असंतुलन अत्यधिक बिगड़ जाता है वे ही युवक और युवतियाँ ऐसे जाल में जल्द फँसते हैं | अनिवार आकर्षण भी इसी के कारण उत्पन्न होता है | इसके पीछे उम्र जिस प्रकार महत्वपूर्ण है उसी प्रकार अड़ोस-पड़ोस का वातावरण भी महत्वपूर्ण है | एक अभ्यासक के मतानुसार ,”यह स्टोकहोल्ड सिंड्रोम का एक प्रकार है | इस मनोविकार से ग्रसित व्यक्ति जो काफी अत्याचार सहन कर चुका है | उसे अत्याचार करने वाले के प्रति आकर्षण हो जाता है | काफी शुद्ध कथाओं में यह देखने को मिलता है |”

जो लड़कियां अपनी जबान से वहाँ के भयंकारी वातावरण का वर्णन करती है, उन्हीं लड़कियों को वहाँ जाने की इच्छा क्यो होती है ? यह अनोखी बात अनुसंधान का विषय बन चुकी है इसी बात के जड़ तक पहुँचने के लिए मनसोपचार तज्ञ, मनोविकार तज्ञ और मन्त्रीको से हमने मुलाक़ात की |

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    1. मानस तज्ञों का विचार
  1. एक प्रसिद्ध महिला मनोविकार तज्ञ ने युवतियों के इस आकर्षण का विश्लेषण करते हुए बताया है, ” हमारे क्षेत्र में कई काले जादू को स्वीकार नहीं करने वाले है, लेकिन मेरे अनुभवों के बाद मैं विस्वास के साथ कह सकती हूँ कि यह जादू टोना ही है | किसी केस में साधारणतः दो तीन सिटिंग्स के बाद ही उस केस की परतें खुलने लगती हैं और हमारे अलग-अलग प्रयोग शुरू हो जाते हैं | साधारणतः यह केस तीसरी सिटिंग्स के बाद यह केस हमारे क्षेत्र में आती हैं या नहीं ये हमें पता चलता हैं | जो केस ब्लैक मेजिक के प्रभाव में रहती है उन पर औषधोपचार, समुपदेशन या संमोहन उपचार किसी का भी परिणाम नहीं होता | लड़कियों की उम्र उनके अनुभव आदि के बारे में सोचें तो मुझे यह लैंगिग असंतुलन का परिणाम तो नहीं लगता है | जिस प्रकार हम भगवान पर विश्वास करते है उसी प्रकार कम से कम तो इस तांत्रिक विद्या या जादू टोना पर विश्वास रखती हूँ | हाल ही मेरे पास आने वाली दस केसेस में से कम से कम तीन जादू टोने जैसे प्रकारों से संबन्धित होते है | बदलती हुई जीवन शैली के कारण असमाधान काफी बढ़ चुका है, द्वेष जलन जैसी भावनाएँ काफी बढ़ चुकी है इस कारण काले जादू जैसी बातों को बढ़ावा मिलता है | जब मेरे समझ में आता है कि यह बात दवाइयों, समुपदेशन द्वारा संभलने वाली नहीं है तब निश्चित ही उन्हें मंत्रोपचार, तंत्रोपचार की सलाह देती हूँ | और उस मार्ग का अनुसरण करते ही केसेस में सुधार होता है, ऐसा मेरा अनुभव है | वैसे तो मेरी पहली सलाह विज्ञान का आधार लेने की होती है पर काले जादू के प्रयोग भी हो रहे है यह ध्यान में रखते हुए उस व्यक्ति को ठीक करने हेतु हमें इन बातों का भी आधार लेना चाहिए |”
  2. पुणे के एक मनोविकार तज्ञ से मिलने पर उन्होने लड़कियों के इस आकर्षण का मनोकायिक विश्लेषण किया | उन्होने कहा,” जिस उम्र में लड़कियां भाग जाती है या उन्हें वापिस लाया जाता है फिर भी उनके मन में उस विशिष्ट लड़के के बारे में आकर्षण वैसे ही कायम रहता है | इसके पीछे की परिस्थिति को समझना चाहिए | जवान होते समय हर व्यक्ति में शारीरिक, मानसिक, भावनिक परिवर्तन होते रहते है | भिन्न लिंगी आकर्षण बढ़ जाता है | इस समय जरूरत होती है ‘समायोजन’ की, अगर ऐसा न हो पाया तो इस आकर्षण को शरीर और मन प्रतिसाद देते है | इस उम्र में आकर्षण तो निर्माण होता है पर उसमें परिपक्वता  नहीं होती है | परिणामों के बारे में चिंता करने वाली यह उम्र नहीं होती | हम कितना भी समझाएँ कि वह उसके लिए अच्छा नहीं है, इससे तुम्हारा जीवन अंधकारमय हो सकता है वहाँ रहना खतरे से खाली नहीं है, हमारी इन बातों का इस उम्र के व्यक्ति द्वारा माना जाना असंभव होता है |”

“भिन्न लिंगी आकर्षण में कौन किसका हीरो बने या कौन किसको अच्छा लगे इसके लिए कोई नियम नहीं है | बहुत पढी लिखी लड़की को अमीर खान जैसा लड़का पागल कर सकता है और इसमें कुछ भी अस्वाभाविक नहीं है | बड़ों के व्यक्ति मूल्यांकन के परिणाम इस उम्र के लड़कियों के लिए अमान्य होते है | तीसरे महत्वपूर्ण बात यह है कि युवावस्था में कदम रखने वाले युवकों की सारी ज़िम्मेदारी अभिभावक ही उठाते हैं | इस उम्र के बच्चों के निर्णय, उनके प्रत्येक कृति उसके परिणाम सब कुछ अभिभावकों के परिणाम पर निर्भर होता है | सब कुछ ठीक-ठाक होने के बाबजूद भी बहुत से बच्चे बड़े होने पर अपने अभिभावकों को दोष देते हैं और ये दावा करते है कि उनके कारण ही सारा नुकसान हुआ है | सारे निर्णय अभिभावकों द्वारा लिया जाना विद्रोही मन को नहीं जंचता है | इस संघर्ष के समय जो भी प्रतिमा इन लड़के-लड़कियों के मन में निर्माण होती है वही उन बच्चों को अपना आधार लगने लगता है, आस-पास के सारे लोग इस समय निरूपयोगी हो जाते हैं | अनेकों बार ऐसा भी होता है सब लोगों की दृष्टि से जो बात सुयोग्य होती है वही इन लोगों के लिए सबसे अधिक अयोग्य हो सकती है | हमारे पास ऐसी अनेक केसेस आती हैं | अत्यंत अमीर घर की लड़की जिसके पास सारी सुख सुविधाएं हैं उसे कोई ट्रक ड्राइवर ही पसंद क्यों आता है ? उसके साथ गरीबी में जीना शायद उसके लिए ज्यादा सुखकर होता है शायद इसलिए |”

“यौवन में प्रवेश करने वाले बच्चों के लिए अभिभावकों की यह भूमिका अधिक योग्य होती है जब वे बच्चों को अपने निर्णय स्वयं लेने देते हैं और अगर जरूरत हो तभी अपना सहारा देते हैं | बड़ों को जिन बातों का आकलन अनुभवों के कारण होता है | वह आकलन अनुभवहीन युवकों को पसंद नहीं आता | लव्ह जिहाद कोई स्वतंत्र विषय नहीं है अपितु किसी विशेष आयुवर्ग में तैयार होने वाली भाव-भावनाओं का परिणाम हैं मुझे एसा लगता है |”

“ क्या काला जादू का उपयोग होता है ? इस विषय में मेरा कथन कुछ अलग है कुछ व्यक्तित्व मूलतः सूचनाशील होते हैं | स्वयं सूचनाशील मनुष्य ताबीज या बभूत एसे किसी भी वस्तु के अधीन जा सकते हैं | जो व्यक्ति हमारे हाथ में ताबीज बांधता है उसकी सारी बातें हमें सुनानी होगी एसी सूचना वे अपने आपको दे देते हैं और स्वबुद्धि , स्वभावनाएँ का उपयोग किए बिना उन लोगों की आज्ञा मनाने के लिए तत्पर हो जाते हैं |जब ताबीज या उस जैसी कोई दूसरी वस्तू तोडी जाती है तब इन व्यक्यियों को बड़ी तकलीफ होती है| लेकिन उसी समय बंधन टूटने का परिणाम भी उन पर होता है| स्वयं सूचना द्वारा उन्होने पहले बंधन को नकारा होता है| इसी पड़ाव पर जब उपचार शुरू होते है तब वे स्वयं सूचना शील व्यक्ति हमें नॉर्मल लगाने लगती है | परंतु वास्तव में इन लोगों ने पहला बंधन तोड़ा होता है और नए बंधन का स्वीकार किया होता है | यह प्रभाव जादूटोना या उपचारों का नहीं होता अपितु कमजोर व्यक्तित्व या स्वयंसूचनाशील व्यक्ति का व्यक्तित्व इस बात के लिए जिम्मेदार होता है जो मजबूत मनोवृति के होते है उनपर इन बातों में से किसी बात का कोई भी प्रभाव नहीं होता है और यही सच होता है |”

“मेरे अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब हम इसका पता कर रहे हैं कि लड़की कहाँ भागी है, उसी समय हमें इस बात की छानबीन करना आवश्यक है कि वह कहाँ से भागी है | जिस वातावरण में लैंगिक बदलाब के बारे में सुयोग्य शिक्षा, अच्छे मूल्यों का लेन-देन और निरोगी पारिवारिक वातावरण होता है | वहाँ इस प्रकार की घटना ज़्यादातर नहीं घटती हैं | अर्थात इस आयुवर्ग के बच्चों को आपसी विश्वास से भरे वातावरण की आवश्यकता होती है, वह वातावरण कैसे मिले इस बात का विचार मुख्य रूप से होना जरूरी है |”

  1. इस विषय पर आयुर्वेद क्या कहता है यह एमडी आयुर्वेद पढे एक वैद्य ने अपनी बात बताई, उन्होने कहा,” इस विषय के बारे सोचते समय बर्तमान को ध्यान में रखकर सोचना जरूरी है | अनेक बातें यहाँ काम करती हैं | इन सभी बातों में युवा मन की मानसिकता महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है | ग्रामीण भाग में रहने वाले लड़के–लड़कियों को शहर का आकर्षण होता है | उसी प्रकार योवन की हिरोगिरि छोटी उम्र के लड़के-लड़कियों को आकर्षित करती है | दूसरी बात जिन बच्चों को पढ़ाई के लिए अभिभावकों से दूर रखा जाता है तब उन पर काफी बंधन डाले जाते हैं | जैसे सोच समझकर पैसे खर्च करना इत्यादि | घरों में रहने वाले बच्चों को अनेकों बार ‘ना’ सुनना पड़ता है | इन सभी बातों के कारण बच्चों का स्वभाव विद्रोही हो जाता है | घरवालों की बताई बात इन विद्रोही युवतियों को अच्छी नहीं लगती है | इसके पीछे तीसरा कारण है कि कुछ लोगों कि प्रवृत्ति मूलतः भड़कीली होती है | जो आसनी से किसी के भी चंगुल में फंस सकते है | चौथा कारण मेरे अनुसार सबसे महत्वपूर्ण है, आजकल की युवा पीढ़ी के सामने कोई लक्ष्य नहीं है | जीवन का निश्चित उद्देश्य नहीं है | इसी कारण बचपन खत्म कर जब ये यौवन की दहलीज पर होते है तब शरीर संबंध और तत्सम दुनिया उन्हें मोह लेती है | करियर के विषय में भी उनके पास कोई स्पष्ट योजना नहीं होती है | बहुत अंश तक खाली दिमाग के कारण सेक्स जैसे विषय उनकी मानसिक स्थिति को व्याप्त कर लेता है | सेक्स विषय की व्याप्ति कभी-कभी इतनी बढ़ जाती है कि उन्हें कुछ और नहीं सूझता |

“पाँचवाँ कारण है पित्त का प्रकोप | आयुर्वेद के अनुसार मनुष्य का निर्माण वात पित्त और कफ से हुआ है | स्वस्थ्य और बीमारियाँ इसी के संतोल पर निर्भर करती है, जब इबका संतुलन बिगड़ जाता है तब विकृति निर्माण होती है | पित्त में असंतुलन के कारण जिस प्रकार शारीरिक बीमारीयां होती हैं उसी प्रकार इसका प्रभाव असंतुलन पर भी पड़ता है | उसी का एक प्रकार है “प्रेम आवेग” ! एसी अलग पित्त की विकृती निर्माण होती है | इस समय हमें किसी को भावनिक दृष्टि से पास लाने की आवश्यकता महसूस होती है | यथार्थ में देखा जाय तो हमारा शरीर स्वयं इस विकृति को कम करने का प्रयत्न करता है | शुक्र धातु का गुण धर्म सौम्य है इसका प्रभाव जब बढ़ता है तब पित्त की तीक्ष्णता कम हो सकती है | और यही सौम्यता प्राप्त करने हेतु हमारा शरीर किसी को पास लाने की चेष्टा करता है और फिर धीरे-धीरे यही इसका स्वभाव बन जाता है | अर्थात भिन्न लिंगी आकर्षण यहाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है | खासकर शरीर में हुए बदलाव के कारण हमारे मन के भाव भी उद्दीप्त हो जाते है | इस भावनाओं के परिणामों के अनुसार ही हमारी प्रतिक्रियाएँ बदलती है | बहुत से लोगों को एसे समय में किसी और से बातें कर तसल्ली मिलती है | इस प्रकार के सौम्य प्रति क्रियाओं से लेकर इन शारीरिक परिवर्तनों के कारण तीव्र प्रतिक्रियाएँ भी निर्माण हो सकती हैं | अगर किसी बीमारी का समय पर इलाज न करवाया जाय और वह शरीर में कम मात्र में क्यों न मौजूद रहे उस समय भी इस प्रकार की बातों का तीव्रता से एहसास होता है | शरीर और मन का पोषण अगर ठीक से न हो रहा हो तब भी इस प्रकार की भावनिक प्रतिकृया ज़ोर मरने लगती है |”

“रक्त, रस, मांस, मेड, अस्थि, मज्जा, शुक्र ये सब जब निरोगी और संतुलित स्थिति में होते हैं | तब व्यक्ति की रोग प्रतीकार शक्ति भी अच्छी होती है | ऐसा व्यक्ति मानसिक दृष्टि से भी सशक्त होता है | परंतु अनेक युवक-युवतियों के सामने में उपरोक्त धातुओं के पुष्टि योग्य रूप से नहीं हो पाती और इसी से यों आकर्षण निर्माण होता है | असमाधान हर स्तर पर व्यक्त होना शुरू हो जाता है | अनेक बार क्योंकि उस लड़की का शरीर निरोगी नहीं होता उसके रजोप्रवृत्ति में भी विकृति निर्माण होना शुरू हो जाती है | ये लड़कियां ज़्यादातर भावनिक स्तर पर ही अपना जीवन बिताती हैं | अस्वस्थता, अस्थिरता, बात-बात पर रूआँसा होना, बार-बार दवाइयाँ और उपचार लेने की प्रवृत्ति, नैराश्य ऐसी लड़कियों में पायी जाने वाली बातें हैं | अतृप्ति असमाधान मानो इनका जन्म भर का साथी बन जाता है | इस प्रकार के भावनिक स्तर पर जब युवतियाँ होती है तब वे किसी की भी ओर आक्रष्ट हो सकती है |”

“अनेकों के जीवन में कभी स्थैर्य आता भी नहीं है | इन्हीं में कुछ आशावादी विचार करने लगते है | लेकिन यह आशावाद यथार्थ को लेकर होता है यह जरूरी नहीं है | जब में किसी से प्यार करूंगी तब सब ठीक हो जाएगा, मैं सब ठीक कर दूँगी, आज तक मेरा जीवन भयानक बीता है पर आने वाली जिंदगी मैं अच्छे तरीके से बिताऊँगी | इस प्रकार के विचारों की लहरों पर जब मन की तार झंकार उठती है तब इस प्रकार युवती किसी भी युवक की ओर झट से आकर्षित हो जाती है |”

“आगे आने वाली कठिनाइयों को टालने का सबसे अच्छा उपाय है बचपन से ही लड़कियों को शारीरिक और मानसिक पोषण देना | मांसबल में बढ़ोत्तरी के साथ मन के बल में भी वृद्धि होती है | बड़ी होती लड़कियों के लिए शतावरी कल्प जैसी औषधि गुणकारी सिद्ध होती है और विकृति का डर टाला जा सकता है | लव जिहाद में यही मानसिक विकृति काम करती है, एसा मेरा मानना है | अगर इन लड़कियों को मानसिक संतुष्टी देने वाला आहार दिया जाय तो इन्हें काफी फायदा हो सकता है | मीठा खाने से या मांस खाने से इस प्रकार की तृप्ति मिल सकती है | जब उत्तेजना बढ़ती है तब बात का प्रमाण भी बढ़ता है | इस समय प्रथ्वी तत्व के कारण अर्थात कम्फ़र्टेबल फूड देने पर मानसिक शांती और समाधान पाया जा सकता है | अगर यह समाधान मिलता रहा तो यह विक्रत लैंगिक आकर्षण भी कम होने में मददगार होता है | इस समय औषधि के रूप में शतावरी कल्प का होना आवश्यक है |

  1. जो खुद एलोपेथी की प्रक्टिस करती है और मंत्रोपचार की भए मदद लेतीं है ऐसी डाक्टर ने कहा “बहुत बार ऐसा होता है कि एलोपैथी की अपनी मर्यादा होती है, इसलिए अन्य तंत्रोपचार का आधार लेकर हमें मनोविकार और शारीरिक विकार दूर करने पड़ते है | अनेकों बार इन विषयों में “डर” सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है | कांटे से कांटा निकालना इस उक्ति का अनुसरण करते हुए पुराने जमाने के तांत्रिक भाय को निकालने के लिए “डर” नामक मन की शक्ति का उपयोग करते है | हमारी संरक्षक ग्रंथियों के कारण पलायन या आक्रमण ऐसी दो भिन्न प्रतिक्रियाएँ हमारा शरीर और मन प्रयोग में लाता है | साँप दिखते ही भागने का आदेश मस्तिष्क को दिया जाता है साथ ही संरक्षक ग्रंथी उसे लाठी उठाकर मरने का भी आदेश देती है | तुझे भूतबाधा हुई है, किसी ने तुझ पर जादू टोना किया है | मैं भूत उतार सकता हूँ | ऐसा कहकर वह उसके सामने रखी हुई धूनी में धूप या बभूत डालता है, शरीर पर राई फ़ैकता है, नजर उतरता है, धुआँ तैयार करता है, हा हा हू हू ऐसी दिल दहला देने वाली आवाज निकलता है और ऐसा करके वह बीमार को डरा देता है | दवाइयों की तरह बाबूत या धूप और राई में मस्तिष्क के जालों को दूर करने की शक्ति होती है |

“भूतबाधा या जादू टोना सत्य है या असत्य इस बौद्धिक वाद विवाद में हमें पड़ना ही नही है | लेकिन संबन्धित व्यक्ति पर जादू टोना किया गया है ऐसा उस व्यक्ति को और उसके सगे संबंधियों को भी होता है | विशिष्ट प्रकार का उपाय करने के बाद ही यह प्रभाव कम होगा ऐसा उनका विश्वास होता है | और यह भावना सच्ची होती है | लव जिहाद से संबन्धित केसेस में भी शायद यही बात महत्वपूर्ण होगी | अगर काला जादू या वाशीकरण इसकी बाधा हुई हो तो उस पर प्रभावी उपचार किए जाते है | यह उपाय उपचार मुख्यतः मन का भय दूर करने हेतु होते हैं | जो मन से मजबूत होते है उन पर किसी बाधा का कोई प्रभाव नहीं होता |”

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 6. कानूनी पहलू

 युवतियों या उनके अभिभावकों के साथ संवाद हो या कार्यकर्ताओं का अनुभव कथन हो या मुस्लिम युवक के जाल में फंसी युवती को छुड़वाते समय कानूनी पहलू और कानून महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है | और यह बात हर उदाहरणों द्वारा स्पष्ट होती है, जैसे अगर हिन्दू युवती 18 वर्ष की नहीं है अर्थात नाबालिग है और अगर उसे मतांतरण करना है तो अभिभावकों की अनुमति के बिना मतांतरण नहीं कर सकते | इसी कारणवश भले ही इस्लाम के अनुसार 18 वर्ष के कम आयु के युवती-युवकों का विवाह धर्मसंमत होता है फिर भी हिन्दू युवती का मुस्लिम युवक के साथ होने वाली शादी अवैध होती है, इस प्रकार के मुद्दे उठते हैं | इसी कारण कानून के अभ्यासकों के साथ चर्चा कर मैंने हिन्दू और मुस्लिम कानून का अंतर समझने की कोशिश की | सामान्य तौर पर जो वकील फॅमिली कोर्ट की केसेस संभालते है और अंतरधर्मीय विवाह के विषय भी जिन्हें पता है, एसे लोगों से कानून की जानकारी प्राप्त की | कुछ किताबें पढ़ीं, और उसमें से जो बातें सामने आयीं वे इस प्रकार है-

  1. हिंदू धर्म की लड़की/लड़का ने बालिग होने से पहले अपनी मर्जी से धर्म बदलना कानून के दृष्टी से अपराध होता है | उसी प्रकार धर्म बदलकर दूसरे धर्म में विवाह भी नहीं कर सकते | इस प्रकार का मतांतरण या विवाह होने पर अभिभावक इस संबंध में जबर्दस्ती या उसकी जैसी शिकायत कर सकते है |
  2. अठारह वर्ष के अंदर अर्थात नाबालिग का मतांतरण अवैध होता है | इसी कारण मतांतरण कर निकाह किया हो तो धर्मांतर ही अवैध होने के कारण यह अंतरधर्मीय विवाह भी अवैध माना जाता है | इस्लाम के अनुसार मतांतरण न करके किया हुआ विवाह अपने आप ही पूर्ण रूप से अधार्मिक ठहराया जाता है |
  3. दोनों मुस्लिम हों या हिन्दू तभी विवाह वैध माना जाता है | लेकिन श्पेशल मैरिज एक्ट के अनुसार किया गया अंतरधर्मीय विवाह जिस प्रकार हिंदुओं को मान्य होता है, वैसे इस प्रकार के विवाह को इस्लाम अनुमति नहीं देता |
  4. बालिग होने पर भी अगर किसी युवती ने मतांतरण का विरोध किया या अगर वह शिकायत दर्ज करती है कि उस पर मतांतरण की जबरदस्ती हुई है | इस परिस्थिति में भी वह विवाह अवैध होता है क्योंकि मतांतरण ही अवैध हो जाता है |
  5. हिन्दू विवाह के अनुसार अठारह वर्ष से पहले अगर किसी हिन्दू लड़की का किसी से विवाह हो जाने पर भी बालिग होने के बाद अगर उसे लगता है कि यह विवाह अयोग्य है तो वह इस विवाह से इंकार कर सकती है और कोर्ट से भी यह विवाह रद्द कारवा सकती है|
  6. युवक और युवती अगर 15 वर्षों के हैं तो उनके सम्मति से हुआ विवाह मुस्लिम समाज के युवक युवतियों के लिए वैध हो सकता है लेकिन हिंदुओं का व्यक्तिगत कानून संहिता बद्ध है और उन्हें इंडियन मेजॉरिटी एक्ट लागू होता है | इसलिए लड़की 18 वर्ष और लड़का 21 वर्ष का होने से पहले अगर उसकी शादी की गई तो वह कानून की दृष्टि में अपराध है एसे विवाह का पंजीयन नहीं हो सकता अर्थात अल्पवयीन अंतरधर्मीय विवाह भी अवैध होता है |
  7. कोई भी युवती जो 18 वर्ष से कम या अधिक होती है, अगर उस पर बलात्कार होता है (भारतीय दंड संहिता 375, 376) अगर किसी ने उसे धोखा दिया हो (भारतीय दंड संहिता 359) उसके मर्जी के बिना उसके अश्लील प्रसंगों का विचित्रीकरण करना, फोटो निकालना और उनके सहारे ब्लैकमेलिंग करने का प्रयत्न करना यह सारे विषय क्रिमिनल अपराधों के अंतर्गत आते है और इन अपराधों के लिए भारतीय नागरिक को चाहे वह किसी भी धर्म में क्यो न हो, सबको समान ही सजा सुनाई जाती है | भारत में सबके लिए समान क्रिमिनल कानून है |
  8. लड़की 18 वर्ष की होने पर अपने ऊपर हुए अत्याचारों के संबंध में केस दायर कर सकती है | यह केस नाबालिग लड़की भी कर सकती है लेकिन उस समय अभिभावकों द्वारा यह शिकायत की जा सकती है | लड़की अठारह साल पूर्ण होने पर भी अपहरण, अत्याचार, धोखा, बलात्कार आदि से संबंधित केस दायर कर सकती है, इसके लिए उसकी अनुमति होना अनिवार्य है | अगर कोई लड़की लापता है तो अड़ोस-पड़ोस वाले भी शिकायत दर्ज कारवा सकते हैं |
  9. हिन्दू विवाहित हिन्दू या पुरूष ने तलाक न लेते हुए अगर मतांतरण कर अगर दूसरा विवाह किया हो तो भारतीय दंडसंहिता 494 और 495 के अनुसार मतांतरण के बाबजूद भी दूसरा विवाह अवैध होता है |
    • श्पेशल मैरिज एक्ट
  1. स्वयं का धर्म, जाति इत्यादि वैसे ही रखकर या विशिष्ट परिस्थिति में स्त्री और पुरूष विशेष विवाह के कानून के अंतर्गत विवाह कर सकते हैं |
  2. दोनों एक या भिन्न धर्म के हो फिर भी एसे विवाह की अनुमति होती है इस प्रकार के विवाह में धार्मिक विधियों की आवश्यकता नहीं होती |
  3. इसमें कोर्ट मैरीज या रजिस्टर मैरिज नाम से एक महीना पहले आवेदन देना पड़ता है फिर रजिस्ट्रार के पास गवाहों के साथ जाकर स्वाक्षरी करके विवाह हो जाता है |
  4. इस एक्ट से होने वाले विवाह भी करार नहीं अपितु पवित्र बंधन में बंधन ही माना जाता है | यह संस्कार होने के कारण यह बंधन हमेशा के लिए होता है |
  5. तलाक न्यायालयीन प्रक्रिया के द्वारा लिया जा सकता है |
  6. इस विवाह द्वारा स्त्री और पुरूष दोनों को समान हक और अधिकार दिये गए है |
  • एक न्यायलयीन निर्णय

अपना दूसरा विवाह विधिसम्मत हो इसलिए कुछ विवाहित हिन्दू स्त्रीयां अपने पहले पति से तलाक लिए बिना मुस्लिम पुरूषों के साथ निकाह करती है | जैसा असम के विधायक रूमीनाथ ने किया था या कुछ हिन्दू विवाहित प्रेमी युगल में से एक या दोनों ही अपने पहले साथी को तलाक दिये वगैर इस्लाम को स्वीकार कर अपना दूसरा विवाह विधि सम्मत करवाने की चेष्टा करते हैं | इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय कुछ इस प्रकार है –

“ ज्ञानचन्द घोष का विवाह 10 मई 1984 को हुआ था | आगे 1992 में उन्होने दूसरी औरत से विवाह करने का निर्णय लिया इसलिए दोनों ने इस्लाम स्वीकार किया | प्रथम पत्नी यह बात न्यायालय में ले गई | सब कुछ सर्वोच्च न्यायालय के सामने आया | सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सगीर अहमद और न्यायमूर्ति सेठी ने निर्णय देते हुए कहा कि मतांतरण के कारण हिन्दू विवाह खत्म नहीं होता | जब तक हिन्दू विवाह का अस्तित्व है, तब तक इस्लाम का स्वीकार करके दूसरा विवाह नहीं किया जा सकता है | कानून की धारा 494 और 495 के अनुसार यह अपराध माना जाएगा |”

इस निर्णय के बाद अनेक निर्णय इसी पद्धति से दिये गए थे |

  • विवाह विषयक हिन्दू मुस्लिम कानून में अंतर
विवाह विषयक हिन्दू कानून विवाह विषयक मुस्लिम कानून
1. हिन्दू धर्म संहिता के अनुसार हिन्दू विवाह संबंधी कानून भारतीय संविधान में लिखित रूप में हैं| 1. मुस्लिम विवाह विषयक कानून कुरान से लिया गया है|
2. विवाह हिंदुओं के लिए पवित्र संबंध है, यह एक संस्कार है, करार या इकरार नहीं | 2. विवाह आपस के लिए इकरारनामा है जो स्थायी हो सकता है या कुछ काल के लिए भी हो सकता है, इसके लिए किसी  धार्मिक संस्कार या परम्पराओं की आवश्यकता नहीं होती |
3. यह विवाह हिन्दू धर्म के किसी भी व्यक्ति के लिए फिर वह किसी भी जाति का क्यों न हो लागू होता है | 3. मुस्लिम विवाह में दोनों पक्ष मुस्लिम होना अनिवार्य है | कुछ मामलों में लड़की धर्मग्रंथ मनाने वाले जैसे यहूदी या ईसाई धर्म की हो सकती है | लेकिन मुस्लिम लड़की किसी गैर मुस्लिम से शादी नहीं कर सकती |
4. हिंदुओं में जो विवाह ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ के तहत किया जाता है , उन्हें मान्यता प्राप्त होती है | मात्र एक रहने से या संतति के जन्म के कारण शादी को मान्यता प्राप्त नहीं होती अपितु जो विवाह विधिपूर्वक संपादित होती है, जिसमें रीति और परम्पराओं के आधार पर संस्कार किए जाते हैं, फिर चाहे वे किसी भी पक्ष के संस्कार क्यों न हों | उसी विवाह को मान्यता प्राप्त होती है | 4. स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत किया गया विवाह मान्यता प्राप्त नहीं है | एक हिन्दू लड़की को विवाह से पहले इस्लाम धर्म का स्वीकार करना होगा तभी वह विवाह ग्राह्य माना जाता है |
5. मूल हिन्दू विवाह अधिनियम (1955) के अनुसार विवाह के लिए जो आयु निश्चित की गई थी वह इस प्रकार थी- लड़कों के लिए 18 वर्ष, लड़कियों के लिए 15 वर्ष | लेकिन विवाह आयु नियंत्रण (संशोधित) अधिनियम 1978 द्वारा इस आयु की मर्यादा को बाद में बढ़ाकर लड़कों के लिए 21 वर्ष तथा लड़कियों के लिए 18 वर्ष कर दिया गया 5. दोनों की आयु 15 साल होनी चाहिए या फिर अभिभावकों की रजामंदी के साथ दोनों पक्ष अर्थात लड़की तथा लड़का शादी के इकरारनामे में प्रवेश कर सकते है| 15 साल की उम्र के बाद आपसी रजामंदी की आवश्यकता होती है |
6. हिन्दू धर्म के अंतर्गत आने वाले सभी संप्रदाय तथा पंथों के लिए जिसमें सिख, जैन और बौद्ध भी शामिल है, यह कानून लागू होता है | आनंद विवाह विषयक कानून के साथ अब सिखों के पास भी विवाहविषयक स्वयं का कानून है| 6. शिया और सुन्नी पंथ के मुस्लिमों के विवाह विषयक कानून में थोड़ा सा अंतर है | फिर दोनों के मूलभूत तत्व एक समान है |
7. हिन्दू विवाह दोनों पक्षों में से (अगर वे अलग पंथ के है) किसी एक पक्ष के संस्कार,रीतियों या परम्पराओं के आधार की जाती है जैसे सप्तपदी कन्यादान आदि | यह विवाह विधिपूर्वक संपादित होता है | 7. काजी या मुल्ला की उपस्थिति अनिवार्य नहीं है | सिर्फ दो मुस्लिम पुरूष या एक मुस्लिम पुरूष और दो मुस्लिम प्रोढ महिलाओं की उपस्थिति में प्रस्ताव पढ़ा जाता है, और उनकी उपस्थिति में ही यह अगर यह स्वीकार किया जाता है तो यह मुस्लिमों में कानूनी विवाह माना जाता है |
8. इस प्रकार का विवाह करने वाले लोगों को अपने विवाह का विवरण विवाह के पंजीयन के लिए प्रस्तुत  करना पड़ता है | जो उनके विवाह का सबूत बन जाता है | 8. विवाह के पंजीयन की कोई आवश्यकता नहीं है | क्योकि इस्लाम में एसा कानून नहीं है जिसके आधार पर पंजीयन जरूरी है | हर मस्जिद में एक रजिस्टर होता है जिसमें विवाह से संबन्धित बातों को लिखा जाता है तथा पक्षों तथा गवाहों द्वारा हस्ताक्षर किया जाता है |
9. बहुपत्नीय की अनुमति नहीं है हिन्दू विवाह दो हिन्दू धर्मियों में बिधि द्वारा संपादित हो सकता है| अगर दोनों में से विवाह के समय तलाक शुदा हो तभी |दूसरे विवाह से पहले तलाक होना जरूरी है, मौखिक नहीं लिखित ही | 9. मुस्लिम कानून में मर्द को एक साथ चार औरतों से विवाह करने की अनुमति है | अगर पाँचवी बार विवाह करना चाहता हो तो उसे चार में से किसी एक को तलाक देना होगा |
10. हिन्दू धर्म में विवाह की शपथ है जिसमें दो लोग साथ रहकर परिवार के नीति मूल्यों का धर्म के अनुसार संवर्धन करें | हिंदुओं के जीवन चक्र में विवाह एक महत्वपूर्ण संस्कार है| 10. इस्लाम में विवाह इकरारनामा है जो स्थायी व अस्थाई हो सकता है | यहाँ पति का कर्तव्य होता है कि वह विवाह के दौरान पत्नी को ‘महेर’ या ‘दहेज’ दें |यह एक प्रकार का तोहफा है जो पति शादी के तुरंत बाद लेकिन समागम से पहले पत्नी को देता है | अगर शादी के बाद महेर तुरंत नहीं दिया जाय तो यह तलाक के समय या शौहर की मौत के बाद दिया जाना जरूरी होता है | कुछ इस्लामी धर्मशास्त्रों ने इस मेहर को भोगाधिकार (दूसरे की वस्तु इस्तेमाल करने का मुआवजा ) कहा है | जो पत्नी को दिया जाता है | मुस्लिम विवाह में तलाक के छः प्रकार है |इस्लाम में ऐसा कोई भी प्रावधान नहीं है जिसके द्वारा दोनों पक्ष अलग होने में किसी न्यायिक प्रक्रिया कि माँग कर पाएँ | इस्लाम मुस्लिम पति को अपनी पत्नी को अपने मन के अनुसार छोड़ने का विशेषाधिकार देता है फिर चाहे उसके पीछे कोई अच्छा कारण हो, बुरा कारण हो, बेरूखी के कारण, या कोई मामूली सा कारण हो या फिर कुछ कारण ही न हो | मात्र तलाक शब्द का तीन बार उच्चारण ही काफी है | लेकिन मुस्लिम औरत को तलाक पाने के लिए कुछ शर्तों की पूर्ति करनी पड़ती है | पति पत्नी आपसी समझोते द्वारा अपना विवाह खत्म कर सकते है |
11. हिन्दू विवाह न्यायिक प्रक्रिया द्वारा ही अवैधानिक या रद्द घोषित किया जा सकता है |  11. जुबानी तलाक की पद्धति सभी मुस्लिम परम्पराओं में है | तलाक के लिए न्यायालय में जाने की आवश्यकता नहीं है |
12. तलाक के मामले में पति पत्नी को समान अधिकार प्राप्त है 12. पुरूष बिना किसी कारण तीन बार तलाक कहकर तलाक दे सकता है | स्त्री को कुछ कारणों से तलाक मिलता है | आपस के समझौते से भी तलाक लिया जा सकता है इसे मुबारत कहते है | निकाह मस्जिद में दर्ज किए जाते है पर तलाक कहीं दर्ज नहीं होते हैं |
13. कोर्ट को यह आदेश देने का अधिकार है कि पति परिक्तता पत्नी का सहायक के रूप में निर्वाह व्यय दे साथ ही स्त्रीधन भी पत्नी को दिया जाता है | पत्नी जिसे निर्वाह व्यय दिया जाता है उसका व्यवहार शालीन होना आवश्यक है | पुनर्विवाह न होना चाहिए उसका हिन्दू होना आवश्यक नहीं है | इसी प्रकार पत्नी भी पति को निर्वाह व्यय अदा कर सकती है जब तक वो अलग न हो जाएँ, या तलाक होने पर स्थायी संभरण या अस्थाई या फिर विचाराधीन अभियोग के दौरान भी | 13. महेर देने के बाद मुस्लिम औरत अन्य किसी चीज की मांग नहीं कर सकती |
14. बलात्कार फ़ौजदारी का अपराध माना जाता है | 14. बलात्कार को अपराध तब ही माना जाता है जब बलात्कारी कबूल करे या वहाँ पर चार गवाह हों | जब कोई औरत बिना चार गवाहों के बलात्कार का आरोप कर रही हो तो वह वास्तव में यह स्वीकार करती है कि उसने समागम किया है , ऐसा माना जाता है | अगर वे या आरोपी पुरूष शादीशुदा हों तो यह बलात्कार माना जाता है |
15. स्त्री पुरूष को समान यौन अधिकार है | 15. स्त्री को सिर्फ अपने पति के साथ ही यौन संबंध रखने का अधिकार है | अगर पत्नी अपने पति के समागम कि मांग से इंकार करती है तो यह बहुत बड़ा अपराध होता है | जब तक उसके पास कोई ठोस वजह न हो जैसे मासिक धर्म, अपरिहार्य उपवास या बीमारी वह समागम के लिए इंकार नहीं कर सकती |

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 7. जिहाद नहीं तो और क्या ???

 अब तक यह बात साफ हो गई थी कि हिन्दू लड़कियों को फँसाने के लिए मुस्लिम युवकों द्वारा विशिष्ट कार्य पद्धति का अबलम्ब किया जाता है | लेकिन अब मैं मुस्लिम युवकों के इस कपट पूर्ण वर्ताव का मूल कारण जानने के लिए उत्सुक थी | वह क्या था जो इन युवको को इस प्रकार का काम करने के लिए प्रेरित करता है ? इसी उद्देश्य से मैंने इस्लाम में ‘जिहाद’ की अवधारणा का परीक्षण शुरू किया | मुस्लिम मन को समझने के प्रयत्न में मैंने अनेक स्रोतों  के माध्यम का आधार लेकर अध्ययन किया | यह बात साफ थी कि ‘लव जिहाद’ यह इस्लाम में जिहाद की अवधारणा और महिलाओं के स्थान का परिणाम था | अतः मेरे लिए इस्लाम की एसी मूलभूत धारणाओं का अध्ययन करना अनिवार्य हो गया जो मुस्लिम विचारों को न सिर्फ आकार देते है अपितु समाज में उनके कृत्यों के लिए जिम्मेदार होती है |

इस्लाम को मनाने के लिए अन्य बातों के साथ साथ कुछ धारणाओं को मानना, उन पर विश्वास रखना अनिवार्य होता है | उनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

1. एकमात्र अल्लाह ही सच्चा ईश्वर है और एकमात्र वही आराधना के योग्य भी है |

2. मुहम्मद के द्वारा अल्लाह ने अंतिम और निर्णायक संदेश दिया है | इसी कारण मुहम्मद न सिर्फ एकमेवाद्वितीय ईश्वर दूत है अपितु इस्लाम में विश्वास रखने वालों के आदर्श भी हैं |

3. कुरा शब्द प्रतिशब्द अल्लाह के है, उसमें परिवर्तन असंभव है | यह अपरिवर्तित और अपरिवर्तनीय है अतः उसका अक्षरिक पालन करना अनिवार्य है |

उपरक्त धारणाओं के साथ साथ इस्लाम में विश्वास रखने वालों के लिए इस सम्पूर्ण विश्व को दार-उल-इस्लाम (इस्लामी प्रभुता का प्रदेश) में परिवर्तित करना आवश्यक है | इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए जिहाद छेड़ना आवश्यक है | इन्ही मूलभूत धारणाओं के साथ ही नमाज पढ़ना, जकात अदा करना, रमजान के दौरान उपवास रखना और हज्ज की यात्रा करना ये इस्लाम के कुछ अन्य स्तम्भ है | भले ही जिहाद को इस्लाम के पाँच में सम्मिलित नहीं किया गया फिर भी वास्तव में इस्लाम में इसके महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता |

“जिहाद” शब्द की व्युत्पत्ति मूलतः अरेबिक शब्द ‘जूहद’ से हुई है जिसका अर्थ है ‘संघर्ष, प्रयास’ | इस्लामी धर्म गृन्थ में जिस शब्द प्रयोग का बार बार उल्लेख आता है, वह है ‘जिहाद की साबिल्लिल्लाह’ अर्थात अल्लाह के मार्ग पर हमेशा संघर्षरत रहना | समान्यतः इसका अर्थ है अपनी क्षमता से बढ़कर शत्रुओं के साथ युद्धरात रहना | पर यहाँ पर प्रश्न निर्माण होता है कि कौन शत्रु है और उनसे किस प्रकार युद्धरात रहा जाय?

‘डिक्शनरी ऑफ इस्लाम’ नमक अधिकारक इस्लाम के कोष के अनुसार जिहाद की ब्याख्या है, मुहम्मद के मार्ग में आस्था न रखने वाले लोगों के विरुद्ध एक धार्मिक युद्ध | कुरान के अनुसार जिहाद एक अत्यावश्यक दीनी (धार्मिक) कर्तव्य है और इस्लाम की परम्पराओं के अनुसार यह एक दैवी अनुष्ठान है जिसका उद्देश्य इस्लाम का प्रसार तथा इस्लाम से घिनौनी बुराइयों को खत्म करना |

कुरान के अनुसार मानव समाज दो गुटों में बंटा है- एक अल्लाह का साथ देने वाले श्रद्धावानों (इमनवालों) का और दूसरा शैतान का साथ देने वाले अर्थात अश्रद्धों (काफिरों) का | श्रद्धावानों के विषय में कुरान कहता है “और जो शख्स अल्लाह से दोस्ती रखेगा और उसके रसूल से, उसके इमानवालों से, सो अलाह का गिरोह बिला शक गालिब है ” (कुरान 5.56); ‘जो लोग अल्लाह पर और कयामत के दिन पर पूरा ईमान रखते है,…अल्लाह ताला उनसे राजी होगा और वे अल्लाह से राजी होंगे| जो अल्लाह का गिरोह है ’(कुरान 58.22) | और काफिरों के बारे में कुरान कहता है, “उन पर शैतान ने पूरा कब्जा जमा लिया है , सो उसने उनको खुदा की याद भुला दी है, लोग शैतान का गिरोह है ”….(कुरान 58.19)  और ये दोनों गिरोह आपस में नित्य संघर्षरत हैं , अतः शत्रु कौन यह बात तो साफ है | पैगंबर श्रद्धावानों को स्पष्ट शब्दों में निर्देशित करते है | “अपनी जायदाद, अपने जीवन और जीभ के साथ बहुदेववादियों के खिलाफ लड़ो ” (मिश्कात उल-मसबीह 23.53)| जिहाद का उद्देश्य कुरान इस प्रकार से स्पष्ट करता है, “और उनके साथ इस हद तक लड़ो कि अकीदे का बिगाड़ (यानि शिर्क) न रहे और (उनका) दीन (खालिस) अल्लाह का ही हो जाय ” (कुरान 2.193)|

यह पढ़ने के बाद लगाना स्वाभाविक है कि जिहाद में सिर्फ हिंसा ही होती है | पैगंबर भी यही कहते है “युद्ध एक रणनीति है” (मिश्कत-उल-मसबीह 123.101)|

जब यह बात साफ है कि जिहाद एक षड्यंत्र है तब इन मुस्लिम प्रेमवीरों की कार्यपद्धति को एक नया अर्थ प्राप्त हो सकता है |

इस्लामिक विश्वविद्यालय, इस्लामाबाद के प्राध्यापक तथा हदीस अबू दाऊद (मुहम्मद पैगंबर के सुविचार का तथा कृतियों का संग्रह) के अनुवादक कहते है | “जिहाद का शाब्दिक अर्थ संघर्ष करना, कठोर परिश्रम और निरंतर प्रयास है | इस्लाम के संदर्भ में जिहाद का अर्थ इस्लाम के प्रसार के लिए काफिरों के साथ युद्धरत रहना | अधिक विस्तार से देखा जाय तो जिहाद में वे सभी प्रकार आते है जो अल्लाह की राह में और दीन के प्रचार के लिए किए जाते है | इन प्रयत्नो में युद्धभूमि पर युद्ध करना, मदरसों में पढ़ना, सार्वजनिक सभाओं में भाषन करना और इस्लाम प्रचार के लिए लेखन करना सभी सम्मिलित है” |

अब जब इस्लाम प्रचार के लिए प्रयत्न ऐसा ‘जिहाद’ शब्द का व्यापक अर्थ साफ है तब हिन्दू लड़कियो को अपने जाल में फंसाना और उनका धर्म परिवर्तन करना यह भी जिहाद का एक रूप है | इस अर्थ में जिहाद मुस्लिमों के लिए पवित्र कर्तव्य है | चूकि यह एक पवित्र कर्तव्य है, इसे मुस्लिम समाज की पूर्ण सहायता मिलती है जो सामाजिक, पारिवारिक, आर्थिक, और नैतिक भी है | मेरे साक्षात्कारों के दौरान मैंने एसे अनेक उदाहरण देखे हैं जहां इन मुस्लिम युवकों ने हिन्दू युवतियों पर वेहताशा पैसे लुटाए हैं | ये युवक हमेशा समूह में काम करते है | सम्पूर्ण परिवार और मुस्लिम समाज दंपत्ति को आसरा देने हेतु एक हो जाते है |

इस्लाम उन सभी लोगों को जो आर्थिक दृष्टि से सक्षम होते है अपनी कमाई का कुछ हिस्सा संप्रदाय के कामों में देने का आदेश देता है | इसे ‘जकात’ कहते है | कुरान में भी इस दान हेतु कुछ विशिष्ट नियम और परिस्थिति का उल्लेख मिलता है | कुरान के अनुसार ,”सदाकत तो सिर्फ गरीबों का हक है और महतातों का , और जो कार्यकर्ता उन सद्कात पर मूतैयन है, और जिनकी दिलजोई करना (मंजूर) है, और गुलामों की गर्दन छुडाने में, और कर्जदारों के कर्जे में, जिहाद में और मुसाफिरों में, यह हुक्म अल्लाह की तरफ से (मुकर्रर) है …” (कुरान 9.60) | हमारे संदर्भ से ‘अल्लाह का पवित्र कार्य’ यह शब्द अधिक महत्वपूर्ण है | जिहाद भी अल्लाह की राह पर संघर्ष ही है | इसी कारण वे सारे जो यह पवित्र कर्तव्य निभा रहे है उनका सारा खर्चा अर्थात यात्रा शस्त्र-अस्त्र, पुस्तकें और अन्य संसाधनों का खर्च “जकात” के पैसों द्वारा ही चुकाना होगा | फिर चाहे वो व्यक्ति आर्थिक दृष्टि से सक्षम क्यों न हो उसे मुस्लिम समाज से ही सहायता मिलनी चाहिए | “लव जिहाद” को मिलने वाली सहायता के स्रोतों को ढूँढने के लिए और आगे देखने की आवश्यकता नहीं है |

धोखा देना यही लव्ह जिहाद का आधार है, तब स्वाभाविक तौर पर नैतिकता का प्रश्न उपस्थित होता है | इस संदर्भ में एक अन्य इस्लाम के तत्व को समझना अनिवार्य है | यूनान के दार्शनिक प्लेटो ने ‘यूथयप्रो’ नामक अपनी वार्ता में सुकरात के विचार वर्णित किए हैं | इसमें सुकरात युथायप्रो से पूछते हैं, क्या देवताओं को पवित्र वस्तु इसलिए प्रिय है क्योंकि वह पवित्र है, या फिर वह वस्तु देवताओं को प्रिय होने के कारण पवित्र हो जाती है? इस्लाम के संदर्भ में सुकरात की इस दुविधा को हम इस प्रकार से शब्दबद्ध कर सकते है, “क्या ईश्वर नीतिपूर्ण आदेश इसलिए देते है कि वे नीतिपूर्ण है या वे ईश्वर द्वारा दिये जाने से नीतिपूर्ण हो जाते है ?” इस दुविधा को इस्लाम ने बड़ी सरलता से सुलझाया है,” कोई वस्तु केवल इसलिए पवित्र या नैतिक हो जाती है क्योंकि अल्लाह उसे चाहता है ”| युद्ध के लूट के आधार पर हम यह बात विस्तार से समझ सकते है | साधारणतः युद्ध के समय लूट-मार करना अनैतिक और असंस्कृत समझा जाता है | फिर भी कुरान में अल्लाह अपने बंदों को  आश्वस्त करता है | सो जो कुछ तुमने लिया है उसको हलाल पाक (समझकर) खाओ और अल्लाह ताला से डरते रहो, बेशक अल्लाह ताला बड़े बख्सने वाले, बड़ी रहमत वाले है | ( कुरान 8.69) | अतः ये श्रद्धावान बिना किसी हिचकिचाहट के लूट का मजा उठा सकते है | इस्लामी युद्धों में युद्ध की लूट में अन्य अनेक चीजों के साथ ही महिलाओं का समावेश होता है, जिन्हें बंदी बनाकर ले जया जाता है |

इस्लाम के लंबे इतिहास में जिहाद का शत्रु की क्षमता के अनुसार कभी सुनियोजित शरनागति या आक्रमण के रूप में उपयोग किया गया | लव जिहाद के संदर्भ में मुझे पीड़ित लड़कियों द्वारा अवगत कराया गया कि ये मुस्लिम लड़के अनेकों बार मुस्लिम समाज में व्याप्त बुराइयों पर टीका करते है और विवाह के बाद लड़के वैसा ही व्यवहार करते है | इस तथ्य को समझने के लिए हमें ‘तकिया’ का सिद्धान्त समझना जरूरी है | तकिया या धार्मिक भावनाओं को छिपाना यह शिया मुस्लिमों के द्वारा सुन्नी मुस्लिमों के अत्याचारों से बचाने के लिए निकली गई जुगत थी | यह कुरान की इस आयात पर आधारित है एसा माना जाता है, ”मुसलमानों को चाहिए की काफिरों को (खुले तौर पर या छुपे तौर पर) दोस्त न बनाएँ, मुसलमानों (की दोस्ती) से आगे बढ़ करके, और जो सख्स ऐसा (काम) करेगा सो वह सख्स अल्लाह के साथ (दोस्ती रखने के) किसी शुमार में नहीं, मगर ऐसी सूरत में कि तुम उनसे किसी किस्म का (सख्त) अंदेशा रखते हो, और अल्लाह ताला तुमको अपनी जात से डरता है, और खुदा की ही तरफ लौटकर जाना है (कुरान 3.28)|” फिर अगर श्रद्धावान अर्थात मोमीन किसी अत्याचार या आक्रमण से आशंकित हो तो ऐसी परिस्थिति में वह झूठ-मूठ अल्लाह के विश्वास से इंकार कर सकता है तथा गैर कानूनी या ईश्वर निंदा का कृत्य भी कर सकता है | आधुनिक युग में इस अर्थ का विस्तार किया गया | उसके अनुसार कुछ लोगों के सामने उपहासात्मक हास्य किया जा सकता है जबकि ह्रदय में उन्हें बददुआ देता रहे | दूसरे शब्दों में मुस्लिम काफिरों की तरह या उनसे बदतर भी व्यवहार कर सकते है जैसे मूर्तिपूजा करके, झूठी गवाही देकर इतना ही नहीं काफिरों के सामने अपने मुस्लिम सहकारियों की कमज़ोरियाँ बताकर और तो वे इस्लाम के हित में किसी मुस्लिम को मार सकते हैं |

चूंकि जिहाद पवित्र कर्तव्य है अतः जो मुजाहिद या योद्धा इस कर्तव्य की रह पर शहीद हो जाता है उसे इस्लाम के अनुसार जन्नत नसीब होता है | पैगंबर कहते है,” और जो लोग अल्लाह के रास्ते में मारे गए है, उन्हें मृत ना समझें, लेकिन अपने अल्लाह ताला के लिए जिंदा है …..उनकी रूह हरे रंग के पक्षियों के पेट में है, जिन्हें सिंहासन से लटकाए चिराग है वे स्वर्ग में जहां पसंद टहलते है और वे इन चिराग तले पनाह लेते हैं” (मिश्कात उल-मसबीह 23.18) | और आगे,” अल्लाह के पास के छः गुण है खून के पहले बहा पर जन्नत में अपनी जगह दिखाई जाती है | वह कब्र की सजा से सुरक्षित हो जाता है; महिमा का ताज उसके सिर पर डाल दिया जाएगा; उसमें एक ऐसा गहना होगा जोकि दुनिया और उसमें जो है, उसकी तुलना से बेहतर होगा | उसकी शादी बड़ी आँखों वाली बहत्तर कुमारियों से होगी और अपने सम्बन्धों के सत्तर रिशतेदारों के लिए हिमायत करने की अनुमति दी जाएगी | (मिश्कात उल-मसबीह23.44) इस प्रकार के आश्वासन जिहादियों को प्रोत्साहित करते है |

औरतों के संबंध में कुरान कहता है, ”तुम्हारी बीबियाँ तुम्हारे लिए खेत है सो अपने खेत में जिस तरह से होकर चाहो जाओ ….” (कुरान 2.223)| अपने श्रद्धावान पुरूषों को प्रोत्साहित कराते हुए पैगम्बर कहते है, ”इस तरह की औरतों से शादी करो जो मुहब्बत करती हो, बच्चे पैदा करती हो, और मैं आप द्वारा लोगों में संख्या बढ़ाऊंगा ” (मिश्कात उल-मसबीह 23.11) | यह अलग से कहने की आवश्यकता नहीं है कि ऐसे कथन मुस्लिम युवकों को प्रोत्साहित करते है |

साधारणतः मुस्लिम जिहाद के दौरान औरतों को नहीं मारते | औरतों के लिए यह सहानुभूति क्यो ? इस प्रश्न का उत्तर ढूँढने के लिए हमें ज्यादा दूर जाने के जरूरत नहीं है | कुरान इसके बारे में निर्देशित करता है कि ,” वे औरतें जो शौहरवालियाँ है मगर जो कि मिल्क में आ जाय, अल्लाह ताला ने इन अहकाम को तुम पर फर्ज कर दिया है ….|” और उन औरतों के अलावा अन्य औरतें तुम्हारे लिए हलाल की गई है, यानि यह कि तुम उनको मालों रे जरिये से चाहो, इस तरह से कि तुम बीबी बनाओ….” (कुरान 4.24)| इस आयात में ‘मा म-लकत एमानोकुलम ’ यह मूल अरबी शब्द हैं जिसका शाब्दिक अर्थ है ‘दाहिनी हाथ की’ |जिसका तात्पर्य समान्यतः गुलामो से है तथा युद्ध कैदी ऐसा इसका विशेषार्थ है | श्रद्धावान पुरूष इस प्रकार की अनेक गुलाम लड़कियों को अपने पास रख सकता है | इस धरती पर मालिकाना हक अल्लाह का ही है एसा इस्लाम का मानना है | अल्लाह के साथ पैगंबर और आगे जाकर इस्लाम पर विश्वास रखने वालों का ही हक इस धरती पर है | ऐसा इस्लाम मानता है | इस अर्थ में सम्पूर्ण विश्व ही इस्लाम की जायज प्रष्ठभूमि है और लूट करने का श्रोत है |

मुस्लिम लड़को को उनकी करतूतों के लिए नीका-उल-मुताह में आधार मिल सकता है  यह निश्चितकालिक या अल्पकालिक संविदात्मक विवाह है जिसका प्रावधान शिया मुस्लिमों की परंपरा में है | समय पूरा होने पर यह विवाह अपने अप समाप्त हो जात है | और तलाक की आवश्यकता नहीं होती | यह विवाह बिना किसी मुल्ला मौलवी या अभिभावकों की उपस्थिती में भी किया जा सकता है | सिर्फ अल्लाह ही इस विवाह का गवाह होता है | कुरान के इस कथन के आधार पर यह विवाह जायज माना जाता है, ”इस तरह से कि तुम बीबी बनाओ, सिर्फ मस्ती ही निकालना ना हो, फिर जिस तरीके से तुमने उन औरतों से फायदा उठाया है सो उनको उनके मेहर दो जो कुछ मुकर्रर हो चुके है | और मुकर्रर होने के बाद भी जिस पर तुम रजामंद हो जाओ उसमें तुम पर कोई गुनाह नहीं …..(कुरान4.24)” |

जिहाद की संकल्पना समझने के बाद मुस्लिम युवको के लव जिहाद की हरकतों के पीछे छिपी प्रेरणा जानना कोई मुश्किल बात नहीं | वे अनेक साक्षात्कार और परिचर्चाएँ जो मैंने इस दौरान की, उन्हें देखकर केवल ,”प्रेम की भावनाओं का आवेग” कहना अनुचित होगा | भले ही बताने वालों के संदर्भ अलग-अलग हों फिर भी उनमें कुछ समानता है | निस्संदेह यह इस्लाम के षड्यंत्र का ही हिस्सा है | इस्लाम की आक्रामकता का यह वर्तमान स्वरूप भले ही आधुनिक काल से सुसंगत बनाया गया हो पर वह है तो आक्रामकता ही | और यही सत्य है, इससे बचना असंभव है |

मुस्लिम लड़के तो उनका कर्तव्य निभा रहे है अपने समाज की रक्षा के लिए हिन्दू क्या कर रहे है ?

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                                                                                                       उपोद्घात  

                                                                                                             v      

 इस्लाम के अनुसार अन्य मजहब की लड़कियों को अपने मजहब में खींचना पुण्य का काम है | इसी कारण इस धर्म के लड़कों को यही शिक्षा दी जाती है | इन बातों को अंजाम देने के लिए अन्य महिला पुरूष इनकी मदद करते है, कट्टर मुस्लिम संगठन भी इसे प्रोत्साहन देते है | ये बात मुस्लिमेत्तर भारतीय समाज को तुरंत और गंभीरतापूर्वक समझनी चाहिए | मुस्लिमेत्तर लोगों को मुस्लिम समाज की मानसिकता और व्यवहार के प्रत्यक्ष प्रमाण देकर लोगों को सबधान करना ही इस पुस्तक का उद्देश्य है | मुस्लिम समाज के लड़कों के इस वर्ताव के कारण हजारों की संख्या में भारतीय परिवार जड़ से हिल चुके है, उद्धवस्त हो चुके हैं | इस बात के बारे में सभी लोग गंभीरतापूर्वक चिंतन करें | इस प्रकार की वारदातों को जानकार उनके विरोध में सुयोग्य नीति का निर्धारण करके वह कार्यान्वित हो इसी मनीषा से यह पुस्तक लिखी गई है |

मुस्लिमेत्तर अभिभावकों को अपनी जवान होती बेटी के विवाहोत्तर भविष्य के बारे में गंभीरता से विचार करना चाहिए | अपनी बेटी का भविष्य सुखमय हो, समृद्ध हो और आनंद से भरा हो ऐसी सभी अभिभावकों की इच्छा होती है | इसी कारण से आवश्यकता है थोड़ी सी सावधानी की | लड़कियों को बचपन से स्त्रीयों के स्थान के बारे में बताते रहना चाहिए | उनके मन में यह बात अच्छी तरह से उतारनी चाहिए | साथ ही मुस्लिम महिलाओं का प्रबोधन करना आवश्यक है |

नारी समानता के इस युग में जिस धर्म में महिलाओं का स्थान कम माना गया है (इस्लाम में चार विवाह की सम्मति, बुरखा पद्धति, जुबानी तलाक, एक पुरूष की गवाही को दो महिलाओं के बराबर मानना) उस धर्म में तत्काल सुधार की आवश्यकता है | इस आवश्यकता को इस्लाम और अन्य धर्म की सभी स्त्री संगठनों ने प्रतिपादित करना चाहिए |

युवावस्था में प्रवेश करने वाली लड़कियों को यह बताना आवश्यक है, की वासनपूर्ति यह क्षणिक सुखकारक है परंतु योग्य विचार न किया जाय तो सारा जीवन दुखकारक बन जाता है | यह बात स्पष्ट रूप से माँ-बाप ने, अभिभावकों ने, शिक्षक-शिक्षिकाओं ने लड़कियों को बताना चाहिए | हर माँ-बाप का विस्वास होता है कि उनकी बेटी कभी गलत काम नहीं कर सकती | ऐसा विश्वास होना जरूरी भी है लेकिन इस विश्वास के साथ क्षणिक सुख की अपेक्षा भविष्य के दीर्घ जीवन के बारे में अपनी बेटी के मन में एहसास निर्माण करना ज्यादा महत्वपूर्ण है | मातृधर्म और पितृधर्म का अर्थ यही है कि हमें अपने बच्चों के आने वाले जीवन को सुखमय बनाने के लिए उसमें इस अहसास को बढ़ाना अगर हमने ही अपने धर्म का ठीक से पालन नही किया तो औरों को दोष कैसे दे सकते हैं ? इसके विपरीत मुस्लिम अपने मजहब के अनुसार ही वार्ताव कर रहे हैं |

पर केवल माँ-बाप ने अपना कर्तव्य नहीं निभाया, धर्म का पालन नहीं किया इसलिए उन्हें दोष देकर रिश्तेदार, अड़ोस-पड़ोस वाले और समाज इससे छूट नहीं सकते | अगर स्त्री जीवन स्वस्थ, सुखदायक होना जरूरी है तो हमें भी अपने धर्म के बारे में जागृत रहना चाहिए |

                                                                   सुखी होता है सतर्क, दुखी है असावधान |

                                                                    एसा है लोकिक विचार, जो दिखाता है ||   

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परिशिष्ट – 1

इस्लाम में स्त्री का स्थान

 

इस्लाम में स्त्री का स्थान यह एक स्वतंत्र चिंतन का विषय है और चिंता का भी |

जब कोई युवती इस्लाम के रीति-रिवाजों का पालन करने लगती है या उसका इस्लाम में मतांतरण होता है तब उसका स्थान क्या होता है | यह जनाने के लिए इस्लाम में प्रमाण माने जाने वाले गृन्थों के उद्धरण यहाँ दिये जा रहे है | इस्लाम में स्त्री का स्थान क्या है ये जानने के लिए ये उपयोगी सिद्ध हो सकते है –

  • कुरान

कुरान धर्म गृन्थ को इस्लाम में सबसे पवित्र गृन्थ के रूप में मान्यता है | इसमें लिखा हर शब्द अल्लाह के शब्द के के रूप में वंदनीय है | इस एकमेव धर्मगृन्थ में स्त्रीयों के संदर्भ में कुछ आयतें –

  1. “और अगर तुमको इस बात का अंदेशा हो कि तुम यतीम लड़कियों के बारे                  में इंसाफ न कर सकोगे तो और औरतों से जो तुमको पसंद हो निकाह कर लो, दो-दो औरतों से, तीन-तीन औरतों से और चार-चार औरतों से, पर अगर तुमको इसका अंदेशा हो कि अद्ल “यानी इंसाफ और बराबरी” न रखोगे तो फिर एक ही बीबी पर बस करो या जो बाँदी तुम्हारी मिल्क में हो वही सही, इस जिक्र हुए मामले में ज्यादती न होने की ज्यादा उम्मीद है |” (कुरान 4.3)
  2. “…..अपनी बीबीयों से और अपनी बेटियों से और दूसरे मुसलमानों की बीबीयों से कह दीजिये कि (सर से) नीचे कर लिया करें अपने ऊपर थोड़ी सी अपनी चादरें, इससे जल्दी पहिचान हो जाया करेगी, तो तकलीफ न दी जाया करेंगी |”(कुरान 33.59)
  3. “………और दो शख्सों को अपने मर्दों में से गवाह कर लिया करो, फिर अगर वे दो गवाह मर्द न हो तो एक मर्द और दो औरतें (गवाह बनाली जाएँ) एसे गवाहों मे से जिनको तुम पसंद करते हो ताकि उन दोनों औरतों में से कोई भूल भी जाय तो उनमें से एक दूसरी को याद दिला दे ……” (कुरान 2.282)
  4. “फिर अगर कोई (तीसरी) तलाक दे दे औरत को तो फिर वह उसके लिए हलाल न रहेगी उसके बाद, यहाँ तक कि वह उसके सिवा एक और खाविंद के साथ (इद्दत के बाद) निकाह करे | फिर अगर यह उसको तलाक दे दे तो इन दोनों पर इसमें गुनाह नहीं कि बदस्तूर फिर मिल जाएँ, शर्त यह है कि दोनों गालिब गुमान रखते हो कि (आइंदा) खुदवन्दी जबतों को कायम रखेंगे ….(कुरान 2.230)”
  5. “और अगर तुम बजाय एक बीबी के दूसरी बीबी करना चाहो और तुम उस एक को ढेर का ढेर माल दे चुके हो तो तुम उसमें से कुछ भी मत लो ….” (कुरान 4.20)
  6. “…….मर्द हाकिम है औरतों पर, इस सबब से कि अल्लाह ताला ने बाजों को बाजों पर फजीलत दी है, और इस सबब से कि मर्दों ने अपने माल खर्च किए है सो जो औरतें नेक है इताअत करती है …. और जो औरते ऐसी हो कि तुमको उनकी बाद दिमागी का अंदेशा हो तो तुम उनको जुबानी नसीहत करो और उनको लेटने की जगह में अकेला छोड़ दो, और उनको मारो ” (कुरान 4.34)
  7. पिता की संपत्ति पर बेटी को हक्क है पर वह बेटे के हक्क के आधा है | (कुरान 4.177)
  8. “….उसने तुम्हारे वास्ते तुम्हारी जिंस की यानी तुम्हारी जात से और तुम्हारी ही शक्ल सूरत वाली बीबीयाँ बनाईं ताकि तुमको उनके पास आराम मिले ……” (30.20)
  • हदीस

मुहम्मद पैगंबर की उक्ति और कृति का संकलन हदीस है | इस्लाम में कुरान की तरह हदीस को भी महत्वपूर्ण स्थान है | निम्नलिखित उद्धारन “मिश्कात उल मसबीह” नामक मूल अरेबिक हदीस संकलन – गृन्थ के अंग्रेगी अनुवाद से दी गई है |

  1. “… जब एक आदमी उसकी बीबी को अपने शौक को पूरा करने के लिए बुलाता है तो उसको उसकी ओर जाना चाहिए चाहे वह रसोई में व्यस्त क्यो ना हो” (मिस्बाह उल मसबीह 2.61)
  2. “जब भी एक मर्द अपनी औरत को बुलाता है और वह मना करती है, और तब वह गुस्से की मनोदशा में रात गुजरता है तो फरिश्ते उसके भोर जाग जाने तक उसे अभिशाप देते है |” (मिस्बाह उल मसबीह 2.54)
  3. मृत्यु के समय जिस औरत का पति उससे खुश था उसे जन्नत में प्रवेश जिया जाएगा | (मिस्बाह उल मसबीह 2.60)
  4. “….. सबसे अच्छा खजाना जो किसी आदमी को इकठ्ठा करना चाहिए – अच्छे चलन की बीबी जो जब-जब वह उसकी ओर देखता है, उसे खुश रखती है, वह जब जब आदेश दे उसका पालन करती है और तब उससे दूर रहता है अपनी रक्षा करती है |” (मिस्बाह उल मसबीह 2.38)
  5. “अगर में किसी को दंडवत करने का आदेश देता तो में औरत को उसके शौहर को दंडवत करने का आदेश देता ” (मिस्बाह उल मसबीह 2.59)
  6. “अपनी बीबी को क्यों पीटा इसकी पूछताछ नहीं हो सकती (मिस्बाह उल मसबीह 2.71)”
  7. फतवा काजी खान के अनुसार शौहर बीबी को चार कारणों से मार सकता है-
  8. शौहर ने उसे पास बुलाया औए उसने आने से इंकार कर दिया |
  9. संभोग के लिए इंकार कर दिया |
  10. स्त्री से सुख, स्नान, नमाज का त्याग किया हो |
  11. शौहर की अनुमति के बिना दूसरे घर गई हो | (मिस्बाह उल मसबीह 1.206)
    1. अगर अपशकुन है तो वह एक घर, घोड़े और औरत में | (मिस्बाह उल मसबीह

9.71)

9.     “सचमुच औरत शैतान के रूप में पास आती है और शैतान के रूप में पीछे चली

जाती है” (मिस्बाह उल मसबीह 27.80)

  • अन्य गृन्थ
  1. वर्ल्ड ऑफ फतवाज़ यह अरूण शौरी द्वारा लिखित गृन्थ में अनेक हदीसों के संदर्भ से पैगंबर के निम्न लिखित उद्धरण दिये गए है –

ü      जब स्त्री घर से निकलती है तब शैतान उसके रास्ते में छिपकर बैठा रहता है | (पृ. 517)

ü      स्त्री दुर्गुणों से बनी है वह तुम लोगों को कभी सीधे तरीके से पेश नहीं आ सकती | उसका टेड़ापन रहे ही उसका उपयोग लेना चाहिए | (पृ. 590)

ü      सब दुनियाँ उपभोग करने के लिए बनी है पर उसमें सबसे अच्छी वस्तु स्त्री है | (पृ. 592)

ü      बाद में मैंने मर्दों के लिए सबसे बड़ा दुख स्त्रीयों के अलावा और किसे नहीं रखा है |(पृ. 591)

ü      पति की अनुमति से ही उपवास रखें | (पृ. 591)

ü      प्रख्यात इस्लामी तत्ववेत्ता अल गजली के अनुसार परछाई के एक हजार भाग होते है उसमें से एक ही स्त्रीयों का होता है बाकी 999 मर्दों के होते है |(पृ. 594)

ü      वर्ल्ड ऑफ फतवाज़ में श्री अरूण शौरी ने तलाक के संदर्भ में अनेक उदाहरण दिये है, उसका सारांश इस प्रकार है – इस्लाम के अनुसार शादी पवित्र बंधन नहीं करारनामा है | कहते है कि अल्लाह को तलाक अच्छा नहीं लगता था पर वास्तव में छोटे कारण से तलाक-तलाक-तलाक ऐसा तीन बार बोलने से तलाक दिया जाता है | उसके लिए कोई उत्तरदायित्व या स्पष्टीकरण देने की ज़िम्मेदारी शौहर पर नहीं होती | गुस्से में, गलतफहमी में, नशे में, स्त्री पर जबर्दस्ती करके सिर्फ उसे डराने के लिए, कभी कभी मज़ाक में भी तलाक दिया जा सकता है | इस्लाम में तलाक देने का अधिकार जिसे खुला कहा जाता है स्त्रीयों को भी है लेकिन अगर पुरूष ने कहा कि “मैंने खुला दिया” तभी स्त्री को आजादी मिल सकती है | (वर्ल्ड ऑफ फतवाज़ पृ. 289-365)

  1. डॉ श्रीरंग गोडबोले जी द्वारा लिखित ‘इस्लामचे अंतरंग’ (राष्ट्रीय विचार प्रसारक मण्डल, पुणे, पहला संस्कारण, 2005) इस मराठी पुस्तक से कुछ उद्धरण –

ü      हिजाब शरीर के लज्जा स्थानों को ढकने के लिए होता है | इन लज्जा स्तनों को अवराह कहते है | स्त्री के दस अवराह होते है ऐसा इस्लाम मानता है | विवाह के बाद उसका एवं अवराह पति के द्वारा ढका जाता है और बाकी के अवराह मौत के बाद कबर ढँक देती है | अनेक अभ्यासकों के अनुसार स्त्री स्वयं एक अवराह है इसलिए उसे औरत तथा लज्जास्थान कहा जाता है |(पृ 155)

ü      उसे मर्द के साथ बीच रास्ते में नहीं चलना चाहिए | उसे रास्ते के बाजू से चलना चाहिए ऐसा पैगंबर फरमाते है |(पृ 157)

ü      मर्द ने कभी स्त्री के साथ अकेला नहीं होना चाहिए क्योंकि उसमें तीसरा शैतान होता है ऐसा पैगंबर फरमाते है |(पृ. 157)

ü      स्त्री ने कभी पुरूष की नकल नहीं उतारनी चाहिए |(पृ. 158)

ü      मुस्लिम औरत ने मुस्लिम मर्द के सिवा किसी और से शादी की तो वह अवैध मानी जाएगी उसे ‘झिना’ कहा जाता है | इस्लामी राज्य में उसे पत्थर से मारने की सजा बताई है | मुस्लिम स्त्री के साथ अगर कोई मुसलिमेत्तर पुरूष विवाह करता है तो उसे इस्लाम का स्वीकार करना चाहिए उसके पश्चात नए करार के अनुसार उनका निकाह किया जा सकता है | (पृ. 167)

  1. मेरे मरने के बाद मेरे देश को स्त्रीयों से ही सबसे बड़ा धोखा है मेरे देश में उपद्रव मचाने वाली तथा अराजकता फैलाने वाली स्त्रीयां ही होंगी | (बुरख्याअड़च्या स्त्रियाँ, पृ. 3)

ü      खुला मांगने का अधिकार अर्थात शादी से आजादी मांगने का अधिकार मालिकी जैसे कुछ विशिष्ट प्रणालियों ने ही मान्य किया है | लेकिन उसमें स्त्री को उसके महेर वापिस पाने का अधिकार है, प्राप्त उपहारों का अधिकार, सारी विरासतों का अधिकार, इतना ही नहीं बच्चों का अधिकार छोडकर जीना पड़ता है | (पृ. 55)

ü      अगर किसी पुरूष के शरीर से खून और पस रिझ रहा हो और उसकी पत्नी ने साफ नहीं किया तो तो उसका मेहनताना चुकता नहीं होता |(माहपुरूषञ्च्या नजरेतूँ स्त्रियाँ, पृ. 95)

ü      जो स्त्रीयां अपने पति की दूसरी शादी पर जलती नहीं शांत रहती है, उन पर अल्लाह मेहरबान होता है |(माहपुरूषञ्च्या नजरेतूँ स्त्रियाँ, पृ. 95)

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परिशिष्ट – 2

 

“केरल कौमुदी” फरवरी 2009 में छपा एक समाचार

 लव जिहाद” इस विषय के बारे में सबसे पहले ‘केरल कौमुदी’ में लिखा गया था | चार हजार हिन्दू और ईसाई युवतियाँ मुस्लिम युवकों के प्रेमजाल में फँसकर मतांतरित हो गई है | ऐसा समाचार उस नियतकालिक में छपा था | पहले इस समाचार को किसी ने गंभीरता से नहीं लिया पर धीरे-धीरे इस विषय की गंभीरता समझ आने लगी | केरल उच्च न्यायालय ने भी इसकी ओर ध्यान दिया | केरल कौमुदी में प्रसिद्ध समाचार –

“केरल में ‘लव जिहाद’ ये संगठन कार्यरत है | हिन्दू लड़कियों के साथ प्रेम का नाटक कर उन्हें धोखा देना और फिर उन्हें मुस्लिम बनाना यह ऐसा कुटिल षड्यंत्र है | इस षडयंत्र के जरिये सैकड़ों लड़कियों को फंसाया गया है और उन्हें इस्लाम की दीक्षा दी गई ऐसा पता चला है |”

छः महीनों की कालावधि में चार हजार हिन्दू लड़कियों को मुस्लिम बनाया गया यह बात खुल जाने पर पुलिस के गुनाह अन्वेषन विभाग ने इसकी पूछताछ शुरू कर दी | मतांतरण की ये वारदात मल्लापुरम जिले में सबसे अधिक हुई है, ऐसा ध्यान में आया | इसके बाद कालीकात और कन्नूर जिले के नाम आते है | इन जिलों में भी इसी प्रकार की वारदातें हुईं हैं |

लव जिहाद में मुस्लिम युवकों को अन्य धर्म के युवतियों का अपने प्रेमजाल में फँसाने का प्रशिक्षण दिया जाता है | दो सप्ताह में उनके साथ प्रेम का नाटक करना उन्हें पटाना और छः महीनों के अंदर उन्हें मुस्लिम बनाकर उनसे निकाह करना, ऐसा उन मुस्लिम युवकों को बताया जाता है | एक बार निकाह होने के बाद इन लड़कियों से कम से कम चार बच्चे पैदा करने का आदेश दिया जाता है | पहले दो सप्ताह में लड़की पटती नहीं तो उसे छोडकर किसी दूसरी पर डोरे डालने को कहा जाता है | इस काम के लिए विदेश से पैसे आते हैं | ‘’लव जिहाद’’ ये संगठन केरल में पिछले एक साल से कार्यरत है | लड़कियों को पटाने के लिए मोबाइल, मोटर साइकिल और तड़क-भड़क वाले कपड़े इनकी आपूर्ति निरंतर मुस्लिम युवकों को की जाती है | इस षड्यंत्र पर नजर रखने के लिए हर जिले में एक प्रमुख नियुक्त किया जाता है | कालेज में प्रवेश से पहले वहाँ की लड़कियों की धर्म के अनुसार अलग-अलग सूची बनाई जाती है |

लव जिहाद के संदर्भ में केरल उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की गई है| न्यायलय ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार को इस प्रकरण के पूछताछ के आदेश दिये | उसके बाद प्रसार माध्यमों का ध्यान इसकी ओर गया |

लव जिहाद की कल्पना पाकिस्तान में लश्कर ए तैयबा इस दहशतवादी संगठन ने प्रस्तुत की | केरल में इस संबंध में कॅम्पस, फ्रंट (एन. डी. एफ़. की युवक संगठन) तसरीन मिस्लत, शाहिज फोर्स मुस्लिम यूथ फोरम इत्यादि संगठन काम करते है | लव्ह जिहाद के लिए आवश्यक साहित्य की पूर्ति करने वाले संगठनो के नाम इस प्रकार हैं –

  1. तारीकत मुव्हमेंट (हैदराबाद)
  2. मिच ऑफ ट्रुथ
  3. इस्लाम कौंसिल
  4. मौनथुल इस्लाम
  5. इंडियन यूनियन लीग , पीडीपी , सिमी इत्यादि |

इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य हिन्दू लड़कियों को शिकार बनाकर उसके द्वारा अधिकाधिक मुस्लिम युवकों को जन्म देना और इसके जरिये केरल में जनसंख्या का संतुलन बिगाड़कर मुस्लिमों की संख्या बढ़ाना, यह है| मुस्लिम शिक्षा संस्थाओं की निर्मिती, मुस्लिम व्यापार उद्योगों का निर्माण, मुस्लिम जमींदारों की संख्या बढ़ाना, हिन्दू मंदिरों को उद्ध्वस्त करना ऐसे विविध मार्गो द्वारा केरल में हिंदुओं का प्रभाव समाप्त करने का प्रयत्न पहले से ही होता आ रहा है और उसमें अब लव जिहाद जुड़ गया है |

  • लव जिहाद के शिकार
  1. स्कूली और महाविद्यालयीन लड़कियां
  2. नौकरी-धंधा करने वाली हिन्दू स्त्रीयां
  3. ब्राह्मण लड़कियों पर विशेष ध्यान
  4. मुस्लिम संस्थाओं में सीखने वाली हिन्दू लड़कियां
  5. मुस्लिम आस्थापना में
  6. मुस्लिम स्त्री-पुरूष से खास दोस्ती रखने वाली हिन्दू स्त्रीयां

लव जिहाद में ब्राह्मण लड़कियों को विशेष लक्ष्य किया जाता है | हिन्दू लड़कियों को फसाने के लिए इन मुस्लिम युवकों को नगद उपहार दिये जाते है | उनके दर भी जाति के अनुसार हैं | वे इस प्रकार हैं –

1. ब्राह्मण लड़की            -      1 लाख

2. नायर लड़की              -      75 हजार

3. एलवा लड़की              -      50 हजार

4. अन्य जाति के लिए        -      30 हजार

मध्यम घर और अमीर घर की लड़कियों को फसाने के बाद उन पर घर से गहने और रकम लाने का दबाब डाला जाता है |

  • लव जिहाद की संगठनात्मक रचना
  1. मुख्यालय – ग्रीन हवेली, मंचेरी, मल्लपुरम
  2. विभागीय कार्यालय – तिरुअनंतपुरम, कोची और क्रोझीकोड़ इन कार्यालयों के प्रमुख लश्कर ए तैयबा से प्रशिक्षण प्राप्त कराते है |
  3. हर जिले के स्थान पर जिला कार्यालय | यहाँ पाँच लोगों की समिती सभी गतिविधियों पर ध्यान देती है |
  4. हर जिले के लिए एक प्रमुख और एक सहायक होता है |
  5. हर एक शिक्षा संस्था में पाँच से दस जिहादी रीमियों होते है | (उस शिक्षा संस्था के विध्यार्थी या उस परिसर में रहने वाले मुस्लिम युवक)
  • कार्यपद्धति के छः पड़ाव
  1. परिचय
  2. मोबाइल फोन, ई-मेल इन्टरनेट, मुस्लिम विद्यार्थी-विद्यार्थिनी सहाध्यायी आदि लोगों के जरिये लड़की पर प्रभाव डालना |
  3. संबन्धित शिकार लड़की को मोबाइल फोन, सौन्दर्य प्रसाधन आदि उपहार देना उनके महाविद्यालय का शुल्क भरना इत्यादि प्रकार से लड़की को प्रभावित करना |
  4. शिकार लड़की को फिल्म देखने ले जाना, होटल में ले जाना, आइसक्रीम खिलाना इत्यादि साथ ही महंगी वस्तुएँ, महंगे उपहार देना, फैशनेबल मोटर साइकिल, गाड़ियों का प्रयोग करना |
  5. धीरे-धीरे लड़की को प्रेम का आश्वासन देने, शादी के सुखमय जीवन के सपने दिखाना, शारीरिक संबंध स्थापित करना, इन संबंधों का मोबाइल के द्वारा चित्रण कर फिर लड़कियों को ब्लैकमेल करना | इससे भी बात नहीं बनी तो उस लड़की और उस के परिवार वालों को मार डालने की धमकी देना ; ये किसी भी हद तक जा सकते हैं |
  6. लड़की को शादी का वचन दिया जाता है इसलिए उसे इस्लाम का स्वीकार करने के लिए मनाया जाता है | मतांतरित लड़कियों को निम्नलिखित संस्थाओं में इस्लाम की शिक्षा दी जाती है –
  1. मौनाई – पोन्नाई
  2. मोगाधार – कोझीकोड
  3. मंचेरी – मल्लपुरम
  4. एरवाड़ी और तेजी – तमिलनाडू
  5. इनके अलावा कोटयम, कासारगोड, करूणापल्ली यहाँ पर भी इस्लाम के केंद्र है |
  • प्रशिक्षण

    लव जिहाद के कार्य-कर्ताओं के लिए लश्कर-ए-तैयबा द्वारा प्रशिक्षण शिविर चलाये जाते है | कोची और कन्नूर में ये शिविर चलते है | कन्नूर में हुए इस शिविर में 185 मुस्लिम युवकों ने सहभाग लिया (इनमें से चार युवक जम्मू में सुरक्षा दल के हाथों मारे गए) तारीकत की ओर से हर जिले में एक प्रशिक्षण लिया जाता है | अनेक मुस्लिम डाक्टर, अभियंता, व्यापारी, आदि लोगों का इस प्रशिक्षणों में सक्रिय सहभाग होता है |

 

  • निधि   

सिमी के आधिपत्य में 23 धर्मदाय संस्थाएं, केरल में लव जिहाद को पैसों की आपूर्ति करती है| सऊदी अरब में इंडिया फ्रंटर्नीटी फोरम नाम की संस्था स्थापित की गई है यह संस्था अखाती देशों से हर साल लगभग 600 करोड़ रुपये इकठ्ठा करके भारत भेजती है |

  • सहायक संस्थाएं

पोप्युलर फ्रंट ऑफ इंडिया यह संगठन मुस्लिम युवकों को लव जिहाद के लिए मोबाइल, मोटरसाइकिल, गाडियाँ इन सब बातों के लिए पैसे की आपूर्ति करता है | उसी प्रकार युवा दंपति को या लड़की को शरीररक्षक भी देते है | इसी संस्था की लीगल फ्रंट यह उपसंस्था जिहादियों को कानून के लिए सहायता करती है |

  • शिकारी लड़कियों का भविष्य
  1. विवाह के बाद लड़की को वैश्या व्यवसाय में धकेला जाता है या योंन शोषण के लिए उनका उपयोग किया जाता है |
  2. इन लड़कियों का उपयोग और हिन्दू लड़कियों को मतांतरण के जाल में फँसाने के लिए होता है |
  3. कुछ लड़कियों को जनानखाने की दासी या मुस्लिम घरों में दासी बनाकर रखा जाता है |
  4. इन लड़कियों को बार-बार मादक द्रव्य दिया जाता है इसी कारण कुछ दिनों में ये व्यसनधीन हो जाती है या फिर मानसिक बीमार हो जाती है |
  5. कुछ लड़कियों को दहशतवादी संगठनों में भर्ती किया जाता है |
  6. कुछ लड़कियों को अरब देशों में भोगदासी के रूप में भेजा जाता है |

हिंदुओं के जागृति का समय आ गया है | लव जिहाद का तूफान हमारे दरवाजे पर नही आया यह सोचकर गाफिल रहना उचित नहीं है | इस तूफान से कोई भी सुरक्षित नहीं है | इस संदर्भ में मार्टिन नीलोमोर के उद्गार स्मरणीय है –

पहले वे कम्युनिष्ट लोगो को मारने आए

मैं शांत था क्योंकि मैं कम्युनिष्ट नहीं था

बाद में वे समाज वादियों को ढूंढ रहे थे

मैं शांत था क्योंकि मैं समाजवादी नहीं था

फिर वे मजदूर नेताओं के लिए आए

मैं शांत था क्योंकि मैं नेता नहीं था

फिर वे यहूदी को ढूंढते आए

मैं शांत था क्योंकि मैं यहूदी नहीं था

बाद में वे मुझे ही ढूंढते आए

उस समय मेरे ओर से बोलने वाला

मेरा रक्षण करने वाला कोई बचा ही न था |

  • कुछ और संदर्भ
  1. US investeegeted love jihad romioj in India wikileeks – लव जिहाद जिसमें मुस्लिम पुरूष अन्य धर्म की स्त्रीयों से शादी कर धर्म बदलकर उन्हें मुस्लिम धर्म स्वीकार करने को बाध्य करते है | इस भारतीय प्रश्न और हिंदुओं के साथ घटित घटनाओं की प्रतिध्वनि अमेरिका सरकार तक पहुँच गई है | अब उन्होने लव जिहाद की छानबीन करने के लिए US Council General Sinkeen को भेजा है | Sinkeen के अनुसार पिछले छः सालों से दक्षिण भारत से 30 हजार से अधिक महिलाएं गुमशुदा हैं | इसमें 2009 को 404 महिलाएं गायब हो गईं थी | जिसमें 332 महिलाएं पुलिस को मिली है | सम्पूर्ण भारत का अभ्यास करने पर यह देखने में आया है कि मुस्लिम पुरूष अन्य धर्म की औरतों से प्यार करता है और उनसे अपना धर्म बदलबाता है |
  2. Times Of India, 13 अक्तूबर 2009 – भोली-भली लड़कियों को प्रेम के जाल में फँसाकर मतांतरण का फंदा डालने वाले लव जिहाद के विरोध में केरल के विश्व हिन्दू परिषद और ईसाई संस्थाएँ साथ आईं | लव जिहाद से लड़ने के लिए इन दोनों संस्थाओं ने अपना हाथ मिलाया है | विश्व हिन्दू परिषद ने हिन्दू हेल्प लाइन भी शुरू की है | जिस पर तीन महीनों में 1500 कोल्स आए थे | हल ही में केरल उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप किया है |
  3. NDTV Story, 9 दिसंबर 2009 – प्रेम के नाम पर चलाने वाले मतांतरण को देखकर केरल के कोर्ट ने सरकार को आदेश दिये है कि इस धोखाधड़ी के विरोध में कानून बनाना चाहिए | कोर्ट ने कहा है कि “प्रेम का नाम लेकर किसी को भी धोखा देकर जबर्दस्ती मतांतरण करवाया नहीं जा सकता | इस संबंध में कोर्ट ने कहा है कि पिछले चार सालों में सिर्फ केरल में 3 से 4 हजार धर्मांतरण वाले प्रेम प्रकरण हुए है |”

प्राप्त जानकारी के अनुसार लव जिहाद एक ऐसा प्लान है जिसमें होशियार और उच्च जाति वाली हिन्दू और ईसाई लड़कियों को फँसाकर उनका मतांतरण करना | लव जिहाद की शुरुआत 1996 में कुछ मुस्लिम संस्थाओं की मदद से हुई थी और अब इसकी व्याप्ति पूरे भारत देश में फैल रही है |

 
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